शराबबंदी पर नीतीश का यू-टर्न, अब जब्त नहीं होंगे घर, गाड़ी और खेत
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में कुल 39 एजेंडों पर मुहर लगाई गई.

पटना: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर बिहार कैबिनेट ने बड़ा फैसला किया है. नीतीश कैबिनेट ने शराबबंदी के कड़े कानूनों में बदलाव करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. जानकारी के मुताबिक अब शराब मिलने पर घर, गाड़ी और खेत जब्त करने के प्रावधान को खत्म किया जाएगा. इससे पहले नीतीश कुमार कई बार कह चुके हैं कि उनकी सरकार शराबबंदी के कड़े कानूनों पर कानूनविदों से सलाह कर रही है और इसे आगामी विधानसभा सत्र में संशोधन के लिए पेश किया जाएगा.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में कुल 39 एजेंडों पर मुहर लगाई गई. बिहार कैबिनेट की बैठक में शराबबंदी कानून में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया गया तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई के लिए ग्रिड बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई.
सूत्रों के हवाले से एबीपी न्यूज़ को जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक इस कानून को तोड़ने वाले मुजरिमों को जिसने तीन साल की सजा पूरी कर ली है वो बाहर निकलेंगे. सजा के कई कड़े प्रावधान खत्म होंगे. पहली बार पकड़े जाने वालों के लिए भी नए सिरे से सजा पर विचार हो सकते हैं.
बिहार में 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है और इसे सख्ती से लागू करने के लिए नीतीश सरकार ने बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम सर्वसम्मिति से विधानमंडल में पारित कराया था. लेकिन बाद में इसके कुछ प्रावधानों को कड़ा बताए जाने तथा इस कानून के दुरूपयोग का आरोप लगाते हुए विपक्ष की तरफ से इसकी आलोचना की जाती रही है.
बीते 11 जून को लोकसंवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान शराबबंदी कानून में कुछ तब्दीली से संबंधित सवाल के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार ने राज्य में पूरी ईमानदारी से शराबबंदी कानून को लागू किया है. इसमें कुछ कड़े प्रावधान हैं, इसके लिए कार्यक्रम में एक राय बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक की गई थी.
नीतीश कुमार ने कहा था कि कानून का दुरुपयोग न हो, इसके लिए मुख्य सचिव ने अधिकारियों की एक कमिटी बनायी है, जो अध्ययन के आधार पर यह जानकारी देगी कि इसमें क्या सुधार किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट में इससे संबंधित मामला चल रहा है. इसलिए अपने वरिष्ठ वकील और महाधिवक्ता से विचार करेंगे और उसके बाद ही कुछ फैसला लिया जाएगा. कानूनी और संवैधानिक पहलू को ध्यान में रखते हुए इन सब चीजों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है.
बता दें कि मद्यनिषेध और उत्पाद विधेयक-2016 में कड़े सजा के प्रावधान किए गए हैं. इसके तहत तहत पांच साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और नशे में पकड़े जाने पर न्यूनतम एक लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक आर्थिक दंड का प्रावधान है. सरकार के दावों के मुताबिक, शराबंदी का उल्लंघन करने के आरोप में सवा लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
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