राजस्थान: अमित शाह का एलान, वसुंधरा राजे होंगी बीजेपी की सीएम उम्मीदवार
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस नकारात्मक राजनीति कर अफवाहें फैलाने का काम कर रही है. यह लोकतंत्र पर अघोषित हमला है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश से अपना जुड़ाव महसूस नहीं कर सकते, कांग्रेस बीजेपी का मुकाबला नहीं कर सकती.

जयपुर: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एलान किया कि राजस्थान में आने वाला विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और प्रचंड बहुमत के साथ वह एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगी. शाह ने कहा कि राजस्थान के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में पार्टी एक बार फिर सरकार बनायेगी और 2019 में नरेन्द्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बनेंगे. अमित शाह ने शनिवार को जयपुर के तोतूका भवन में बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक के समापन सत्र में यह बात उन्होंने कहा कि राजस्थान में एक बार बीजेपी और एक बार कांग्रेस की परम्परा इस बार टूटने जा रही है. उन्होंने कहा कि वसुन्धरा राजे की सरकार ने राजस्थान में बहुत काम किया है. भामाशाह योजना, मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान और गौरव पथ जैसी कई योजनाओं को देशभर में यश मिला है.
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस नकारात्मक राजनीति कर अफवाहें फैलाने का काम कर रही है. यह लोकतंत्र पर अघोषित हमला है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश से अपना जुड़ाव महसूस नहीं कर सकते. कांग्रेस बीजेपी का मुकाबला नहीं कर सकती. कांग्रेस का सगठनात्मक ढांचा खत्म हो गया है. अब तो कांग्रेस में भ्रष्टाचारियों को जमघट बचा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, कनार्टक जब तक नहीं जीत लेते तब तक हमारी जीत पूरी नहीं है.
क्यों अहम है वसुंधरा राजे के नाम का एलान? माना जा रहा था कि बीजेपी वसुंधरा राजे के अलावा किसी दूसरे चेहरे पर दांव खेल सकती है लेकिन अमित शाह ने सारे कयासों पर ब्रेक लगा दिया है. अमित शाह ने कड़ा संदेश अपने कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों को दिया है. हालांकि इसके बाद भी विवाद खत्म हो जाएंगे कहना मुश्किल है. कुछ दिन पहले ही मोदी सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गजेंन्द्र सिंह शेखावत ने वसुंधरा पर निशाना साधते हुए कहा था कि राजस्थान में जीत सिर्फ मोदी की वजह से मिली थी. केंद्रीय मंत्री शेखावत और सीएम वसुंधरा राजे के विवाद अध्यक्ष पद को लेकर हुआ था. बीजेपी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वसुंधरा के क़रीबी अशोक परनामी ने 17अप्रेल को पार्टी अध्यक्ष पद से अपना त्यागपत्र दिया था. तभी से वसुंधरा और बीजेपी आलाकमान के बीच सम्बन्धों में खटास होने लगी थी. बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम राजस्थान अध्यक्ष के लिए बढ़ाया तो वसुंधरा ने इसका विरोध किया. क़रीब 74 दिन तक राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष के बिना रही लेकिन इस विवाद में आख़िर जीत वसुंधरा राजे की हुई और गजेंद्र सिंह की जगह मदन लाल सैनी अध्यक्ष बने. सैनी के अध्यक्ष बनने के तुरंत बाद पी एम नरेंद्र मोदी 7जुलाई को जयपुर में एक रैली में शामिल होने आए और तब उन्होंने सी एम वसुंधरा राजे के साथ मंच को जिस तरह साझा किया तब ही साफ़ हो गया था कि बीजेपी के लिए राजस्थान के विधानसभा चुनाव बेहद अहम है और वो चुनाव से पहले किसी तरह के विवाद यहाँ पैदा नहीं करना चाहते. अब अमित शाह के इस बयान से ये संदेश दिया गया है कि राजस्थान में बी जे पी एक जुट है और वसुंधरा राजे ही एक मात्र सर्व मान्य नेता है. पार्टी के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी राजे के खिलाफ बगावत कर बीजेपी छोड़ अपनी पार्टी बना चुके हैं. हुए बीजेपी छोड़ दी थी. साथ ही उन्होंने नई पार्टी का ऐलान किया था. यही वजह है कि इस बार चर्चा थी कि वसुंधरा की जगह कोई और नाम आगे आ सकता है लेकिन ऐसा हुआ नहीं.राजस्थान में वसुंधरा राजे की परफॉर्मेंस कैसी? राजस्थान में 200 विधानसभा सीटें हैं, बीजेपी ने 2003, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में वसुंधरा राजे को चेहरे पर भरोसा जताया था. 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को दो तिहाई से ज्यादा बहुमत मिला था. 163 सीट वसुंधरा के नेतृत्व में मिली थीं जबकि कांग्रेस सिर्फ 21सीट पर सिमट गई थी, 2008 में वसुंधरा के नेतृत्व में ही बीजेपी उतरी थी. 2008 में कांग्रेस को 96 सीट मिली थीं तो बीजेपी को सिर्फ 78 सीट मिली थीं. लेकिन 2003 में वसुंधरा के नेतृत्व में बीजेपी को 120 सीट मिली थीं जबकि कांग्रेस को सिर्फ 56 सीट ही मिलीं थीं. 2013 से लेकर अब तक राजस्थान में कुल 17 उपचुनाव हुए हैं जिनमें वसुंधरा राजे को एक बार भी कामयाबी नहीं मिली. यही वजह है बीजेपी के अंदर वसुंधरा राजे के खिलाफ बगावत का माहौल था जिसे दरकिनार कर अमित शाह ने वसुंधरा के नाम का एलान किया है.























