आतंक की राह छोड़ सेना में हुए शामिल, देश के लिए दी शहादत, जानें अशोक चक्र विजेता नजीर अहमद वानी की कहानी
बता दें नजीर की जिंदगी युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है. आतंकवाद के रास्ते को छोड़ कर भारतीय सेना में शमिल हुए लांस नायक नजीर 23 नवंबर 2018 को एक आतंवादी मुठभेड़ में शहीद हो गए थे.

नई दिल्ली: आंतक के रास्ते को छोड़कर देश के लिए शहादत देने वाले लांस नायक नजीर अहमद वानी को अशोक चक्र से सम्मानित किया जाएगा. गणतंत्र दिवस के दिन देश के इस बेटे को मरणोपरांत सेना के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. बता दें नजीर की जिंदगी युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है. आतंकवाद के रास्ते को छोड़ कर भारतीय सेना में शमिल हुए लांस नायक नजीर 23 नवंबर 2018 को एक आतंवादी मुठभेड़ में शहीद हो गए थे. आईए जानते हैं उनकी जिंदगी की दिलचस्प कहानी..
किसी जमाने में बंदूक लेकर घर से निकल पड़े नजीर को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह आतंक का रास्ता छोड़ कर सेना में शामिल हो गए. 23 नवंबर 2018, वहीं दिन था जब भारत मां के इस सपूत ने देश की सुरक्षा में अपनी जान दे दी. इस दिन नजीर 34 राष्ट्रीय रायफल्स के साथियों के साथ ड्यूटी पर थे तभी उन्हें खूफिया सूत्रों से जानकारी मिली की बटागुंड गांव में हिज्बुल और लश्कर के 6 आतंकी छुपे हुए हैं और उनके पास भारी तादाद में असला और बारुद हैं. बस फिर क्या था देश के इस जाबाज ने प्राण की परवाह किए बिना ही उन आतंकियों को रोकने की ठान ली.
नजीर ने साहस के साथ उन आतंकियों का सामना किया और दो आतंकियों को मार गिराया. लेकिन तभी इस मुठभेड़ में वानी और उनके साथी भी गंभीर रुप से घायल हो गये, इसके बावजूद उनकी टीम ने सभी आतंकियों को मार गिराया. अस्पताल में इलाज के दौरान वह शहीद हो गऐ.
बता दें कि वानी ने साल 2004 में टेरीटोरियल आर्मी की 162 बटालियन के साथ अपना करियर शुरू किया था. मालूम हो कि 162 टेरीटोरियल आर्मी में बड़े पैमाने पर इख्वानी शामिल हैं. इख्वानी उन्हें कहा जाता है, जो कभी आतंकी होते हैं और बाद में आत्मसमर्पण करके भारतीय सेना में शामिल हो जाते हैं.
अशोक चक्र से सम्मानित शहीद लांस नायक नजीर अहमद वानी की पत्नी मेहजबीन ने कहा कि उनके पति के पराक्रम का ओज ऐसा था जिसने उनकी शहादत की खबर सुनकर भी आंखों से आंसू नहीं बहने दिए.
मेहजबीन ने कहा, “उनके शहीद हो जाने की खबर जानने के बाद मैं रोई नहीं. एक अंदरूनी संकल्प था जिसने मुझे रोने नहीं दिया.” पेशे से शिक्षक और दो बच्चों की मां मेहजबीन ने कहा कि नाजिर का प्यार एवं निडर व्यक्तित्व, युवाओं को अच्छा नागरिक बनने की दिशा में प्रोत्साहित करने का प्रेरणास्रोत है. दक्षिण कश्मीर के एक स्कूल में 15 साल पहले हुई मुलाकात में दोनों के बीच पहली नजर का प्यार हो गया था. हालांकि इस बारे में उन्होंने और जानकारी देने से इनकार कर दिया.























