By: ABP News Bureau | Updated at : 23 Sep 2016 09:41 PM (IST)
नई दिल्ली: उरी हमले में पाकिस्तान को सबक सिखाने की रणनीति बनाते हुए भारत सरकार को भी कई तरह के सबकों से दो चार होना पड़ रहा है. दरअसल चुनौती कूटनीतिक और सैन्य कारवाई के बीच सामंजस्य बनाने की है. ऐसा न हो कि एक पड़ोसी देश पर कारवाई करने से दूसरे पड़ोसी के हितों को नुकसान हो जाए और बैठे-बिठाए भारत के इर्दगिर्द दो दुश्मन और मुखर होकर जवाबी हमला करने पर उतारू हो जाएं. इसलिए हवाई हमले के विकल्प को तो फ़िलहाल शीर्ष नेत्रत्व ने सिरे से ख़ारिज कर दिया है.
उरी हमले के बाद पाकिस्तान को लेकर रणनीतिक मंत्रणा का दौर जारी है. कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान को घेरने की तैयारियों के बीच आतंक के वैश्विक सप्लायर को जमीनी मोर्चे पर सबक सिखाने की रणनीति को अंजाम दिया जा रहा है. उरी के जिम्मेदारों को न बख्शने का एलान कर चुके पीएम मोदी खुद इन तैयारियों पर नज़र बनाए हुए हैं. इस बीच रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर शुक्रवार को राजनाथ सिंह से उनके घर जाकर मुलाकात की.
जानकारी के मुताबिक सीमा पर सैन्य तैयारियों, पीओके के शिविरों के स्थान बदलने व कुछ के आस्थाई रूप से बंद होने के साथ सीमा के निकट स्थित घुसपैठियों के लांचिंग पैड पर आतंकियों के बढ़ रहे जमावड़े पर बात हुई. इसके साथ ही मुम्बई में संदिग्ध आतंकियों से जुडी ख़बरों व गोवा में होने वाले ब्रिक्स सम्मलेन की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. सूत्रों के मुताबिक पूरी पश्चिमी सीमा पर वायु सेना को अत्यधिक सतर्कता बरतने के आदेश दिए गए, ऐसा ही निर्देश नौसेना को भी दिया गया है.
सूत्रों ने यह भी बताया की सिंधु नदी जल समझौते की समीक्षा को लेकर कोई विचार नहीं है. दरअसल कूटनीतिक मोर्चे पर पाक फतह करने को लेकर निश्चिन्त सरकार ऐसे निर्णयों से बचना चाह रही है जिनसे मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बन सकता हो. भारत सरकार ऐसा कोई भी कदम उठाना से बचना चाहती है जिससे मानव अधिकार उल्लंघन को लेकर उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि पर बट्टा लगे.
ऐसी स्थिति में पाकिस्तान तो ठीक चीन के साथ भारत सरकार का एक नया मोर्चा खुल सकता है. और भारत सरकार फिलहाल दो-दो मोर्चों पर कूटनीतिक लड़ाई लड़ने की स्थिति में नहीं है. सिंधु नदी संधि को एकतरफा रद्द करने से भारत के लिए चीन मुश्किलें खड़ी कर सकता है. भारत ने पिछले 56 सालों में कभी भी इस संधि का उल्लंघन नहीं किया है और एक कदम से वो अपनी साख़ पर बट्टा नहीं लगाना चाहेगा. ऐसे में भारत के पानी रोकने को लेकर पाकिस्तान दुनिया के मंच पर भारत के खिलाफ एक और मोर्चा खोलेगा और वह इसे मानवाधिकारों से जोड़ेगा.
हालांकि बेहद सीमित विकल्पों के बावजूद भी भारत सरकार पाकिस्तान को कड़ा सबक देने की तैयारी में है. लेकिन इनमें हवाई हमले या पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले की बजाय ऐसा होने का डर पैदा किया जा रहा है.
लेकिन भारतीय सेना बॉर्डर के आसपास छापामार शैली में आतंकियों के लांचिंग पैड को निशाना बनाने और कॉवेर्ट ऑपरेशन के जरिये आतंक के आकाओं का खत्म करने से भी नहीं चूकेगी. एक अन्य रणनीति के तहत सीमा पर सेना का दबाव बढ़ाकर पाकिस्तान को भी ऐसा ही करने पर मजबूर किया जाएगा. जिससे पाकिस्तान अपने नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में सेना का आतंक विरोधी अभियान बंद कर भारतीय सीमा पर तैनात करने को बाध्य हो जाए.
ऐसा होने से एक बार फिर पाकिस्तानी भस्मासुर उसी की जमीं पर आतंक का खूनी खेल शुरू करेंगे, जबकि पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव भी बढेगा. दरअसल पीओके पर हमला न करने का एक बड़ा कारण इलाके में चीन की कंपनियों के चल रहे प्रोजेक्ट भी है. वहाँ भारतीय सेना की करवाई से चीन को अपने नागरिकों की सुरक्षा के नाम पर सेना भेजने का बहाना मिल जाएगा. जो कि भारत के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है.
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