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क्या है बलूचिस्तान का मामला ? यहां के लोग क्यों चाहते हैं पाक  से आजादी ?

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नई दिल्ली: 70वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान और ‘पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर’ की ‘आजादी’ का खुले तौर पर समर्थन किया. पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया देख रही है. पिछले कुछ दिनों में बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर के लोगों ने मेरा आभार जताया है.” उन्होंने कहा, “मैं उनका शुक्रगुजार हूं.” मोदी ने पिछले सप्ताह कहा था कि पाकिस्तान को दुनिया को यह जवाब देने का समय आ गया है कि वह पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर व बलूचिस्तान के लोगों पर क्यों अत्याचार कर रहा है. आइए आप को बताते हैं कि आखिर क्या है बलूचिस्तान का पूरा विवाद और यहां के लोग क्यों चाहते हैं पाक से आजादी. बलूचिस्तान पूरे पाकिस्तानी प्रांत का 44% हिस्सा है. जो कि खनिज के क्षेत्र में समृद्ध है. पाकिस्तान चरमपंथी गुटों और अलगाववादी गुटों पर नियंत्रण रखने के नाम पर यहां के लोगों पर सैन्य कारवाई कर रहा है. साल 1952 में इस क्षेत्र में गैस भंडार का पता चला अगर आर्थिक असंतोष को लेकर चले तो इसकी एक झलक इस घटना से मिल सकती है कि, साल 1952 में इस क्षेत्र के डेरा बुगती में गैस के भंडार का पता लगाया गया. साल 1954 से यहां से गैस का उत्पादन शुरू हुआ और उसका लाभ पूरे पाकिस्तान को मिलने लगा लेकिन बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा को 1985 में इस पाइपलाइन से जोड़ा गया. इसी क्षेत्र के चगाई मरूस्थल में साल 2002 से सड़क परियोजना शुरू की गई. जो कि चीन के साथ तांबा, सोना और चांदी उत्पादन करने की पाकिस्तानी योजना है. इससे प्राप्त लाभ में चीन का हिस्सा 75 प्रतिशत है और 25 प्रतिशत पाकिस्तान का. इस 25 प्रतिशत में से इस क्षेत्र को महज 2 प्रतिशत की हिस्सेदारी दी गई है. शातिं के नाम पर लोगों का अपहरण और हत्याएं अगर मानवाधिकार हनन के मुद्दों को देंखे तो पता चलेगा कि यहां पाकिस्तानी सेना शाति बनाएं रखने के नाम पर लोगों के अपहरण और हत्या करने में संलग्न है. यहां के हालात के बारे में दुनिया को पता न चले इसलिए इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया पर कई पाबंदिया हैं. साथ ही साथ रिपोर्टरों पर भी जुल्म किए जाते हैं. रिपब्लिकन सांसद ने अधिकारों की मांग के लिए पेश किया प्रस्ताव इसी सबको ध्यान में रखकर कैलिर्फोनिया के रिपब्लिकन सांसद दाना रोहराबचेर ने दो अन्य सांसदों के समर्थन से अमेरिकी कांग्रेस में बलूचिस्तान के लोगों के लिए इन जुल्मों के खिलाफ ‘आत्मनिर्णयन’ के अधिकार की मांग वाला एक प्रस्ताव पेश किया है. हालांकि पाकिस्तान अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तुत इस प्रस्ताव को एक षडयंत्र का हिस्सा मानता है. यहां की सरकार और मीडिया का आरोप है कि इस प्रस्ताव द्वारा पाकिस्तान के ‘बल्कनीकरण’ करने की कोशिश है. प्रस्ताव में कहा गया है कि बलूचिस्तान का प्रदेश पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है. जहां के लोगों को कोई संप्रभु अधिकार नहीं दिया गया है. खास करके पाकिस्तान में बलूच लोगों को हिंसा और गैर कानूनी हत्या का शिकार बनाया जा रहा है. इसलिए बलूच लोगों का आत्मनिर्णय का अधिकार मिले और उनका अपना संप्रभु देश हो. हाल की घटनाएं ह्यूमन राइट कमीशन पाकिस्तान ने अपनी जून 2011 की रिपोर्ट में कहा है कि 140 लापता व्यक्तियों के शव जुलाई 2010 से मई 2011 के बीच बरामद हुए हैं. हाल ही में सुरक्षा बलों की तरफ से बलूच लोगों और नेताओं की हत्याओं ने इस क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है. 31 जनवरी 2012 में मीर बख्तियार डोमकी नाम के बलूचिस्तान क्षेत्र से पाकिस्तानी संसद की बेटी और पत्नी की हत्या कर दी गई थी. बलूचिस्तान में असंतोष को लेकर भारत को जिम्मेदार ठहराता है पाक पाकिस्तान बलूचिस्तान में बढ़ रहे असंतोष और राष्ट्रवादी गतिविधियों को ‘विदेशी हाथ’ या साजिश कहके अपनी करतूतों पर पर्दा डालने की कोशिश करता रहा है. इन सब जुल्मों के द्वारा वह इसके लिए भारत को जिम्मेदार ठहराता आ रहा है. लेकिन अब सच्चाई दुनिया के सामने है और पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग, वाह्य संस्थान और अमेरिकी मानवाधिकार से संबंधित संस्थानों के आंकड़े से स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान अपनी गलतियों को छुपाने के लिए यह दुष्प्रचार कर रहा है. क्या है बलूचिस्तान ? बलूची राष्ट्रवादी अपने जायज अधिकारों के लिए ही लड़ रहे हैं. बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से मालामाल है, बलूचिस्तान में यूरेनियम, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस, तांबा और कई अन्य धातुओं के भंडार हैं. पाकिस्तान की कुल प्राकृतिक गैस का एक तिहाई यहीं से निकलता है. सुई के स्थान पर जो गैस पैदा होती है उसकी आपूर्ति पूरे पाकिस्तान में होती है लेकिन प्राप्त रायल्टी का बहुत थोड़ा हिस्सा ही केन्द्रीय सरकार बलूचिस्तान को देती है. बलूचियों को कहना है कि पाक संविधान के 18वें संशोधन के तहत उन्हें विशेष अधिकार प्राप्त हैं जबकि हकीकत में प्राकृतिक संसाधनों पर केन्द्र का अधिकार बना हुआ है. बलूचियों का कहना है कि बलूचिस्तान में अधिकांश सरकारी कर्मचारी या अफसर पंजाब प्रांत से संबंध रखते हैं, इसलिए बलूचियों को नौकरी नहीं मिल पाती. 1948 में पाक में मिला बलूचिस्तान उल्लेखनीय है कि बलूच अलगाववादियों और पाक सरकार के बीच इस विवाद की शुरूआत पाकिस्तान के निर्माण के कुछ समय बाद ही हो गई थी. 15 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान ने आजादी का ऐलान भी कर दिया था लेकिन 1948 में उन्हें दबाव के तहत पाक के साथ मिलना पड़ा अप्रैल 1948 में पाक सेना ने मीर अहमद यार खान को जबरन अपना राज्य कलात छोड़ने पर मजबूर कर दिया. उनसे कलात की आजादी के खिलाफ एग्रीमेंट साइन करवा लिए गए लेकिन मीर अहमद के भाई प्रिंस अब्दुल करीम खान नहीं चाहते थे कि बलूचिस्तान का 23 प्रतिशत क्षेत्र पाकिस्तान के अधीन हो. 1948 में खान ने पाक सरकार के खिलाफ फूंका अलगाव का बिगुल मई 1948 में अब्दुल करीब खान ने पाक सरकार के खिलाफ अलगाव का बिगुल फूंका और अफगानिस्तान से पाक सैनिकों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ दिया जो अब तक जारी है. 1958 में इस सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व कर रहे नवाब नवरोज खान को उनके सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया और नवरोज खान के बेटों और भतीजों को फांसी दे दी गई. नवरोज खान की भी जेल में रहने के दौरान मौत हो गई. पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को अपना चौथा राज्य घोषित करते हुये उसे मान्यता प्रदान की. लेकिन इसके बाद भी बलूचिस्तान में आजादी की जंग जारी रही. भुट्टो ने 1973-74 के दौरान वहां मार्शल ला लागू कर दिया और वहां कि सरकार को बर्खास्त कर दिया. उस दौरान बलूचिस्तानी आंदोलनकारियों के ऊपर दमनात्मक कार्रवाई भी हुई और सात से आठ हजार बलूचिस्तानी जनता को अपनी जान गंवानी पड़ी. लेकिन साथ ही साथ पाकिस्तान की सेना के भी चार सौ से ज्यादा जवान मारे गये. 2005 में बलूच के नेता बुगती और मीर ने पाक सरकार के सामने रखी 15 सूत्री मांग आंदोलन को दबाने के लिए उसके नेताओं को गिरफ्तार करके सरेआम गोली मार देने का सिलसिला जारी रहा. आंदोलनकारी भी सशस्त्र विरोध करते रहे और हार नही मानी. 2005 में बलूच के नेता नवाब अखबर खान बुगती और मीर बलाच मार्री ने पाक सरकार के सामने 15 सूत्री मांग रखी. इनमें प्रांत के संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण और सैनिक ठिकानों के निर्माण पर रोक जैसे मुद्दे शामिल थे. इन्हें नकार दिया गया और संघर्ष चलता रहा. परवेज मुशर्रफ के ऊपर किया गया था राकेट से हमला अगस्त 2006 में 79 साल के अखबर खान की सेना से मुठभेड़ में मौत हो गई. इसी संघर्ष में 60 पाकिस्तानी सैनिक और 7 अधिकारियों की जान भी चली गई. सशस्त्र क्रांतिकारियों द्वारा परवेज मुशर्रफ के ऊपर राकेट से हमला किया गया जिसमें वे बाल-बाल बच गये. अप्रैल 2009 में बलूच आंदोलन के अध्यक्ष गुलाम मोहम्मद बलूच को गिरफ्तार किया गया लेकिन अगस्त 2009 में कलात ने खान मीर सुलेमान दाऊद ने खुद को बलूचिस्तान का शासक घोषित कर दिया. भारत पर लगा क्रांतिकारियों की मदद का आरोप हालांकि भारत पर उन क्रांतिकारियों की मदद करने का आरोप लगता रहा है लेकिन उनके पास जिस तरह के हथियार है, उसे देखकर नहीं लगता कि किसी बाहरी देश से उन्हें सहायता मिल रही है. अत्यंत सामान्य हथियार और पाकिस्तान की सेना से लूटे गये हथियारों की बदौलत बलूचिस्तान के क्रांतिकारियों का संघर्ष जारी है. दुनिया के अन्य देशों द्वारा मदद न मिलने का परिणाम है कि तालिबान ने उनके बीच घुसपैठ करके जगह बनानी शुरु कर दी है. हालांकि इस प्रस्ताव का कोई कानूनी यथार्थ लेने की संभावना नहीं है. इसे दबावकारी रणनीति का एक हिस्सा मान सकते हैं क्योंकि अमेरिका को यह अच्छी तरह पता है कि उसके आतंकवाद विरोधी अभियान में पाकिस्तान बहुत महत्वपूर्ण है. इसलिए वह पाकिस्तान को बल्कनीकरण के प्रयास द्वारा अस्थिर नहीं करना चाहेगा. साथ ही साथ इस तरह वह पाकिस्तान पर चीन के बढ़ते प्रभाव पर नियंत्रण स्थापित करने का मौका भी खो बैठेगा. पीएम यूसुफ रजा गिलानी ने खारिज कर दिया था प्रस्ताव प्रस्ताव पेश करने से चंद दिन पहले ही ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरएन) और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अमेरिकी कांग्रेस के सामने पाक सरकार पर अपने अशांत प्रांत बलूचिस्तान में दमनकारी नीति अपनाकर निर्मम बलप्रयोग करने का आरोप लगाते हुए, मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन पर गंभीर चिंता भी जताई थी. हालांकि पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा है कि यह हमारी स्वायत्तता का उल्लंघन है, तो विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार का कहना है कि यह प्रस्ताव पाक-अमेरिका के संबंधों को और खराब करेगा. पाक संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से उक्त प्रस्ताव के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए हैं जिसमें अमेरिकी प्रस्ताव को पाक के आंतरिक मामलों में दखल करार दिया गया है इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ भी बताया गया है. अमेरिका के खिलाफ पाक जनता में रोष पाकिस्तान में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जिनका कहना है कि अमेरिका ईरान पर नजर रखने के लिए बलूचिस्तान में अपने सैनिक अड्डे बनाना चाहता है. इस आरोप को अमेरिका ने खारिज कर दिया है. दूसरी तरफ बलूच राष्ट्रवादियों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है और अमेरिका का शुक्रिया अदा किया है. बहरहाल इस प्रस्ताव ने पाक की सभी राजनीतिक और धार्मिक पार्टियों को तमाम आपसी मतभेदों के बावजूद एकजुट कर दिया है अमेरिका के खिलाफ पाक जनता में रोष भी बढ़ गया है. बलूचिस्तान कि समस्या पाकिस्तान के सामने उपस्थित बड़ी समस्याओं से जुड़ी हुई है. उत्कृष्ट संघीय व्यवस्था इस समस्या का समाधान प्रस्तुत कर सकती है. लेकिन पाकिस्तान में स्वयं लोकतंत्र ही संकट में है ऐसे में अच्छी संघीय पद्धति एक कल्पना ही मात्र है. पाकिस्तान में बलूचिस्तान कि समस्या का समाधान लोकतंत्र के प्रश्न से जुड़ा हुआ है. अतः आने वाले समय में लोकतंत्र की समर्थक सभी शक्तियों को इस दिशा में प्रयास करना होगा.
Published at : 15 Aug 2016 11:23 AM (IST)
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