By: शिवेन्द्र कुमार सिंह, वरिष्ठ खेल पत्रकार | Updated at : 04 Aug 2016 02:25 PM (IST)
नरसिंह यादव का रियो जाना अब तय हो गया है. अब दुआ बस इतनी करनी है कि उनके शरीर में प्रतिबंधित दवाओं के जो कण थे, वो जल्दी से जल्दी बाहर चले जाएं. अगर ये विवाद नहीं हुआ होता तो ओलंपिक में दावेदारी के लिहाज से पहलवानों पर चर्चा जरूर होती. पुरूष, महिला के फ्री स्टाइल और ग्रीको रोमन को मिलाकर भारत के 8 पहलवान ओलंपिक में दावेदारी पेश कर रहे हैं. पिछली बार ये संख्या 5 थी.

पिछली बार के मुकाबले इस बार ज्यादा महिला पहलवान ‘मैट’ पर उतरेंगी. इसमें से योगेश्वर और नरसिंह को छोड़कर सभी पहलवानों का ये पहला ओलंपिक है. दिलचस्प बात ये है कि योगेश्वर के सबसे सीनियर होने के बाद भी 2016 रियो में भारतीय पहलवानों की कहानी नरसिंह यादव के इर्द गिर्द ही घूमती रहेगी.
कुश्ती के मुकाबलों की तारीख ओलंपिक ट्रेनिंग सेंटर के हॉल नंबर तीन में 14 से 21 अगस्त तक कुश्ती के इवेंट्स होंगे. जिसे फ्रीस्टाइल और ग्रीको रोमन कैटेगरी में बांटा गया है. इसमें अलग अलग भार वर्ग में मुकाबले होंगे. कुल 18 इवेंट्स होंगे, यानी कुल 18 गोल्ड मेडल होंगे. जिसके लिए दुनिया भर के करीब साढ़े तीन सौ पहलवान मैट पर दांव लगाएंगे.
योगेश्वर का दावा कितना मजबूत योगेश्वर दत्त भारत के सबसे अनुभवी पहलवान हैं. उनका ये चौथा ओलंपिक है. पिछले ओलंपिक में उन्होंने ‘मैट’ पर आखिरी राउंड में ‘फीतले’ दांव लगाकर ब्रांज मेडल पर कब्जा किया था. पहले दोनों राउंड तक मुकाबला बराबरी पर चल रहा था. हम सभी स्टेडियम में गला फाड़ फाड़ कर योगेश्वर और इंडिया इंडिया के नारे लगा रहे थे. तीसरे राउंड में योगेश्वर शुरू से आक्रामक थे.

उनके दिमाग में कुछ चल रहा था. मैट के बाहर से कोच विनोद कुमार लगातार चिल्ला चिल्ला कर कुछ समझा रहे थे. तीसरे राउंड में अभी करीब एक मिनट हुए होंगे जब योगेश्वर ने विरोधी पहलवान के दोनों पैरों को आपस में ऐसा उलझाया कि वो बस मैट पर घूमते चले गए और योगेश्वर उन्हें घुमाते चले गए.
इस लिंक पर क्लिक कर आप भी देखिए वो शानदार बाउट इस बार भी योगेश्वर का दावा मजबूत है. वो काफी समय से तैयारी कर रहे हैं. पहवलानी में हुए तमाम विवादों से वो दूर हैं. उन्हें इस बात का फायदा मिल सकता है कि जब पहलवानी के खेल में इतने विवाद चल रहे थे तो वो इन सबसे दूर थे. दूसरा अब आम लोगों की दिलचस्पी नरसिंह यादव में ज्यादा है, इसलिए योगेश्वर को खुद पर फोकस करने में आसानी होगी चाहिए.
कितनी व्यवहारिक है नरसिंह से मेडल की उम्मीद नरसिंह यादव का नाम अचानक इस देश का बच्चा बच्चा जान गया. नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी के दफ्तर के बाहर उनके नाम को लेकर जिस तरह नारे लगे, देश के प्रधानमंत्री तक ने उनसे मुलाकात की, जाहिर है कि उनका नाम अब हर किसी के लिए परिचित हो चुका है. लेकिन सवाल ये है कि उनके साथ पिछले कुछ महीनों में जो कुछ हुआ उसके बाद क्या उनके मेडल जीतने की संभावना बची हुई है. नरसिंह यादव वर्ल्ड क्लास पहलवान हैं. उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीता है. लेकिन मौजूदा हालात में क्या वो मेडल की तैयारियों के लिहाज से सही रास्ते पर थे. इसका सीधा जवाब है-नहीं. जब उन्हें मैट पर पसीना बहाना चाहिए था,
जब उन्हें विरोधी पहलवानों के वीडियो फुटेज देखने चाहिए थे, तब वो खुद को बेकसूर साबित करने की लड़ाई लड़ रहे थे. हालांकि स्वाभाविक तौर पर इसका एक दूसरा पहलू भी है. अंग्रेजी की एक कहावत है ‘ब्लेसिंग इन डिसगायज़’ यानी कई बार आपकी परेशानियां ही आपके लिए ताकत बन जाती हैं. हिंदुस्तानी फिल्मों का आम सीन है कि हीरो जब तक खूब पिट ना जाए, जब तक उसके होंठ के बगल से या सर के कोने से खून की धार ना निकल जाए ना तो उसे अपनी ताकत का पता चलता है और ना ही वो ‘विलेन’ की धुलाई करता है.
इस तरह के सैकड़ों सीन की फिलॉसफी यानी दर्शन को समझना होगा, जो कहता है कि चैंपियन वो होता है जो तमाम चुनौतियों से जूझने के बाद भी खुद को साबित करता है. क्या कोर्ट और नाडा ऑफिस के लगाए गए चक्कर खून की उस धार का काम कर जाए जो हर बात को मुमकिन बना देती है. फ्रीस्टाइल में भारत की तरफ से संदीप तोमर भी हैं, ओलंपिक क्वालीफाइंग चैंपियनशिप के जरिए उन्होंने ओलंपिक का टिकट हासिल किया था. ये उनका पहला ओलंपिक है, पहले ओलंपिक में वो खुद को किस स्तर का पहलवान साबित कर पाएंगे, अभी नहीं कहा जा सकता है.
कितना मजबूत है महिला पहलवानों और ग्रीको रोमन में भारत का दावा महिलाओं में भारत की तरफ से विनेश फोगट (48 किलो), बबिता कुमारी (53 किलो) और और साक्षी मलिक (58 किलो) दावा पेश करेंगी. ग्रीको रोमन में रविंद्र खत्री (85 किलो) और हरदीप सिंह (98 किलो) में मैट पर उतरेंगे. इन सभी पहलवानों की साख को देखते हुए विनेश फोगट ही हैं, जिनसे ओलंपिक में करिश्मे की उम्मीद की जा सकती है.

उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में ब्रांज और सिल्वर मेडल जीता हुआ है. कॉमनवेल्थ चैपियनशिप में भी वो मेडल जीत चुकी हैं. वो ऐसे परिवार से आती हैं, जिनका पहलवानी का इतिहास रहा है. क्या पता वो महिलाओं की पहलवानी की अगली स्टार बनने वाली हों.
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