Dussehra 2026: दशमी दोपहर 12:50 बजे से, फिर आज ही क्यों होगा रावण दहन? समझें धर्मशास्त्र का नियम
Dussehra 2026 Ravan Dahan: दशमी 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे शुरू होगी. फिर दशहरा आज ही क्यों मनाया जा रहा है? समझें अपराह्न, श्रवण नक्षत्र और शाम के रावण दहन का अंतर.

Dussehra 2026: आज 20 अक्टूबर की सुबह नवमी तिथि और शाम को दशहरे का उत्सव. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब दशमी दोपहर 12:50 बजे शुरू हो रही है, तो रावण दहन आज ही क्यों? क्या दशहरा अगले दिन मनाना चाहिए, जब सूर्योदय के समय दशमी होगी?
इस उलझन का जवाब विजयादशमी के पर्व-निर्णय में मिलता है. दशहरा तय करने के लिए सिर्फ सूर्योदय की तिथि नहीं देखी जाती. अपराह्न में दशमी की मौजूदगी और श्रवण नक्षत्र का संयोग भी महत्वपूर्ण है. धर्मसिंधु के 'विजयादशमीनिर्णय' में इन्हीं स्थितियों के आधार पर दिन चुनने का विधान मिलता है.
आज दशमी कब से कब तक है?
पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल दशमी 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे से 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे तक रहेगी. इसलिए आज शाम दशमी तिथि मौजूद होगी. दोपहर में तिथि शुरू होने और शाम को रावण दहन होने के बीच कोई तिथि-संबंधी विरोध नहीं है.
असल सवाल यह है कि दशमी दो तारीखों में होने के बावजूद विजयादशमी के लिए 20 अक्टूबर का चयन क्यों किया गया है.
धर्मशास्त्र में क्या है दिन चुनने का नियम?
धर्मसिंधु में विजयादशमी का निर्णय करते समय अपराह्न में दशमी की व्याप्ति, यानी उस अवधि में तिथि की मौजूदगी, देखी गई है. दो दिनों में दशमी मिलने पर श्रवण नक्षत्र का संयोग भी निर्णय में भूमिका निभाता है. इसलिए हर स्थिति में केवल 'उदयातिथि' देखकर दशहरा तय करना अधूरा तरीका होगा.
इस वर्ष 20 अक्टूबर को अपराह्न के दौरान दशमी और श्रवण, दोनों मौजूद हैं. श्रवण नक्षत्र आज शाम 6:02 बजे समाप्त होगा, जबकि दशमी अगले दिन दोपहर तक चलेगी. यही पंचांगीय स्थिति 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाने के निर्णय को समझाती है.
दोपहर की पूजा और शाम के रावण दहन का समय अलग क्यों?
विजयादशमी पर होने वाले सभी अनुष्ठानों को एक ही समय में समेटना भ्रम पैदा करता है. अपराजिता पूजा, शमी पूजा और सीमोल्लंघन के लिए अपराह्न का विशेष महत्व है. निर्णयसिंधु के विजयादशमी प्रकरण में भी अपराह्न को मुख्य कर्मकाल और प्रदोष को गौण काल बताया गया है.
दूसरी ओर रावण दहन रामलीला और दशहरा उत्सव की प्रचलित सार्वजनिक परंपरा है, जिसका आयोजन सामान्यतः सूर्यास्त के बाद होता है. इसलिए दोपहर की पूजा का मुहूर्त समाप्त होने से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि शाम का रावण दहन अनुचित हो गया. पूजा का निर्धारित समय और सार्वजनिक दहन का आयोजन समय अलग संदर्भ रखते हैं.
आज पूजा के लिए क्या समय है?
दिल्ली के लिए पंचांग में 20 अक्टूबर को ये समय दिए गए हैं:
अपराह्न पूजा काल- दोपहर 1:14 से 3:30 बजे
विजय मुहूर्त- दोपहर 1:59 से 2:45 बजे
ये दिल्ली NCR के स्थानीय समय हैं. दूसरे शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार पूजा की अवधि बदल सकती है. इस दोपहर वाले विजय मुहूर्त को पूरे देश के रावण दहन का अनिवार्य समय बताना सही नहीं होगा.
क्या 21 अक्टूबर को उत्सव मनाना गलत होगा?
पंचांग में विजयादशमी 20 अक्टूबर और बंगाल विजयादशमी 21 अक्टूबर को अलग-अलग दर्ज हैं. इसलिए दुर्गा पूजा से जुड़ी क्षेत्रीय परंपरा और उत्तर भारत के दशहरा आयोजन को एक ही नियम में रखकर किसी एक को गलत कहना उचित नहीं है.
आज शाम रावण दहन को लेकर मुख्य बात स्पष्ट है, उस समय दशमी तिथि रहेगी. सुबह नवमी होने के कारण शाम का दशहरा उत्सव अमान्य नहीं हो जाता. धर्मशास्त्रीय निर्णय समझने के लिए तिथि के साथ उस अनुष्ठान का निर्धारित काल भी देखना जरूरी है.
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