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कितना कामयाब है टखने का ट्रांसप्लांट, ऑपरेशन कराते वक्त किन बातों का रखें ध्यान?

ऐसी स्थिति में कई बार दवाएं, थैरेपी या इंजेक्शन काम नहीं करते हैं और तब डॉक्टर टखने की सर्जरी या टखने का ट्रांसप्लांट जिसे टखने की रिप्लेसमेंट सर्जरी कहा जाता है की सलाह देते हैं.

हमारा टखना यानी एंकल शरीर का एक बेहद जरूरी जोड़ होता है, जो हमें खड़े रहने, चलने, दौड़ने और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. लेकिन जब किसी को टखने में गठिया, चोट, या पुरानी बीमारी की वजह से लगातार दर्द, सूजन या जकड़न हो, तो नॉर्मल लाइफ जीना मुश्किल हो जाता है. ऐसी स्थिति में कई बार दवाएं, थैरेपी या इंजेक्शन काम नहीं करते हैं और तब डॉक्टर टखने की सर्जरी या टखने का ट्रांसप्लांट जिसे टखने की रिप्लेसमेंट सर्जरी कहा जाता है की सलाह देते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि टखने का ट्रांसप्लांट क्या होता है, कितना कामयाब है, किसे जरूरत पड़ती है और रिकवरी से जुड़ी जरूरी बातें ताकि आप या आपके किसी अपने को अगर यह प्रक्रिया करनी पड़े तो आप पूरी तरह से तैयार हों. 

टखने का ट्रांसप्लांट क्या होता है और कितना कामयाब है?

टखने की रिप्लेसमेंट सर्जरी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें टखने यानी एंकल के जो हिस्से खराब हो चुके होते हैं, जैसे हड्डियां और कारटीलेज, उन्हें सिंथेटीक मेटल और प्लास्टिक के जोड़ से बदल दिया जाता है. यह प्रक्रिया बिल्कुल घुटने या कूल्हे की रिप्लेसमेंट जैसी होती है, लेकिन टखना थोड़ा जटिल जोड़ होता है, इसलिए यह सर्जरी थोड़ी सावधानी और एक्सपीरियंस में ही होती है. 

ज्यादातर मामलों में टखने की रिप्लेसमेंट सर्जरी से लोगों को काफी राहत मिलती है. वे चलने-फिरने के काबिल बनते हैं और दर्द से राहत मिलती है. हालांकि यह जरूरी है कि प्रक्रिया एक एक्सपीरियंस आर्थोपेडिक सर्जन के जरिए की जाए और आप पोस्ट-ऑपरेटिव केयर का पूरा पालन करें. 

किन स्थितियों में जरूरत पड़ सकती है टखने की सर्जरी?

1. ऑस्टियोआर्थराइटिस - उम्र बढ़ने के साथ होने वाला जोड़ों का घिसाव के कारण टखने की सर्जरी कराने की जरूरत पड़ सकती है. 

2. रुमेटाइड आर्थराइटिस - इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारी, जो जोड़ों को नुकसान पहुंचाती है, इसके चलते भी टखने का ट्रांसप्लांट कराना पड़ सकता है. 

3. पोस्ट-ट्रॉमेटिक आर्थराइटिस - पुरानी चोट की वजह से होने वाली गठिया के कारण भी  टखने की सर्जरी कराने की जरूरत पड़ सकती है. 

4. टखने की गंभीर चोट या फ्रैक्चर - किसी तरह की बड़ी चोट और फ्रैक्चर हो जाने पर भी टखने का ट्रांसप्लांट कराना पड़ सकता है. 

ऑपरेशन कराते वक्त किन बातों का रखें ध्यान?

हर सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ संभावित जोखिम होते हैं. जैसे संक्रमण होना, खून बहना या थक्का बनना, नसों को नुकसान, जोड़ में फिर से गठिया या जकड़न और दोबारा से सर्जरी की जरूरत , इसके अलावा धूम्रपान, डायबिटीज, हड्डियों का कमजोर होना आदि इन जोखिमों को बढ़ा सकते हैं. इसलिए ऑपरेशन से पहले डॉक्टर से पूरी मेडिकल हिस्ट्री जरूर शेयर करें. डॉक्टर के सारे नियमों का पालन करें, सभी फॉलो-अप अपॉइंटमेंट पर जाएं, फिजियोथेरेपी बीच में न छोड़ें, अगर बुखार, तेज दर्द या सूजन हो तो तुरंत डॉक्टर को बताएं, साथ ही टखने पर अचानक भार डालने से बचें. 

यह भी पढ़ें : हाई ब्लड प्रेशर के साथ नजर आते हैं लिवर डैमेज के ये 5 लक्षण, भूलकर भी न करें इग्नोर 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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