दिल की बीमारी को निमंत्रण है यो-यो वेट लॉस थेरेपी, बढ़ जाता है स्ट्रोक का खतरा
लगातार बिजी लाइफस्टाइल के कारण वजन बढ़ जाना एक आम बात हो गई है. इस समस्या से निजात के लिए आजकल युवाओं में यो-यो वेट लॉस थेरेपी का चलन बढ़ रहा है पर इससे हार्ट प्रॉब्लम के खतरे काफी बढ़ गए हैं.

नई दिल्ली: आज के वक्त में बिजी लाइफस्टाइल के कारण कारण लोग अक्सर अपनी हेल्थ पर ठीक से ध्यान नहीं दे पाते हैं. इस वजह से वजन बढ़ जाना एक आम बात हो गई है. वजन बढ़ने के कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. वजन बढ़ने की इस परेशानी को रोकने के लिए आजकल युवाओं में यो-यो वेट लॉस थेरेपी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन हाल ही में अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन के जर्नल सर्कुलेशन में इस महीने के शुरू में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया है कि वेट कम करने की यह थेरेपी हेल्थ के ऊपर नेगेटिव इफेक्ट डालती है.
क्या है यो-यो वेट लॉस थेरेपी यो-यो वेट थेरेपी में क्रैश डाइट्स लिया जाता है. इस क्रैश डाइट में वजन को तेजी से कम करने के लिए जरूरत से कम कैलोरी लेकर जरूरत से ज्यादा कैलोरी खर्च की जाती हैं. इस वजह से शरीर का वेट तेजी से कम होता है. शोध में बताया गया है वेट लॉस करने की यह थेरेपी शुरुआत के लिए तो फायदेमंद हो सकती है लेकिन लंबी अवधि में यह शरीर को नुकसान पहुंचाती है.
शुरुआत में तो फायदेमंद लबें वक्त के लिए हानिकारक
शोध में कहा गया है अगर आप वजन कम करने के लिए क्रैश डाइट्स लेते हैं तो आप को यह शुरू में तो आकर्षक लग सकता है लेकिन ये आपके शरीर के लिए नुकसानदायक है. शोध से पता चला है इस थेरेपी की वजह से वजन, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर के लेवल मे तेजी से उतार-चढ़ाव आते है. इस वजह से हेल्थ के ऊपर हानिकारक प्रभाव पड़ता है.
इस अध्ययन में बताया गया है यो-यो वेट लॉस थेरेपी शरीर के ऊपर तेजी से इफेक्ट डालती है जिस वजह से दिल के दौरे और स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है. अचानक वजन घटाने और बाद में वजन बढ़ाना शरीर पर बहुत ज्यादा तनाव डालता है. क्रैश डाइट्स के दौरान, शरीर को कैलोरी का सिर्फ एक हिस्सा प्राप्त होता है जिसे बढ़ने की जरूरत होती है. इस उर्जा की पूर्ति के लिए शरीर तेजी से शरीर की वसा को जलाने लगता है. इसके नतीजतन, शरीर में सूजन और कोर्टिसोल का हाई और लो लेवल, तनाव और थकान का अनुभव होता है.
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दिल की बिमारी को निमंत्रण है यो-यो थेरेपी फूड एक्सपर्ट मैट एडवर्ड्स ने एक हेल्थलाइन को बताया "कोर्टिसोल एक तरह से शरीर का अलार्म सिस्टम है, जैसे ही शरीर खतरे में पड़ता है, कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है. लगातार कोर्टिसोल के हाई लेवल के कारण वजन बढ़ना, चिंता, अवसाद में वृद्धि, कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और ट्राइग्लिसराइड्स में वृद्धि हो जाती है." एडवार्ड्स ने बताया कि वजन घटाने के साथ आने वाले कोर्टिसोल में लगातार उतार-चढ़ाव दिल की बीमारी को बढ़ा सकते हैं.
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हरी सब्जियों पर करें ज्यादा फोकस
मैनहट्टन कार्डियोवैस्कुलर एसोसिएट्स के एक बोर्ड सर्टिफाइड कार्डियोलॉजिस्ट और लिपिडोलॉजिस्ट डॉ निकोल हार्किन ने कहा कि यो-यो वेट लॉस थेरेपी शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं है. इन सब की जगह लंबे वक्त के लिए टिकाउ आदतों पर ध्यान देने की जरूरत है. मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों को खाने से रोकना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें उचित आहार का चयन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. मैं सलाह देता हूं कि मरीज़ भोजन में, हरी सब्जियों, फलों और अनाज का ज्यादा इस्तेमाल करें. मांसाहार से दूर रहने की कोशिश करें. नमक, तेल, मक्खन का कम इस्तेमाल करें.
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Source: IOCL
























