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भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध: सामरिक-व्यापारिक संबंधों में प्रगाढ़ता के साथ दोनों देशों के लिए ये है बड़ी चुनौती

ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण भागीदार हैं. दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध हैं. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस अभी अपने भारत यात्रा पर हैं.

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस पहली बार भारत यात्रा पर आए हुए हैं. गुरुवार को वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहमदाबाद में क्रिकेट स्टेडियम पहुंचे थे जहां भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट मैच खेला जा रहा था. प्रधानमंत्री ने इसे लेकर एक ट्वीट भी किया जिसमें उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इस प्रतिस्पर्धा के केंद्र में वास्तविक सम्मान है, जो हमारे लोगों के बीच स्नेह और दोस्ती को दर्शाता है... मैदान पर, ऑस्ट्रेलिया और भारत दुनिया में सर्वश्रेष्ठ टीम बनने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. अब्लनीस दूसरे ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री हैं जो चार दिवसीय भारत यात्रा पर आये थे. इनसे पहले ऑस्ट्रेलिया के पूर्व मैल्कम टर्नबुल भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने के लिए भारत यात्रा पर आए थे. वे भारत का दौरा करने वाले अपने देश के पहले नेता थे. अहमदाबाद से प्रधानमंत्री अल्बनीस ने भी अपने ट्वीट में लिखा कि खेल मैदान से बाहर, हम एक बेहतर दुनिया बनाने के लिए सहयोग कर रहे हैं. आज यानी शुक्रवार को पहला व्यक्तिगत भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन शुक्रवार किया गया.

दोनों देशों के बीच है बहुआयामी संबंध

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध में बहुलतावाद, वेस्टमिंस्टर-शैली के लोकतंत्रों, राष्ट्रमंडल परंपराओं, आर्थिक जुड़ाव का विस्तार, और उच्च-स्तरीय बातचीत में वृद्धि के साझा मूल्यों पर जोर दिया गया है. दोनों के बीच सामान्य रूप से कई विशेषताएं हैं जिसमें एक मजबूत, जीवंत, धर्मनिरपेक्ष और बहुसांस्कृतिक लोकतंत्र, स्वतंत्र प्रेस, स्वतंत्र न्यायिक प्रणाली और अंग्रेजी भाषा का प्रयोग जो दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग और बहुआयामी संबंधों की नींव रखता है. शीत युद्ध के खत्म हो जाने के बाद सन् 1991 में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को लिबरलाइज किया. इसके लिए उसने कई आर्थिक सुधार किए जिससे दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों को स्थापित करने में मदद मिली. इसके अलावा उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती गई. दोनों के बीच पर्यटन और क्रिकेट ने द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

जैसे-जैसे समय बीतते गए दोनों देशों ने एक दूसरे के साथ आर्थिक जुड़ाव को तो मजबूत किया ही साथ ही साथ अपने रणनीतिक संबंध को नई दिशा दी. हाल के वर्षों में दोनों देशों ने विकास के लिए एक ट्रांस्फोर्मेशनल ट्राजेक्टोरी ग्रोथ कि दिशा में कदम बढ़ाया है. अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर दोनों एक जैसे रूख को अपनाते हैं.
इसके साथ ही दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित एक साझा प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहे हैं. दोनों ही देश अपने आपसी सहयोग को बहुपक्षीय स्वरूप में अपनाया है. इसके अलावा दोनों ही देश क्वाड समूह के हिस्सा हैं जिसमें अमेरिका और जापान भी शामिल हैं.

सितंबर 2014 में, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने भारत का दौरा किया था. उसी वर्ष नवंबर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पहली बार ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की थी. पीएम मोदी से पहले वर्ष 1986 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक यात्रा की थी. वह ऑस्ट्रेलियाई संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी बने. फिर जून 2020 में दोनों देशों के नेताओं ने वर्चुअल शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय संबंधों को 2009 में हुए रणनीतिक साझेदारी से आगे बढ़ाते हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) कि दिशा में ले गए.

प्रधानमंत्री मोदी और मॉरिसन ने 2021 में तीन मौकों पर फोन पर बातचीत की. इसके साथ ही वाशिंगटन डीसी में और ग्लासगो में COP26 जलवायु शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं ने व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात की. मार्च 2022 में दूसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वर्चुअल शिखर सम्मेलन में कई प्रमुख घोषणाएं की गईं. जिनमें दोनों देशों के बीच कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए लोगों की आवाजाही, दोनों देशों के नागरिकों की शैक्षिक योग्यता मान्यता के लिए लेटर ऑफ एग्रीमेंट हुआ ताकि छात्रों और पेशेवर आसानी से दोनों देशों में आ जा सके. प्रधानमंत्री मोदी और अल्बनीस ने पिछले साल तीन बार मुलाकात की. 2022 और 2023 में दोनों देशों के बीच मंत्रिस्तरीय यात्राएं हुई हैं. भारतीय विदेश मंत्री ने इसी साल 18 फरवरी को ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की. उनकी यात्रा के बाद ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग ने 28 फरवरी से 3 मार्च तक भारत के दौरे पर आए. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने भी भारत का दौरा किया.

चीन से दोनों देशों के बिगड़े हैं संबंध

2018 में कैनबरा ने चीनी टेलीकॉम फर्म हुआवेई को 5G नेटवर्क से प्रतिबंधित कर दिया. जिसके बाद से ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए. बाद में ऑस्ट्रेलिया ने चीन द्वारा कोविड-19 के प्रसार को लेकर जांच की मांग की. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने चीन द्वारा झिंजियांग और हांगकांग प्रांत में किए जा रहे अत्याचार को को लेकर मानवाधिकारों की आलोचना की. इसके बाद चीन ने ऑस्ट्रेलियाई निर्यात पर प्रतिबंधों को लागू किया और मंत्रिस्तरीय बातचीत को बंद कर दिया. वर्तमान में भारत एलएसी पर चीन की विस्तारवादी नीतियों का सामना कर रहा है.

नई दिल्ली और कैनबरा 2013 से ही चीनी चुनौतियों का आकलन कर रहे हैं. पिछले साल सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में एक भाषण में, पूर्व ऑस्ट्रेलियाई दूत पीटर वर्गीस ने कहा था कि चीन की लुका-छिपी का खेल, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख शक्ति बनने की उसकी महत्वाकांक्षा, आर्थिक धमकी और उसकी मिडिल किंगडम को फिर से बनाने की इच्छा अन्य देशों को चीन के साथ संबंधों को संतुलित रखने के लिए विवश कर रहा है और भारत को इन रणनीतियों में एक महत्वपूर्ण तत्व के रूप में देखा जाता है. उन्होंने आगे कहा था कि ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही रूल बेस्ड अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करते रहे हैं. दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय संस्थानों को बनाने की मांग में भागीदार हैं. जो एक समावेशी और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देते हैं और तनाव को प्रबंधित करने में मदद कर सकते हैं. क्वाड समूह उनकी साझा चिंताओं के आधार पर उनके हितों की रक्षा करने के लिए एक अच्छा उदाहरण है.

दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में बढ़ रहा है द्विपक्षीय संबंध

1. आर्थिक सहयोग : भारत ने पिछले एक दशक में पहली बार किसी विकसित देश के साथ आर्थिक सहयोग व्यापार समझौता (ECTA) पर हस्ताक्षर किया. इससे दोनों देशों के बीच पहला मुक्त व्यापार समझौता-दिसंबर 2022 में लागू हुआ. इसके परिणाम यह हुआ कि टैरिफ शुल्क में तत्काल प्रभाव ले 96 प्रतिशत तक की कमी आ गई. ऑस्ट्रेलिया को भारतीय निर्यात का मूल्य जोकि टैरिफ शुल्क का 98% है और भारत को ऑस्ट्रेलियाई निर्यात के 85% था जो कि बिल्कुल शून्य हो गया. 2021 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की रही है और ईसीटीए के लागू हो जाने से आगामी पांच सालों में इसके तकरीबन 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना है.

2. लोगों के बीच संबंध : भारत ऑस्ट्रेलिया में कुशल कामगारों को देने वाला शीर्ष देशों में शामिल है. 2021 की जनगणना के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में लगभग 9.76 लाख लोगों ने अपने पूर्वजों को भारतीय मूल के रूप में बताया है जिससे ऑस्ट्रेलिया विदेशों में जन्मे भारतीयों का दूसरा सबसे बड़ा समूह बन गया है. भारत के आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर जश्न मनाने के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने देश भर में 40 से अधिक इमारतों को रोशन किया और प्रधानमंत्री अल्बनीस ने अपना एक व्यक्तिगत वीडियो संदेश भी जारी किया.

3. शिक्षा : दोनों देशों के बीच इस साल 2 मार्च को शैक्षिक योग्यता की पारस्परिक मान्यता (MREQ) के लिए हस्ताक्षर किए गए. इससे भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच छात्रों की आवाजाही सुगम होगी. ऑस्ट्रेलिया के डीकिन और वोलोंगोंग विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस खोलने की योजना पर काम कर रहे हैं. अभी तकरीबन एक लाख से अधिक भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रहे हैं और यह ऑस्ट्रेलिया में विदेशी छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा समूह है.

4. दोनों देशों के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग : दोनों देशों के बीच टू-प्लस-टू मंत्रिस्तरीय बातचीत सितंबर 2021 में हुआ था. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने जून 2022 में दौरा किया. इससे पहले जून 2020 में दोनों देशों के बीच हुए वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट (MLSA) हुआ था. इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं ने 2022 में कई संयुक्त अभ्यास किए. ऑस्ट्रेलिया में इस साल अगस्त के महीने में पर्थ तट पर मालाबार सैन्य अभ्यास होगा. जिसमें भारत, जापान और अमेरिका के साथ ऑस्ट्रेलिया इसकी मेजबानी करेगा. इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया तालीसमैन सेबर अभ्यास में शामिल होने के लिए भारत को आमंत्रित करेगा. प्रधानमंत्री अल्बनीस ने गुरुवार को आईएनएस विक्रांत का भी दौरा किया और कहा कि दोनों देशों के इतिहास में कभी भी ऐसा समय नहीं आया जब हमारे बीच इतना मजबूत रणनीतिक जुड़ाव रहा हो.

5. स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सस्ती प्रौद्योगिकियों के लिए हस्ताक्षर : देशों देशों ने पिछले साल फरवरी में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए पर एक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए. जिससे की अक्षय ऊर्जा के लिए प्रयोग की जानी वाली प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से अल्ट्रा लो-कॉस्ट सौर और क्लीन हाइड्रोजन के निर्माण में उपयोगी प्रौद्योगिकियों की लागत को कम किया जा सकेगा. मार्च 2022 में वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के तहत प्रशांत द्वीप देशों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर रेजिलिएंट आइलैंड स्टेट्स ( IRIS) के तहत एयूडी 10 मिलियन फंड की घोषणा की. 

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