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Budget 2025: बजट में केवल घोषणाओं ही नहीं उनके परिणाम पर भी रखें ध्यान, बेरोजगारी और जीडीपी बड़ी चुनौती

पिछले बजट में एक बहुत बड़ी घोषणा हुई थी,'इंटर्नशिप प्रोग्राम' लॉन्च किया गया था. कहा गया कि इसमें 1 करोड़ युवाओं को 5 साल में 500 टॉप कंपनियां इंटर्नशिप देगी. अभी तक इसका कोई परिणाम नहीं बताया है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना 8वां बजट 1 फरवरी शनिवार को पेश करेंगी. वित्त मंत्री ने पिछले 6 पूर्ण और दो अंतरिम बजट संसद में पेश किए है. देश में इस वक्त GDP (सकल घरेलू उत्पाद) की धीमी रफ्तार चल रही है. BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) ने बजट पर एक नोटिफिकेशन जारी किया है और बजट के दिन BSE भी खुला रहेगा इसको 'स्पेशल ट्रेडिंग डे' के रूप में मनाया जा रहा है. मार्केट को भी इंतजार है कि बजट कैसा रहेगा? अब निर्मला सीतारमणो और सरकार को ये तय करना है कि बजट में उनकी प्राथमिकता क्या है? प्राथमिकताओं का ध्यान रखना भी जरूरी है. पिछली बार बजट इलेक्शन के बाद 23 जुलाई 2024 को आया था. उसके इक्वेशन पार्टनर को खुश करने के लिए थे. प्रायोरिटी में इस वक्त GDP की इतनी धीमी रफ्तार है. यह पिछली बार के बजट में भी फ़ोकस एरिया था.  एम्प्लॉयमेंट, MSME जैसे क्षेत्रों के लिए खास ध्यान दिया गया था.    

असंगठित क्षेत्र को समझें

भारत में 94 प्रतिशत की आबादी असंगठित क्षेत्र की तरफ है. पिछली बार के बजट में एक बहुत बड़ी घोषणा हुई थी,'इंटर्नशिप प्रोग्राम' लॉन्च किया गया था. कहा गया कि इसमें 1 करोड़ युवाओं को 5 साल में 500 टॉप कंपनियां इंटर्नशिप देगी.  इसके पंजीकरण हुए, लेकिन उसका हमें अभी तक कोई परिणाम नहीं बताया है कि क्या परिणाम हुआ है. ये सोचने की बात है कि आपकी दिशा कैसे तय होगी? जब आप अपनी प्राथमिकता को तय करेंगे...सबसे बड़ा मुद्दा है एम्प्लॉयमेंट यानी रोजगार. 

रोजगार सृजन आप कैसे करेंगे? स्किलिंग या कौशल-निर्माण आप कैसे करेंगे? असंगठित क्षेत्र को संगठित क्षेत्र के अंदर आप कैसे लेकर आएंगे? GDP का जो मसला है, तो हमने तो देखा है कि काम हुआ है हमने देखा कि सरकार तो खर्च कर रही है, बजट का आकार बढ़ रहा है. पिछली बार के बजट में 11.11 लाख करोड़ कैपिटल निर्गत किया गया था, लेकिन ये सारा कैपिटल जो है संगठित क्षेत्र की तरफ था. असंगठित क्षेत्र की कोई बात ही नहीं करता है. ये सारा कैपिटल IT, पावर, रेलवे इस तरफ किया हुआ था. इस वक्त GDP गिर रही है और हम कहते हैं कि हम पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं, हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं. असंगठित क्षेत्र की तरफ ध्यान देना बहुत जरूरी है. रोजगार की तरफ ध्यान देना बहुत जरूरी है. महिला श्रम भागीदारी की बात है, उसकी तरफ ध्यान देना बहुत जरूरी है.

जीडीपी पर देना होगा ध्यान

देखिये,  इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती GDP गिरने की है, विकास है, पर रोजगार नहीं है. यह जॉबलेस ग्रोथ आपकी लॉन्ग रन तक नहीं चल सकती है. नौकरियां (रोजगार) सृजन करना चाहेंगे. इधर से महंगाई बहुत ज्यादा है. महंगाई को कैसे नियंत्रित किया जाए? चुनौतियां केवल घरेलू नहीं है इसमें बहरी कारक भी शामिल होते है. अमेरिका में ट्रम्प का राष्ट्रपति बनना, इससे पहले ही उन्होंने कहा था कि वह टैरिफ लगाएंगे. उस टैरिफ से कैसे हमारी मैक्रो इकोनॉमिकल का जो कंपोनेंट है नेट एक्सपोर्ट उससे क्या असर पड़ेगा? यह बहुत बड़ी चुनौती है.

हमारी पहल रहेगी विश्व बाजार के अंदर और जिस तरह से यूक्रेन युद्ध की अनिश्चितता है. यह सब चुनौतियां बजट में रहेंगी निर्मला सीतारमण के लिए. पिछली बार की तरह वह सिर्फ बजट में ऐलान ना करें. आखिर जो उन्होंने पिछली बार योजनाओं की घोषणा की थी, उसका क्या परिणाम आता है, किसी को कोई जानकारी नहीं है. अर्थशास्त्र की छात्रा के रूप में मैं जानना चाहूंगी कि क्या परिणाम आए हैं? चुनौतियों की बात भी करनी होगी. यह चुनौतियां हैं बेरोजगारी और महंगाई की, खपत नहीं है, मांग नहीं है उसकी वजह से आपकी क्षमता का उपयोग नहीं हो रहा है पूरी तरह से तो ये सब चुनौतियां निर्मला सीतारमण के सामने है.

कृषि पर लौटें

बजट में देखिए कृषि क्षेत्र बहुत ज्यादा जरूरी है. हमारी 47% आबादी कृषि क्षेत्र में काम करती है कृषि में हमारा किसान सड़क पर है. पिछली बार भी उनके लिए 1.52 लाख करोड़ की राशि रखी गई थी. कृषि बहुत जरूरी है, वरना आप रोजगार कहां देंगे, विनिर्माण में आप रोजगार कैसे उत्पन्न करेंगे? बहुत महत्वपूर्ण है. कौशल कैसे करेंगे? हम बात करें नौकरी की गुणवत्ता की, कौशल सृजन कैसे करेंगे, इन सब पर विचार बहुत जरूरी है. MSME के लिए भी पिछली बार बहुत ज्यादा घोषणा की थी. क्रेडिट गारंटी योजना, ... क्रेडिट किया था, ई -कॉमर्स किया था. MSME से बहुत ज्यादा रोजगार सृजन होते है यह बहुत ज्यादा जरूरी है. एक जरूरी चीज जो है कि  मध्यम वर्ग आयकर देता है. हालांकि आयकर देश में 3% से कम लोग देते हैं. कॉर्पोरेट टैक्स जो है 30% से 22% किया था, तो वो भी बैठे हुए हैं कि जो टैक्स की स्लैब हैं वो रिवाइज होंगी क्योंकि खपत बहुत ज्यादा प्रभावित हुई है.

उपभोग के प्रभावित होने से मांग नहीं है, इसलिए जो मांग है, उतना निवेश नहीं हो रहा है. हरेक सेक्टर्स में इस तरह की कई चुनौतियाँ हैं और फोकस इन पर ही रखना होगा. 

डॉ आस्था आहूजा दिल्ली के आर्यभट्ट कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर काम कर रही हैं. उन्होंने दिल्ली के जेएनयू से अपनी पीएचडी पूरी की. डॉ आहूजा अर्थव्यवस्था की गहरी समझ रखती हैं और उन्होंने चार किताबें भी लिखी हैं. 
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