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बच्चों को बनाना है होशियार तो दें ये फूड!

नईदिल्लीः फिनलैंड में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि बच्चों के स्कूल जाने के शुरुआती तीन सालों में स्वस्थ आहार देने से उनमें पढ़ने का बेहतरीन कौशल विकसित होता है. इस अध्ययन में छह से आठ साल तक के 161 बच्चों को शामिल किया गया और उनके आहार की गुणवत्ता का विश्लेषण फूड डायरी एवं उनके शैक्षिक कौशल का विश्लेषण मानकीकृत परीक्षणों की मदद से किया गया. 'यूरोपीय जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन' में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, जिन बच्चों ने अपने आहार में खूब सब्जियों, फलों, जामुन, साबूत अनाज, मछली, असंतृप्त वसा और कम मीठे उत्पादों को शामिल किया, उन्होंने पढ़ने का कौशल मापने वाले परीक्षण में कम गुणवत्ता वाले आहार लेने वाले अपने साथियों की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन किया. इस अध्ययन में यह भी पता चला कि कक्षा दो व कक्षा तीन में पढ़ने वाले बच्चों के पढ़ने के कौशल और कक्षा एक में पढ़ने वाले बच्चों के पढ़ने के कौशल से आहार गुणवत्ता का सकारात्मक संबंध आपस में नहीं था. इन परिणामों से यह संकेत मिलता है कि अच्छा आहार लेने वाले बच्चों ने पहली कक्षा से लेकर दूसरी और तीसरी कक्षा में पहुंचकर पढ़ने के अपने कौशल का अधिक विकास किया. यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्टर्न फिनलैंड की शोधकर्ता ईरो हापला ने कहा, "एक और महत्वपूर्ण अवलोकन में पाया गया कि पढ़ाई कौशल के साथ जुड़े आहार गुणवत्ता का संबंध दूसरे कई कारकों पर भी निर्भर है, जिसमें सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शारीरिक गतिविधि, शरीर में वसा की मात्रा और शारीरिक रूप से दुरुस्त होना आदि शामिल है." नेशनल न्यूट्रिशन काउंसिल की तरफ से पेश बाल्टिक सी और फिनिश न्यूट्रिशन आहार के बारे में सुझाव दिया गया कि सब्जियां, फल, जामुन, मछली, साबुत अनाज, असंतृप्त वसा, और कम मात्रा में रेड मीट, मीठा व संतृप्त वसा का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है. स्वस्थ आहार बच्चों के सीखने व शैक्षिक प्रदर्शन के लिए काफी महत्वपूर्ण कारक है. हापला के अनुसार, बच्चों को स्वस्थ आहार उपलब्ध कराने में अभिभावकों और विद्यालयों के साथ-साथ सरकार और कंपनियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.
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