Gen Z, मिलेनियल्स या अल्फा... कौन सी जनरेशन बचाती है ज्यादा पैसा?
देश में इन दिनों जेन-जी की चर्चा जोरों पर है. जेन जी को लोग भले ही कुछ भी कहें, लेकिन बचत के मामले में ये टॉप पर हैं. आइए जानें कि जेन-जी कितनी बचत कर लेते हैं.

- कपड़े, किराना लोग ऑफलाइन खरीदते; यात्रा मनोरंजन में प्रमुख खर्च है।
श्रीलंका से शुरू हुई युवा क्रांति और जेन जी का बोलबाला अब नेपाल व बांग्लादेश से होता हुआ भारत तक भी पहुंच चुका है. कॉकरोच जनता पार्टी के गठन और दिल्ली के जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शनों के बाद आम जनता ने इस जेनरेशन की हिम्मत, समझ और ताकत को नए सिरे से आंकना शुरू कर दिया है. आज सवाल यह युवा पीढ़ी अपना पैसा कहां और कैसे खर्च करती है, और वे अपनी मासिक आय में से कितना बचा पाते हैं. रिपोर्ट बताती हैं कि जेन-जी पैसे बचाने में सबसे आगे हैं, भले ही उनकी कमाई कम हो.
क्या कहती है द ग्रेट इंडियन वॉलेट की रिपोर्ट?
होम क्रेडिट इंडिया की हालिया जारी रिपोर्ट द ग्रेट इंडियन वॉलेट 4.0 में भारत की तीन अलग-अलग पीढ़ियों की कमाई और उनके खर्च करने के ढर्रे के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है. डेटा के मुताबिक, पिछली पीढ़ी यानी जेन-एक्स की औसत मासिक आय देश में सबसे ज्यादा 39,000 रुपये है, जिसमें से वे अपनी आय का 59 प्रतिशत हिस्सा खर्च कर देते हैं. इसके विपरीत, नई पीढ़ी जेन-जी के युवा औसतन 32,000 रुपये प्रति माह कमाते हैं और अपनी कमाई का 56 प्रतिशत हिस्सा खर्च करते हैं.
सर्वे में देश के 17 प्रमुख शहरों में रहने वाले 18 से 55 साल के कामकाजी लोगों को शामिल किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एक औसतन कामकाजी व्यक्ति की मासिक आय उसके औसत खर्च से लगभग 14,000 रुपये अधिक है. हालांकि, एक चौंकाने वाला सच यह भी सामने आया है कि 47 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो इतनी बचत क्षमता के बावजूद महीने का अंत आते-आते एक भी रुपया नहीं बचा पाते हैं.
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कमाई और बचत में कौन सी पीढ़ी आगे?
जेन-जी- इनकी औसत मासिक आय 32 हजार रुपये है. यह वर्ग 18 हजार रुपये (आय का 56%) खर्च करता है और 14 हजार रुपये (आय का 44%) बचा लेता है.
मिलेनियल्स- इनकी औसत मासिक आय 36 हजार रुपये है. यह वर्ग 21 हजार रुपये (आय का 58%) खर्च करता है और 15 हजार रुपये (आय का 42%) बचाता है.
जेन-एक्स- इनकी औसत मासिक आय 39 हजार रुपये है. यह वर्ग 23 हजार रुपये (आय का 59%) खर्च करता है और 16 हजार रुपये (आय का 41%) की बचत करता है.
भारतीय परिवारों का खर्चा कहां है ज्यादा?
भारतीय परिवारों के कुल मासिक बजट का बड़ा हिस्सा बुनियादी जरूरतों और घरेलू आवश्यकताओं पर ही चला जाता है. आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कुल घरेलू खर्च का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा केवल तीन चीजों- किराना, घर के किराए और बच्चों की शिक्षा पर खर्च होता है-
किराना- औसत खर्च 8,505 रुपये है, जो कुल बजट का 25% हिस्सा है
किराया- औसत खर्च 6,968 रुपये है, जो कुल बजट का 27% हिस्सा है
बच्चों की पढ़ाई- औसत खर्च 6,604 रुपये है, जो बजट का 20% है
आवागमन- इस पर औसतन 5,094 रुपये यानी बजट का 15% खर्च होता है
इलाज व स्वास्थ्य- औसत खर्च 2,802 रुपये प्रति माह बैठता है
यूटिलिटी बिल- बिजली-पानी जैसी सुविधाओं पर 1,928 रुपये खर्च होते हैं
रसोई गैस- इस पर औसतन 1,154 रुपये जाते हैं
मोबाइल बिल- इस मद में औसतन 771 रुपये प्रति माह का खर्च आता है
ऑफलाइन खरीदारी का दबदबा
आज के दौर में भले ही ई-कॉमर्स का चलन तेजी से बढ़ा हो, लेकिन आंकड़ों के अनुसार कपड़े और मोबाइल जैसी व्यक्तिगत चीजों की 80% खरीदारी अब भी लोग दुकानों पर जाकर यानी ऑफलाइन मोड में ही करते हैं.
कपड़े और फैशन- 31% लोग केवल ऑफलाइन खरीदते हैं, 17% पूरी तरह ऑनलाइन खरीदते हैं, जबकि 2% लोग तय नहीं कर पाते
घरेलू उपकरण- 30% लोग दुकानों से खरीदते हैं, जबकि 47% लोग ऑनलाइन प्लेटफार्म्स का रुख करते हैं
किराना का सामान- 82% लोग ऑफलाइन दुकानों से लेते हैं, 16% ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं और 2% दोनों माध्यम चुनते हैं
खाना और रेस्टोरेंट- 82% लोग सीधे जाकर खाते हैं, 15% ऑनलाइन डिलीवरी मंगवाते हैं और 3% दोनों तरीके अपनाते हैं
बस और ट्रेन टिकट- 72% लोग ऑनलाइन बुकिंग कराते हैं, 17% विंडो काउंटर से लेते हैं और 10% मिश्रित तरीका चुनते हैं
घूमने-फिरने और ओटीटी पर खर्चा
लोगों के व्यक्तिगत शौक और मनोरंजन पर खर्च का पैटर्न भी दिलचस्प है. सर्वे के अनुसार 28% लोग अपनी एक्स्ट्रा बचत या बजट का हिस्सा घूमने-फिरने और ट्रैवल पर खर्च करना पसंद करते हैं. इसके ठीक विपरीत, महज 4% लोग ही ओटीटी सब्सक्रिप्शन पर पैसा खर्च करते हैं. यानी यात्रा पर खर्च करने वालों का अनुपात ओटीटी पर खर्च करने वालों से 7 गुना अधिक है. इसके अलावा, 15% लोग ऐसे हैं जो हर महीने कम से कम एक बार सिनेमाघर जाकर फिल्म जरूर देखते हैं.

बचत में कौन सा शहर नंबर वन?
खर्चों के बाद अपने हाथ में पैसा बचाने के मामले में भारत के अलग-अलग शहरों में बड़ा फर्क देखा गया है-
जयपुर- 69% नागरिक अपनी मासिक आय में से बचत करने में सफल रहते हैं
अहमदाबाद- 68% लोग महीने के अंत में पैसा बचा पाते हैं
भोपाल- 67% लोग नियमित रूप से बचत करते हैं
बचत में सबसे पिछड़े शहर कौन से?
चेन्नई- यहां महज 17% लोग ही महीने के अंत में बचत कर पाते हैं
कोच्चि- इस शहर में सिर्फ 16% लोग ही अपनी मासिक आय से बचत निकाल पाते है.
कितने जेन-जी कामकाजी?
आंकड़ों के मुताबिक, भारत की कुल जेन-जी आबादी में से कमाने वालों का एक बड़ा वर्ग तैयार हो चुका है. पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2023-24 के अनुसार, देश में काम करने की उम्र (15 से 26 वर्ष) वाले जेन-जी युवाओं की अनुमानित संख्या 29.94 करोड़ तक पहुंच चुकी है.
ताजा रोजगार रिपोर्ट के अनुसार, यह युवा कार्यबल देश की फॉर्मल इकोनॉमी की सबसे बड़ी रीढ़ बन रहा है. वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत जुड़े सभी नए सब्सक्राइबर्स में 18 से 25 वर्ष के युवाओं की हिस्सेदारी करीब 59 प्रतिशत दर्ज की गई है.
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