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फ्रांस में आतंकी हमले के पीड़ितों का पुराना वीडियो ग़लत सांप्रदायिक एंगल से शेयर किया गया

जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि वायरल वीडियो फ्रांस के नीस में 2016 में हुए आतंकी हमले के बाद का है, और सोशल मीडिया यूज़र्स द्वारा किया जा रहा वो ग़लत है.

फैक्ट चैक

निर्णय [असत्य]

यह 2016 का वीडियो है जिसमें बैस्टिल दिवस समारोह के दौरान फ्रांस के नीस में हुए आतंकी हमले के पीड़ितों को दिखाया गया है.

दावा क्या है? 

सोशल मीडिया पर एक विचलित करने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें सड़क पर खून से लथपथ शव पड़े हुए हैं. इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि फ्रांस में हाल ही में हुए चुनावों के बाद मुसलमान फ्रांसीसी नागरिकों की हत्या कर रहे हैं. वीडियो में एक व्यक्ति वॉयस-ओवर भी है जो दावा करता है कि "मुस्लिम शरणार्थियों" द्वारा किए गए हमले की ख़बर को रिपोर्ट नहीं किया जा रहा है. 

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मनोज श्रीवास्तव, जो अक्सर ग़लत सूचना फ़ैलाने के लिए जाना जाता है, ने वीडियो पोस्ट करते हुए कैप्शन दिया,"*फ्रांस में मुस्लिम पार्टी ने चुनाव जीता*अब देखिए कैसे मुसलमान अपने ही देश में फ्रांसीसी नागरिकों की हत्या कर रहे हैं *सोचिए अगर भारत में*मुस्लिम लीग की कांग्रेस पार्टी चुनाव जीत गई तो क्या होगा." इस पोस्ट को अब तक 27,000 से ज़्यादा बार देखा गया है. पोस्ट का आर्काइव वर्ज़न यहां देखें. ऐसे ही दावों वाले अन्य पोस्ट यहां, यहां और यहां देखें.

फ्रांस में आतंकी हमले के पीड़ितों का पुराना वीडियो ग़लत सांप्रदायिक एंगल से शेयर किया गया

वायरल पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट. (सोर्स: एक्स/स्क्रीनशॉट)

हालांकि, यह वीडियो फ्रांस में हुए किसी हालिया हमले का नहीं है, बल्कि जुलाई 2016 में फ्रांस के नीस में बैस्टिल दिवस समारोह के दौरान एक ट्रक द्वारा भीड़ को कुचलने के बाद का है.

हमने सच का पता कैसे लगाया?

जब हमने वीडियो पर रिवर्स इमेज सर्च किया, तो हमें जुलाई 2016 के एक्स-पोस्ट (आर्काइव यहां) मिले, जिसमें उसी वीडियो के स्क्रीनशॉट शेयर किए गए थे. इस पोस्ट के साथ जानकारी दी गई थी कि यह फ्रांस में हुए नीस आतंकी हमले का दृश्य है. इससे पता चलता है कि वीडियो हालिया नहीं है.

जुलाई 18, 2016 को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी इसी वीडियो का ज़िक्र किया गया था, बताया गया था कि फ्रांस के नीस में हमले के तुरंत बाद बनाए गए वीडियो में सड़क पर पीड़ितों के खून से लथपथ शव पड़े हुए दिखाए गए थे. हालांकि, अब इसे रिपोर्ट से हटा दिया गया है.

अमेरिकी सीबीएस न्यूज़ नेटवर्क का हिस्सा सीबीएस इवनिंग न्यूज़ (आर्काइव यहां) ने जुलाई  15, 2016 को एक वीडियो रिपोर्ट के हिस्से के रूप में यूट्यूब पर क्लिप शेयर की थी, जिसके दृश्य वायरल वीडियो से मेल खाते हैं. वीडियो रिपोर्ट के विवरण में लिखा था, "एक ट्रक ने गुरुवार रात बैस्टिल दिवस के जश्न के दौरान फ्रांस के नीस में भीड़ को कुचल दिया. स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि दर्जनों लोग मारे गए और घायल हुए हैं." 

स्पष्ट है कि वीडियो पुराना है और फ्रांस में हुए किसी हालिया हमले का नहीं है.

इसके अलावा, हाल ही में संपन्न फ्रांसीसी चुनावों के परिणामों के बाद मुस्लिम समुदाय द्वारा फ्रांसीसी नागरिकों की खुलेआम हत्या की कोई घटना सामने नहीं आई है.

हालांकि चुनाव के एग्जिट पोल में वामपंथी गठबंधन को बढ़त मिलने के बाद पेरिस समेत फ्रांस के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी तादाद में लोगों ने प्रदर्शन कर वामपंथी गठबंधन की जीत का जश्न मनाया था. इस बीच पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी हुईं. लेकिन, नागरिकों की हत्या जैसे घटनाएं सामने नहीं आईं. 

2016 नीस हमला

वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, जुलाई 14, 2016 को फ्रेंच रिवेरा शहर नीस में, बैस्टिल दिवस समारोह के लिए जमा भीड़ में एक विशाल ट्रक घुस गया, जिसमें कम से कम 84 लोग मारे गए और कम से कम 202 लोग घायल हो गए.  बाद में, ट्रक ड्राईवर की पहचान मोहम्मद लाहौएज-बौहलेल के रूप में हुई, जिसको पुलिस ने गोली मार दी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 वर्षीय बौहलेल ट्यूनीशिया में जन्मा नीस निवासी था.

बीबीसी की एक रिपोर्ट में बताया गया कि घातक हमले के लिए कुल आठ लोगों पर मुकदमा चलाया गया. दिसंबर 2022 में, तीन लोगों को मुख्य आरोपी बौहलेल के साथ संबंध रखने का दोषी ठहराया गया, जबकि पांच अन्य को हथियार आपूर्ति करने का दोषी पाया गया.

मोहम्मद लाहौएज-बौहलेल कौन था?

बीबीसी की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक़, लाहोएज-बौहलेल एक इंजीनियरिंग छात्र था, जिसका "हिंसा और मानसिक अस्थिरता का इतिहास" रहा है. फ्रांसीसी अभियोजक फ्रेंकोइस मोलिन्स ने बीबीसी को बताया कि लाहोएज-बौहलेल "धर्म से दूर" जीवन जी रहा था और हाल ही में कट्टरपंथी इस्लामवादी आंदोलनों में उसकी रुचि बढ़ी थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि जांचकर्ताओं ने उसके कंप्यूटर पर शवों की तस्वीरें और कट्टरपंथी इस्लामवाद से जुड़ी तस्वीरें पाई हैं, जिसमें तथाकथित इस्लामिक स्टेट ( ISIS) का झंडा भी शामिल है.

फ़्रांस 24 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, हमले के दो दिन बाद, तथाकथित इस्लामिक स्टेट ने दावा किया कि लाहोएज-बौहलेल उसके अनुयायियों में से एक था, फ्रांसीसी जांचकर्ताओं को उनके बीच कोई ठोस संबंध नहीं मिला. 

लॉजिकली फ़ैक्ट्स को ऐसी कोई न्यूज़ रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें बताया गया हो कि मोहम्मद लाहोएज-बौहलेल शरणार्थी था.

निर्णय 

हमारी अब तक की जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि वायरल वीडियो फ्रांस के नीस में 2016 में हुए आतंकी हमले के बाद का है, और सोशल मीडिया यूज़र्स द्वारा किया जा रहा यह दावा कि इसमें हालिया चुनावों के बाद मुसलमानों द्वारा फ्रांसीसी नागरिकों की हत्या दिखाई गई है, ग़लत है.

[डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट पहले logicallyfacts.com पर छपी थी. स्पेशल अरेंजमेंट के साथ इस स्टोरी को एबीपी लाइव हिंदी में रिपब्लिश किया गया है. एबीपी लाइव हिंदी ने हेडलाइन के अलावा रिपोर्ट में कोई बदलाव नहीं किया है.]

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