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UN Population Report: कोविड-19 के वर्षों के बाद घट गई है जिंदगी की उम्र, यूएन की जनसंख्या रिपोर्ट कहती है बहुत कुछ

UN Population Report: कोविड-19 के बाद के वर्षों ने इंसानी जिंदगी की उम्र घटा दी है. संयुक्त राष्ट्र (UN) जनसंख्या रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक जीवन प्रत्याशा यानी जीने के वर्षों में कमी आई है.

UN Population Report On Global Life Expectancy: कोविड-19 (Covid-19 ) महामारी ने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया है. आलम यह की इसके जाने के बाद भी इसके प्रभाव दिखाई दे रहे हैं. सोमवार 11 जुलाई की संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जनसंख्या (UN Population Report)  रिपोर्ट बताती है कि कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक जीवन प्रत्याशा (Global Life Eexpectancy ) में कमी आई है. कोविड के बाद के वर्षों में इंसानी जिंदगी की लंबी उम्र की उम्मीद को धुंधला कर दिया है. हाल ये है कि 29 साल की मेहनत पर कोविड ने पानी फेर डाला है. इन वर्षों में इंसानी जिंदगी जीने की उम्मीद यानि प्रत्याशा ( Eexpectancy) में नौ वर्षों का इजाफा दर्ज किया गया था.

यूएन की रिपोर्ट कहती है बहुत कुछ

संयुक्त राष्ट्र (UN) की नवीनतम जनसंख्या रिपोर्ट से पता चलता है कि कोविड के बाद के वर्षों के में इंसानी जीवन प्रत्याशा में कमी आई है. साल 1990 से लेकर 2019 के 29 साल के वक्त में जन्म लेने के वक्त से लेकर जीवन जीने के वर्षों में नौ साल का इजाफा दर्ज किया था. जो इंसान की जिंदगी के लिए एक अच्छा संकेत था, लेकिन कोविड के बाद इंसानी जिंदगी जीने के संभावित वर्षों में कमी दर्ज की गई है. 29 साल का ये फायदा कोविड ने एक झटके में ही मिटा डाला है. यूएन की जनसंख्या रिपोर्ट के मुताबिक कोविड के बाद वैश्विक जीवन प्रत्याशा गिरकर 71 साल हो गई, जबकि साल 2019 में यह 72.8 साल थी. कोविड -19 महामारी के प्रभाव के कारण एक सामान्य इंसान के इस दुनिया में रहने की उम्र धीमी हो गई. जीवन प्रत्याशा में 1.8 साल की ये कमी मानव जीवन के लिए अच्छा संकेत नहीं है. 

महिलाओं की जिंदगी की उम्र है पुरुषों से अधिक

वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2022  सारांश ऑफ रिजल्ट्स (World Population Prospects 2022: Summary of Results) की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि कोविड ने 1990 और 2019 के बीच हुए जन्म लेने वालों की जीवन प्रत्याशा को लेकर हासिल किए गए कुछ लाभों को भले ही खत्म कर दिया हो. इन लाभों में इस अवधि के बीच जीवन जीने के संभावित वर्षों में नौ साल की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. हालांकि एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में साल 2050 तक जीवन प्रत्याशा 77.2 साल तक पहुंचने का अनुमान है. कहने का मतलब है कि इंसान के दुनिया में रहने की औसतन उम्र 77.2 हो जाएगी.

साल 2021 रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं जीवन प्रत्याशा अधिक है. जहां पुरुषों के लिए ये 68.4 साल है, तो महिलाओं के लिए ये 73.8 साल है. मतलब महिलाएं 70 से भी अधिक साल जीने का माद्दा रखती है. महिला के जीवित रहने के इन फायदों को दुनिया के लगभग सभी क्षेत्रों और देशों में वर्चुअली तौर पर ध्यान से देखा गया है.इस रिपोर्ट के मुताबिक जन्म के समय जीवन प्रत्याशा में महिला आगे रही हैं. इसके तहत लैटिन अमेरिका (Latin America) और कैरिबियन (Caribbean) में महिलाओं के जीवन जीने की उम्र 7 साल तो ऑस्ट्रेलिया ( Australia) और न्यूजीलैंड (New Zealand) में 2.9 साल अधिक रही है. 

रिपोर्ट से ये भी पता चलता है कि पिछले तीन दशकों में पुरुषों और महिलाओं के बीच जन्म के वक्त वैश्विक जीवन प्रत्याशा के बीच का अंतर कुछ क्षेत्रों में कम हो गया था, लेकिन वह अंतर कोविड के बाद बढ़ गया है. महिलाओं और पुरुषों के बीच औसतन उम्र से अधिक जीने का ये अंतर साल 2019 के 5.2 साल से बढ़कर 2021 में 5.4 साल पहुंच गया है.

जीने में अव्वल है आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लोग

दुनिया के अलग-अलग देशों में जन्म लेने के समय के बाद से दुनिया में रहने यानि जीवन प्रत्याशा के मामले में ऑस्ट्रेलिया (Australia ) और न्यूजीलैंड (New Zealand ) के लोग अव्वल हैं. यहां के लोग औसतन 84.2 साल तक जीते हैं, जबकि उप-सहारा अफ्रीका ( Sub-Saharan Africa) में लोग सबसे कम जी पाते हैं. यहां के निवासी 59.7 साल में ही दुनिया को अलविदा कह डालते हैं. इसी तरह मध्य और दक्षिण एशिया (Central and South Asia) में 67.7 वर्ष, उत्तरी अफ्रीका (Northern Africa) और पश्चिमी एशिया (Western Asia) में 72.1, लैटिन अमेरिका व कैरिबियन में 72.2, यूरोप (Europe) और उत्तरी अमेरिका ( Northern America) में 77.2 साल तक लोग जी पाते हैं.

जीवित रहने की उम्र को लेकर दुनिया में है असमानता

यूएन की इस रिपोर्ट में जीवन जीने के संभावित वर्षों की उम्मीद को लेकर दुनिया की असमानताओं के बारे में भी बताया गया है. साल 2021 में जन्म के बाद दुनिया में रहने की उम्र में उच्चतम जीवन प्रत्याशा वाले देशों और निम्नतम जीवन प्रत्याशा वाले देशो के बीच उम्र में 33.4 वर्षों की असामनता दर्ज की गई. साल 2022 में कम से कम आधे मिलियन की आबादी वाले देशों में साल 2011 में जन्म के वक्त के बाद दुनिया में रहने की औसतन उम्र 85 साल और उससे अधिक तक बढ़ी हुई दर्ज की गई है.

इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान ( Japan), हांगकांग ( Hong Kong) और चीन (China) के मकाओ (Macao) वाले विशेष प्रशासनिक इलाके शामिल हैं. इसके विपरीत साल 2021 में मध्य अफ्रीकी गणराज्य (Central African Republic), चाड (Chad), लेसोथो (Lesotho) और नाइजीरिया (Nigeria ) में जन्म के बाद जीने की उम्र 54 साल ही रही है. रिपोर्ट का आशंका जताई है कि उच्चतम और निम्नतम जीवन प्रत्याशा वाले देशों के बीच यह अंतर और बढ़ने की उम्मीद है.

हालांकि आने वाले दशकों में जीवित रहने की उम्र में बढ़ोतरी होने की उम्मीद बेहद कम है यानि दुनिया में इंसान के रहने की संभावित उम्र में बढ़ोतरी होने की आस कम ही है. इसके साथ ही दुनिया के देशों और क्षेत्रों में जीवन प्रत्याशा के बीच जो असामनता है उसके अंतर के खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं है. साल  2050 तक दुनिया भर में जन्म के वक्त के बाद जीने की उम्र के 77.2 वर्ष तक पहुंचने का अनुमान है, हालांकि इसमें 31.8 वर्ष का अंतराल शेष है.

रिपोर्ट के मुताबिक जन्म के समय जीवन प्रत्याशा के निम्नतम और उच्चतम स्तर वाले देशों के बीच अंतर का एक बड़ा हिस्सा पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर में असमानताओं के कारण है, जो जन्म और 5 साल की उम्र के बीच मृत्यु की संभावना का प्रतिनिधित्व करता है. साल 2021 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में पैदा हुए बच्चे की तुलना में उप-सहारा अफ्रीका में पैदा हुए एक बच्चे की उसके पांचवे जन्मदिन से पहले मरने की संभावना 20 गुना है. 

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