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हाल की घटनाओं के बाद मेनिंगोकोकल बीमारी को लेकर चिंता बढ़ी, समय पर टीकाकरण की जरूरत पर जोर

शिलांग में मेनिंगोकोकल संक्रमण से हुई मौतों ने चिंता बढ़ाई है. यह एक जानलेवा बैक्टीरियल संक्रमण है जो दिमाग और रीढ़ की हड्डी पर हमला करता है. छोटे बच्चे सबसे अधिक असुरक्षित होते हैं.

नई दिल्ली, मार्च 23: शिलांग में हाल ही में हुई घटनाओं ने एक खतरनाक बीमारी मेनिंगोकोकल संक्रमण-को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

यह एक तेजी से फैलने वाला बैक्टीरियल संक्रमण है, जो अगर समय पर इलाज न मिले तो जानलेवा साबित हो सकता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो मरीजों में इस संक्रमण के लक्षण दिखाई दिए थे. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी. इसके बाद प्रशासन ने सावधानी के तौर पर उन लोगों की निगरानी शुरू कर दी है, जो इनके संपर्क में आए थे.

मेनिंगोकोकल संक्रमण अक्सर कम रिपोर्ट होता है, लेकिन यह बहुत तेजी से गंभीर हो सकता है. यह बीमारी Neisseria meningitidis नाम के बैक्टीरिया से होती है, जो दिमाग और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली परतों पर हमला करता है. कुछ मामलों में यह खून में भी फैल जाता है, जिससे स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है.

यह बीमारी खांसने, छींकने या नजदीकी संपर्क से फैलती है. इसलिए स्कूल, डे-केयर और हॉस्टल जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों में इसका खतरा ज्यादा होता है. इसके शुरुआती लक्षण-जैसे बुखार, सिरदर्द, उल्ट्री, गर्दन में जकड़न या रोशनी से परेशानी-आम बीमारी जैसे लग सकते हैं. लेकिन यह संक्रमण बहुत तेज़ी से बिगड़ सकता है और 24 घंटे के अंदर जान भी ले सकता है.

यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन छोटे बच्चे-खासकर शिशु और टॉडलर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनकी इम्यूनिटी अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती.

इसी वजह से स्वास्थ्य विशेषज्ञ, जैसे इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP), समय पर टीकाकरण की सलाह देते हैं. मेनिंगोकोकल वैक्सीन (MCV) इस बैक्टीरिया के कई प्रकारों से सुरक्षा देता है और इसे 9 महीने की उम्र से लगाया जा सकता है. यह बच्चों को उनके सबसे संवेदनशील समय में सुरक्षित रखने में मदद करता है.

टीकाकरण सिर्फ व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा में मदद करता है, क्योंकि इससे संक्रमण का फैलाव कम होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इसे रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका मानता है और "Defeating Meningitis by 2030" जैसे वैश्विक अभियान चला रहा है.

यह बीमारी कितनी गंभीर और तेज़ी से फैलने वाली हो सकती है. समय पर टीकाकरण, जागरूकता और सही समय पर इलाज-यही इस बीमारी से बचाव के सबसे मजबूत उपाय हैं.

माता-पिता और देखभाल करने वालों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों के डॉक्टर से इस बीमारी और इसके टीके के बारे में जरूर बात करें, खासकर 9 महीने या उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए.

डिस्क्लेमर : यह स्पॉन्सर्ड आर्टिकल है. एबीपी नेटवर्क प्रा. लि. और/या एबीपी लाइव इस लेख के कंटेंट या इसमें व्यक्त विचारों का किसी भी रूप में समर्थन या अनुमोदन नहीं करता है. पाठकों से अनुरोध है कि वे अपनी समझ से निर्णय लें.)

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