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25 वर्षों की जनसेवा: राष्ट्र निर्माण के संकल्प से विकसित भारत की यात्रा तक

भारत के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्षों तक लगातार शासन के प्रमुख के रूप में सेवा करना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है. यह केवल किसी व्यक्ति की राजनीतिक यात्रा की लंबाई नहीं, बल्कि उस विश्वास, परिश्रम, संकल्प और जनसेवा का प्रमाण है, जिसे देश की जनता ने लगातार मजबूत किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में शासन के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष इसी असाधारण यात्रा का प्रतीक हैं.

वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज प्रधानमंत्री के रूप में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के विराट संकल्प तक पहुंच चुकी है. इन 25 वर्षों में  नरेंद्र मोदी जी ने शासन को केवल प्रशासन चलाने का माध्यम नहीं माना, बल्कि इसे करोड़ों देशवासियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का साधन बनाया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनके लिए राजनीति का केंद्र सत्ता नहीं, बल्कि जनता और जनसेवा है. उनसे मिलने का अवसर जब भी मिलता है, उनके व्यक्तित्व की यह विशेषता और अधिक स्पष्ट होकर सामने आती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मेरी जब भी मुलाकात होती है, मैं उनके अनुभव और मार्गदर्शन से बहुत कुछ सीखने का प्रयास करता हूं. उनकी बातचीत में देश, राज्य, संगठन और सरकार से जुड़े विषयों के साथ सबसे अधिक चिंता आम जनता के जीवन को लेकर दिखाई देती है.

उनसे मुलाकात के दौरान एक बात हमेशा महसूस होती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता स्पष्ट है—जनता के लिए अधिक से अधिक काम करना और शासन के प्रत्येक निर्णय का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना.

वे हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच रहें, उनकी समस्याओं को सुनें और सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास करें. उनका यह आग्रह हम सभी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी योजना की सफलता केवल उसके निर्माण से नहीं, बल्कि उसके समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन से तय होती है. इसलिए हमारा प्रयास होना चाहिए कि पात्र व्यक्ति को उसका अधिकार समय सीमा के भीतर मिले और सरकारी व्यवस्था उसके लिए सहज, पारदर्शी और जवाबदेह बने.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व का सबसे प्रेरणादायी पक्ष यह है कि देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने के बावजूद उनकी कार्यशैली में सामान्य नागरिक के प्रति वही संवेदनशीलता दिखाई देती है. वे देश के गरीब, किसान, मजदूर, युवा, महिला, छोटे उद्यमी और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की चिंता को शासन की प्राथमिकता से जोड़ते हैं.

यही कारण है कि उनकी सरकार की अनेक योजनाओं का केंद्र समाज का वह वर्ग रहा है, जिसे लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर माना जाता था. गरीबों को आवास, शौचालय, बिजली, बैंकिंग सुविधा, स्वास्थ्य सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा से जोड़ने से लेकर महिलाओं के सशक्तिकरण और युवाओं के लिए अवसर पैदा करने तक, सरकार ने जनकल्याण को व्यापक स्वरूप दिया है. यह केवल योजनाओं की सूची नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन में आए परिवर्तन की कहानी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व केवल योजनाओं और प्रशासनिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है. उन्होंने देश के भीतर एक नया आत्मविश्वास पैदा किया है. आज भारत अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, आधारभूत संरचना, रक्षा, विनिर्माण और नवाचार जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है. दुनिया भारत को एक नई दृष्टि, नई क्षमता और बढ़ती हुई वैश्विक भूमिका के साथ देख रही है.

भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण BRICS के मंच पर भी दिखाई देता है. आज भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती से रखने वाले प्रमुख देशों में है. BRICS जैसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच पर भारत की सक्रिय और प्रभावी भूमिका यह दर्शाती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत केवल वैश्विक घटनाक्रम का दर्शक नहीं, बल्कि विश्व व्यवस्था को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण भागीदार बन रहा है.

BRICS की सफलता भारत के लिए केवल कूटनीतिक उपलब्धि नहीं है. यह भारत की आर्थिक क्षमता, तकनीकी सामर्थ्य, युवा शक्ति और वैश्विक विश्वसनीयता का भी प्रमाण है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है. आज दुनिया भारत की ओर केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि समाधान देने वाली शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देख रही है.

हाल के वर्षों में भारत की उपलब्धियों को देखकर बिहार के रूप में हमें भी नई संभावनाएं दिखाई देती हैं. जब भारत विश्व स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है, तब बिहार को भी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ना होगा. बिहार की युवा शक्ति, कृषि क्षमता, सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा और उद्यमशीलता को आधुनिक अवसरों से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है.

मुझे व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक और बात अत्यंत प्रभावित करती है—उनका निरंतर सीखने और काम करने का भाव. इतने लंबे सार्वजनिक जीवन के बावजूद उनमें काम के प्रति ऊर्जा और उत्साह आज भी उसी प्रकार दिखाई देता है. वे हर विषय को गहराई से समझने, उसके प्रभाव को जानने और परिणामों की समीक्षा करने में विश्वास रखते हैं.

जब भी उनसे मिलने का अवसर मिलता है, उनका मार्गदर्शन केवल राजनीतिक या प्रशासनिक विषयों तक सीमित नहीं रहता. वे इस बात पर बल देते हैं कि जनता के साथ निरंतर संवाद होना चाहिए. सरकार जो काम कर रही है, उसकी जानकारी जनता तक पहुंचे और जनता की जो अपेक्षाएं हैं, वे सरकार तक पहुंचें—लोकतंत्र की यही सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है.

बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन मेरे लिए विशेष महत्व रखता है. बिहार के विकास को लेकर हमारी सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा के दौरान भी उनका स्पष्ट संदेश रहता है कि बिहार के लोगों की आकांक्षाओं को केंद्र में रखकर तेजी से काम किया जाए. विकास का लाभ किसी एक वर्ग, क्षेत्र या शहर तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-गांव और समाज के हर वर्ग तक पहुंचे.

बिहार आज एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है. हमारी सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा हों, निवेश आए, उद्योग स्थापित हों, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं बेहतर हों तथा युवाओं को अपने राज्य में ही आगे बढ़ने के अवसर मिलें. प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत 2047 के विजन से प्रेरणा लेते हुए हमारा प्रयास है कि बिहार भी विकसित भारत की यात्रा का एक मजबूत इंजन बने.

बिहार की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा है. हमारे युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता और तकनीक के पर्याप्त अवसर मिलें. हमारी सरकार इसी दिशा में काम कर रही है. हमारा लक्ष्य ऐसा बिहार बनाना है जहां युवा रोजगार मांगने वाले ही नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले भी बनें.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मेरे संवाद का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका यह आग्रह है कि जनता की सेवा में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए. वे हमेशा जनप्रतिनिधियों को अधिक मेहनत करने, लोगों के बीच जाने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए प्रेरित करते हैं. यह संदेश मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है.

एक मुख्यमंत्री के रूप में मेरा प्रयास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस मार्गदर्शन को बिहार के शासन में अधिकतम रूप से लागू किया जाए. सरकार की योजनाएं केवल कागज पर न रहें, बल्कि उनका वास्तविक लाभ गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे—यही हमारी प्राथमिकता है. प्रशासन में जवाबदेही हो, योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन हो और जनता को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की यात्रा हमें यह भी सिखाती है कि बड़े परिवर्तन के लिए लंबे समय तक निरंतर परिश्रम और स्पष्ट लक्ष्य आवश्यक है. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने जिस विकास मॉडल पर काम किया, उसी अनुभव को उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप दिया. आज भारत की अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, डिजिटल व्यवस्था और वैश्विक भूमिका में आए परिवर्तन उसी दीर्घकालिक सोच का परिणाम हैं.

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष केवल उपलब्धियां नहीं हैं. यह यात्रा विश्वास की यात्रा है—जनता के विश्वास की, कार्यकर्ताओं के विश्वास की और एक ऐसे भारत के विश्वास की, जो अपनी क्षमता को पहचानकर विश्व में नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है.

उनके नेतृत्व में भारत ने यह आत्मविश्वास हासिल किया है कि हम अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकते हैं, अपनी तकनीक विकसित कर सकते हैं, अपने युवाओं को अवसर दे सकते हैं और दुनिया के सामने अपनी शर्तों पर आगे बढ़ सकते हैं.

आज भारत का आत्मविश्वास उसके युवाओं में दिखाई देता है, उसके स्टार्टअप में दिखाई देता है, उसके वैज्ञानिकों की उपलब्धियों में दिखाई देता है, उसके इंफ्रास्ट्रक्चर में दिखाई देता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी बढ़ती प्रतिष्ठा में दिखाई देता है. यह आत्मविश्वास ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी पूंजी है.

बिहार की जनता के लिए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व आशा और अवसर का प्रतीक है. बिहार की ऐतिहासिक क्षमता, प्रतिभाशाली युवा शक्ति और विशाल मानव संसाधन को विकास की नई दिशा देने के लिए केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है. हमारी डबल इंजन सरकार इसी उद्देश्य के साथ काम कर रही है.

हमारा प्रयास है कि बिहार की पुरानी चुनौतियों का समाधान आधुनिक सोच और नई तकनीक के माध्यम से किया जाए. सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ अब हमें उद्योग, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, पर्यटन, कृषि-प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और नई तकनीक आधारित क्षेत्रों में भी बिहार की क्षमता को विकसित करना है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस विकसित भारत का सपना देश के सामने रखा है, उसमें बिहार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. बिहार के बिना विकसित भारत की कल्पना पूर्ण नहीं हो सकती. इसलिए हमारा संकल्प केवल बिहार को आगे बढ़ाने का नहीं, बल्कि बिहार को विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भागीदार बनाने का है.

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर मैं बिहार की जनता की ओर से उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं. मैं उनके स्वस्थ, दीर्घायु और निरंतर सक्रिय जीवन की कामना करता हूं.

प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस को केवल उत्सव के रूप में मनाना पर्याप्त नहीं है. यह अवसर उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और मजबूत करने का अवसर है. उनके 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी सीख यही है कि राजनीति का वास्तविक अर्थ समाज और राष्ट्र की सेवा है.

मेरे लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल देश के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि ऐसे मार्गदर्शक हैं, जिनसे हर मुलाकात के बाद जनता के लिए और अधिक काम करने की प्रेरणा मिलती है. उनका जीवन हमें बताता है कि सार्वजनिक जीवन में पद महत्वपूर्ण नहीं होता, महत्वपूर्ण होता है—जनता के प्रति दायित्व, राष्ट्र के प्रति समर्पण और अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का संकल्प.

उनकी 25 वर्षों की यात्रा हमें यह विश्वास देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, नीयत साफ हो और निरंतर परिश्रम की भावना हो, तो असंभव दिखाई देने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं.

आइए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के शासन और जनसेवा के अनुभव से प्रेरणा लेते हुए हम बिहार को विकास, सुशासन और जनकल्याण के नए युग में आगे ले जाने का संकल्प लें.

विकसित भारत के संकल्प के साथ विकसित बिहार का निर्माण—यही हमारी प्रतिबद्धता है और यही प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के प्रति हमारी सच्ची शुभकामना भी है.

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ओपिनियन

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