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पाकिस्तान पर ईरान का हमला सुलगा न दे दुनिया में तीसरे मोर्चे का युद्ध, दो जंगों से झुलस रही दुनिया को है शांति की दरकार

पाकिस्तान पर ईरान ने ड्रोन से और मिसाइल से ताबड़तोड़ हमले किए हैं. ईरान ने यह भी कहा है कि जिस आतंकी समूह जैश-अल-अदल ने यह हमला किया है, अगर उसके निशान अब भी पाए गए तो और भी हमले किये जाएंगे. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर इससे ठीक पहले दो दिनों की ईरान यात्रा पर थे और कुछ कांस्पिरैसी थियरी वाले उस यात्रा को इस हमले से जोड़ रहे हैं, भले ही उसका कोई लेनदेन नहीं हो. ईरान ने पाकिस्तान को कई बार समझाया था कि अपनी सीमाओं का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों को पालने-पोसने के लिए न होने दे, लेकिन ये बात पाकिस्तान को समझ में नहीं आई और ईरान ने आतंकवादी संगठन जैश-अल-अदल को खत्म करने के लिए ड्रोम और मिसाइल के माध्यम से हमला किया, जिसमें पाकिस्तान स्थित उनका बहुत बड़ा हेडक्वार्टर खत्म हो गया. पाकिस्तान इस हमले से बौखलाया है और उसने तेहरान से अपने राजदूत को बुलाने के साथ ही ईरान के राजदूत को भी इस्लामाबाद से जाने को कह दिया है. 

पाकिस्तान है आतंकियों का सरपरस्त

हम सभी यह जानते हैं कि पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क है जो आतंकवादियों को पालता है. पाकिस्तान एक आतंकवादी मुल्क है. जिससे भारत ही नहीं ईरान भी परेशान है क्योंकि ईरान की सीमाएं भी पाकिस्तान से लगती है. आज के समय में तालिबान के कब्जे वाला अफगानिस्तान भी पाकिस्तान से परेशान है. आतंकवादी संगठन जैश-अल-अदल एक सुन्नी बहुल आतंकवादी संगठन हैं. ईरान ने 2012 से ही उसको एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है. पिछले कई सालों से ये संगठन ईरान को अस्थिर करने की कोशिश करता आया है.

दरअसल, ईरान के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान और बलूचिस्तान आदि पर आतंकी संगठन जैश अल अदल लगातार हमला करते रहता है. पिछले साल दिसंबर में भी जैश अल अदल ने एक हमला किया था जिसमें एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया गया था और उसमें 11 पुलिसकर्मी भी मारे गए थे. तब से ईरान भड़का हुआ था और कहा था कि जबतक जैश अल अदल का नेटवर्क खत्म नहीं हो जाता हम उसे छोड़ेंगे नहीं. ईरान ने पाकिस्तान पर कई बार प्रेशर बनाने की कोशिश की है और कई सालों से पाकिस्तान से ये अनुरोध करता आया है कि वह अपनी सीमाओं का इस्तेमाल इन आतंकवादी संगठनों को पालने - पोसने के लिए न होने दे.

पाकिस्तान ने ईरान की सारी बातें अनसुनी कर दी. ईरान ने मिसाइल और ड्रोन के माध्यम से पाकिस्तान स्थित जैश-अल-अदल का एक बहुत बड़ा हेडक्वार्टर खत्म किया है. कई लोग इस हमले को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के ईरान के दौरे को से भी जोड़ रहे हैं, लेकिन एस जयशंकर का ईरान का दौरा पहले से ही तय था. तो ईरान द्वारा पाकिस्तान पर किए गए हमले से इसका कोई लेना देना नहीं है. भारत हर अंतरराष्ट्रीय मंच, हर मुल्क के साथ आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने की और उनसे लड़ने की बात करता आया है. भारत भी पाकिस्तान से परेशान है. ये सिर्फ एक संयोग है कि विदेश मंत्री के ईरान के दो दिन के दौरे के बाद ये हमला हुआ. 

शिया-सुन्नी विवाद है जड़ में

फिलहाल ऐसा नजर आ रहा है कि इजराइल और हमास के बीच युद्ध शुरू हुआ है वो कहीं न कहीं राजनीतिक स्तर से इस्लामिक मुल्कों पर छाई हुई है. ईरान सीधे तौर पर हमास के साथ खड़ा होता हुआ नजर आया. उन्होंने लेबनान, सीरिया, ईराक या यमन में हमले भी किए, उन इलाकों पर जहां पर अमेरिकी या इजरायली फौजों का कब्जा था. कहीं न कहीं उन्होंने हिजबुल्लाह और हमास को समर्थन देने की कोशिश की. कुछ दिन पहले ईरान में एक बहुत बड़ा हमला हुआ था और ईरान खुद भी यह मान रहा था कि हमला इजराइल या अमेरिका द्वारा किया गया है, लेकिन बाद में आईएसआईएस ने उस हमले की जिम्मेदारी ली. ऐसा लग रहा है  कि शिया - सुन्नी विवाद अब  फिर से खड़ा हो चुका है. जैश-अल-अदल एक सुन्नी संगठन है, जो हमेशा ईरान के खिलाफ काम करता आया है. ईरान ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर जैश अल अदल के अड्डों पर हमला किया जिससे ईरान अपने राष्ट्रीय हित को साधते हुए नजर आ रहा है. 

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा 

हूती एक आतंकवादी संगठन है और उसके संगठन को ईरान द्वारा लीड किया जाता है. जबसे इजराइल - हमास का युद्ध शुरू हुआ है हूती विद्रोहियों द्वारा लगातार लाल सागर में इजराइल या अमेरिका आने - जाने वाले जहाजों पर हमला किए जा रहा है. जिससे लाल सागर के माध्यम से जो भी मदद इजराइल को मिल रही है, उसे परेशान किया जा सके. इन हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन मिला हुआ है. कुछ ही दिन पहले अमेरिका ने एक बहुत बड़ा हथियारों का जखीरा पकड़ा जो ईरान के माध्यम से हूतियों को भेजा रहा था. ये सारे हथियार अत्याधुनिक थे जो अमेरिका और इजराइल को परेशान करने के लिए भेजा जा रहा था. हूती यमन में बसे हुए हैं. लाल सागर एक ऐसा इलाका है जहां से समुद्री व्यापार किया जाता है.

हालांकि, जिस तरह से राजनीति फैली है काफी देशों ने अब लाल सागर का रास्ता छोड़ कर केप ऑफ गुड होप का रास्ता अपना लिया है, ताकि सामान शांति से उसकी जगह पर पहुंचाया जा सके. लाल सागर यूरोप तक पहुंचने के लिए एक छोटा मार्ग है. लेकिन अब लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है. आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ने वाला है. ईरान कई मोर्चो पर इजराइल, अमेरिका और ईरान को परेशान करने वाले आतंकवादी संगठनों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लड़ रहा है जिसमें हूती उनका अप्रत्यक्ष चेहरा है.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.]

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