आई ऐम ओके. ये आखिरी शब्द थे उस फौजी के जिसने साल 1971 में अपनी काबिलियत के दम पर पाकिस्तान जैसे देश के दो टुकड़े कर दिए थे. आज ही के दिन ठीक 13 साल पहले रात के 12 बजकर 30 मिनट पर तमिलनाडु के विलिंगटन मिलिट्री हॉस्पिटल में उस फौजी ने आखिरी सांस ली थी, जो भारत के पहले फिल्ड मॉर्शल थे और जिन्हें दुनिया सैम मॉनेकशॉ या सैम बहादुर के नाम से जानती है. 1971 वाली पाकिस्तान से हुई जंग में बारे में खुद मॉनेकशॉ कहते थे कि अप्रैल महीने में जब इंदिरा ने कहा था कि पाकिस्तान से जंग करो तो मॉनेकशॉ ने कहा था कि एक बात की गारंटी देता हूं कि भारत जंग हार जाएगा. क्या है सैम बहादुर की बहादुरी की कहानी, बता रहे हैं अविनाश राय.
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