डिलीवरी बॉय रोज कितना पेट्रोल फूंकते हैं? हिसाब चौंका देगा
ऑनलाइन खाना और सामान पहुंचाने वाले डिलीवरी बॉय रोज कितना पेट्रोल फूंकते हैं? जानिए उनकी कमाई और फ्यूल खर्च का पूरा हिसाब.

भारत में अब खाना हो या कोई जरूरत का सामान आप आसानी से अपने फोन से आर्डर कर सकते हैं और उसको कुछ ही समय में डिलीवरी बॉय आपके पास पहुंचा देते हैं. जिसके चलते अब मार्केट में जाना बड़े शहरों के लोगों ने बेहद कम कर दिया है.
क्योंकि उन्हें ऑनलाइन सर्विस ही सही लगती है. लेकिन घरों-घरों तक सामान पहुंचाने वाले डिलीवरी बॉय यह काम को करने में कितना पेट्रोल खर्च कर देते हैं. आज हम इसके बारें में ही बात करेंगे और जानेंगे कि एक डिलीवरी बॉय दिन भर में अपनी बाइक में कितने लीटर पेट्रोल खर्च कर देता है.
कितने किलोमीटर चलती है बाइक?
आप अगर किसी फूड डिलीवरी ऐप या क्विक कॉमर्स कंपनी के राइडर का काम देखेंगे इनका काफी अलग होता है. एक फुल-टाइम डिलीवरी पार्टनर शहर के अलग-अलग रेस्टोरेंट, डार्क स्टोर और ग्राहकों के घरों के चक्कर काटते हुए एक दिन में औसतन 100 से लेकर 130 किलोमीटर तक गाड़ी चला लेता है. अगर कोई राइडर केवल पार्ट-टाइम पीक आवर्स में ही काम करता है तब भी उसकी बाइक 40 से 60 किलोमीटर आसानी से चल जाती है.

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कितना होता है पेट्रोल खर्च?
अब अगर सीधे शब्दों में फ्यूल की खपत का हिसाब लगायें तो शहर के ट्रैफिक में चलने वाली डिलीवरी बाइकों की औसत माइलेज लगभग 35 से 40 किलोमीटर प्रति लीटर के आसपास मिलती है. यदि कोई डिलीवरी बॉय दिनभर में 120 किलोमीटर का सफर तय करता है तो उसकी गाड़ी में कम से कम 3 लीटर से ज्यादा पेट्रोल खर्च हो जाता है.
इस समय हमारे देश में पेट्रोल की कीमत लगभग 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास है. जिसके हिसाब से एक दिन में 300 से 350 रुपये पेट्रोल में खर्च हो जाते हैं. अब अगर इसको महीने के हिसाब जोड़ा जाए तो एक डिलीवरी बॉय को सिर्फ अपनी बाइक की टंकी फुल रखने के लिए 9000 से 10000 रुपये तक का पेट्रोल खरीदना पड़ जाता है.

बाइक मेंटेनेंस का भी होता है खर्च
आपको बता दें कि सिर्फ पेट्रोल ही नहीं बल्कि लगातार इतनी लंबी दूरी तय करने की वजह से डिलीवरी बाइकों में पार्ट्स में खराबी भी बहुत जल्दी शुरू हो जाती है. हर महीने बाइक का इंजन ऑयल बदलवाना, घिस चुके टायर्स को ठीक करवाना, ब्रेक शू और चेन सेट का खर्च अलग से राइडर की जेब पर भारी पड़ता है.
जबकि इसके अलावा बार-बार फोन का इस्तेमाल करने से इंटरनेट डेटा और मोबाइल स्क्रीन टूटने का जोखिम भी उनके साथ हमेशा बना रहता है. इन सभी चीजों को अगर कुल लागत में मिला दिया जाए तो डिलीवरी पार्टनर की महीने की कुल आमदनी का लगभग 30 से 40 हिस्सा केवल गाड़ी को चलाने और मेंटेन करने में ही खर्च हो जाता है.
इलेक्ट्रिक पर स्विच हो रहें डिलीवरी बॉय
हमारे देश में बढ़ते पेट्रोल खर्च और कम होती बचत की इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए अब कई डिलीवरी पार्टनर पेट्रोल बाइकों को छोड़कर इलेक्ट्रिक स्कूटर और ईवी का इस्तेमाल करने लगे हैं. इलेक्ट्रिक वाहनों से रोजाना के पेट्रोल का खर्चा लगभग न के बराबर रह जाता है और बैटरी चार्जिंग या स्वैपिंग का खर्च पेट्रोल के मुकाबले काफी कम बैठता है. लेकिन हर जगह चार्जिंग स्टेशन की सुविधा न होने के कारण कई लोगों को अब भी दिक्कतें आती हैं.
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