Surya Gochar 2026: 17 अक्टूबर से तुला में नीच होंगे सूर्य, क्या इन 5 राशियों की बढ़ेंगी मुश्किलें? जानें नीचभंग का नियम
Surya Gochar 2026: 17 अक्टूबर को सूर्य तुला राशि में नीच होंगे. जानें मेष, कर्क, सिंह, तुला और कुंभ राशि पर असर और नीचभंग राजयोग के नियम.

Surya Gochar October 2026: 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को शाम करीब 7:57 बजे सूर्य कन्या राशि छोड़कर तुला राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिष में तुला सूर्य की नीच राशि मानी जाती है. सूर्य यहां 16 नवंबर तक रहेंगे. इस दौरान मेष, कर्क, सिंह, तुला और कुंभ राशि वालों के लिए नौकरी, कारोबार, रिश्तों और मान-सम्मान से जुड़े मामले महत्वपूर्ण रह सकते हैं. लेकिन क्या सूर्य के नीच होते ही परेशानियां बढ़ जाती हैं?
क्या हर कुंडली में इसका बुरा असर पड़ता है? ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में कुछ ऐसे नियम बताए गए हैं, जिनसे नीच सूर्य की कमजोरी दूर हो सकती है और नीचभंग राजयोग बन सकता है.
तुला राशि में सूर्य नीच क्यों होते हैं?
वैदिक ज्योतिष में सूर्य मेष राशि में उच्च और तुला राशि में नीच माने जाते हैं. तुला राशि के 10 अंश पर सूर्य परम नीच अवस्था में होते हैं.
सूर्य आत्मविश्वास, अधिकार, पिता, प्रतिष्ठा और सरकारी पद के कारक हैं. वहीं तुला राशि का संबंध साझेदारी और संतुलन से है. ज्योतिषीय मान्यता है कि यहां सूर्य अपनी शक्ति पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाते. हालांकि, नीच सूर्य का मतलब हमेशा असफलता नहीं होता.
क्या नीच सूर्य हर कुंडली में खराब फल देते हैं?
नहीं. सूर्य का नीच होना और अशुभ फल देना अलग बातें हैं. किसी कुंडली में नीच सूर्य संघर्ष बढ़ा सकते हैं, जबकि दूसरी कुंडली में व्यक्ति कठिनाइयों के बाद ऊंचा पद भी प्राप्त कर सकता है.
इसका निर्णय सूर्य के भाव, लग्न, दृष्टि, युति, नवांश और दशा से होता है. इसलिए केवल तुला राशि में सूर्य देखकर नौकरी छूटने, धनहानि या प्रतिष्ठा घटने की भविष्यवाणी करना सही नहीं है.
सूर्य का नीचभंग राजयोग कब बनता है?
मंत्रेश्वर रचित फलदीपिका के सातवें अध्याय में नीचभंग राजयोग के नियम मिलते हैं. सूर्य के लिए ये स्थितियां महत्वपूर्ण हैं.
- पहला नियम: तुला राशि के स्वामी शुक्र लग्न या चंद्रमा से केंद्र भाव यानी पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव में हों.
- दूसरा नियम: सूर्य की उच्च राशि मेष के स्वामी मंगल लग्न या चंद्रमा से केंद्र में स्थित हों.
- तीसरा नियम: तुला राशि में उच्च होने वाले शनि लग्न या चंद्रमा से केंद्र में हों, तो भी नीचभंग की स्थिति बन सकती है.
इसके अलावा तुला में बैठे सूर्य पर शुक्र की दृष्टि और अन्य ग्रहों के आपसी संबंध भी देखे जाते हैं. हालांकि, नीचभंग होना और शक्तिशाली नीचभंग राजयोग बनना अलग बातें हैं. पूरा फल ग्रहों के बल और दशा पर निर्भर करता है.
सूर्य के तुला गोचर से इन 5 राशियों पर क्या असर पड़ेगा?
मेष राशि: सूर्य सातवें भाव में आएंगे. वैवाहिक जीवन और कारोबारी साझेदारी में मतभेद हो सकते हैं. बड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें.
कर्क राशि: सूर्य चौथे भाव में रहेंगे. घर, संपत्ति और पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं. नौकरी और घरेलू जीवन में संतुलन रखना जरूरी होगा.
सिंह राशि: सूर्य आपकी राशि के स्वामी हैं. तीसरे भाव में उनका गोचर मेहनत, साहस और नए प्रयासों से सफलता दिलाने वाला माना जाता है. भाई-बहनों से विवाद से बचें.
तुला राशि: सूर्य आपकी राशि में नीच होंगे. आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और प्रतिष्ठा पर ध्यान देना होगा. अधिकारियों से टकराव से बचें. जन्मकुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होने पर परिणाम बेहतर हो सकते हैं.
कुंभ राशि: सूर्य नौवें भाव में रहेंगे. पिता, गुरु, उच्च शिक्षा और लंबी यात्राओं से जुड़े मामलों में बदलाव संभव हैं. भाग्य से ज्यादा मेहनत पर भरोसा करना होगा.
क्या 17 अक्टूबर से सभी का नीचभंग राजयोग बनेगा?
नहीं. गोचर में सूर्य का तुला राशि में आना और जन्मकुंडली में नीच सूर्य होना अलग स्थितियां हैं. सूर्य का यह गोचर अपने आप सभी की कुंडली में नीचभंग राजयोग नहीं बनाता.
ज्योतिष में नीचभंग को संघर्ष के बाद उन्नति की संभावना से जोड़ा गया है. लेकिन हर नीचभंग राजयोग बड़ी सफलता नहीं दिलाता. इसका वास्तविक फल जानने के लिए पूरी जन्मकुंडली, ग्रहों की शक्ति और संबंधित दशा देखनी जरूरी है.
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