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हिंदी न्यूज़World News'पीरियड्स वाली झोपड़ी' में बच्चों समेत महिला की मौत, अधिकारी ने उठाया कुप्रथा मिटाने का बीड़ा
'पीरियड्स वाली झोपड़ी' में बच्चों समेत महिला की मौत, अधिकारी ने उठाया कुप्रथा मिटाने का बीड़ा
Written By : एबीपी न्यूज़ | Updated at : 28 Jan 2019 12:32 PM (IST)
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अगस्त 2017 में नेपाल सरकार ने इसे आपराधिक कृत्य करार देते हुए तीन महीने जेल और 3,000 नेपाली रुपये जुर्माने का प्रावधान किया था. उपमहापौर ने विभिन्न नगरपालिकाओं में अब तक 80 पीरियड्स झोपड़ियां तुड़वाई हैं. उन्होंने कहा, "सदियों पुरानी इस परंपरा को कम समय में समाप्त करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह असंभव नहीं है."
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पुलिस के मुताबिक उनकी मौत दम घुटने से हुई थी, क्योंकि झोपड़ी में धुआं निकलने का कोई रास्ता नहीं था. रेग्मी (26) बाजुरा स्थित अपने निर्वाचन क्षेत्र और जिले के दूर-दराज के हर गांव में जाकर इन झोपड़ियों को तोड़ेंगी. नेपाल में सदियों से पीरियड्स के दौरान महिलाओं और लड़कियों को उनके घरों से अलग झोपड़ियों में ठहराने की परंपरा है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में इस परंपरा पर रोक लगा दी थी.
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आठ जनवरी की रात अंबा बोहरा को बिना खिड़की की मिट्टी और पत्थर से बनी एक झोपड़ी रहने को दी गई थी. उसे पीरियड्स के कारण उसमें ठहराया गया था. उसने खुद को और अपने नौ साल और 12 साल के दो बेटों को गर्म करने के लिए आग जलाई थी. बोहरा की सास ने जब अगले दिन झोपड़ी का दरवाजा खोला तो तीनों की मौत हो चुकी थी.
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काठमांडू से 720 किलोमीटर दूर बाजुरा जिला स्थित बुदिनंदा नगरपालिका की उपमहापौर सृष्टि रेग्मी ने बताया, "झोपड़ी की ये परंपरा एक अवैध परंपरा है, जिसमें कई महिलाओं की मौत हो चुकी है. इस कथित आस्था का अंत होना चाहिए."
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नेपाल की एक अधिकारी ने पीरियड्स झोपड़ी की सदियों पुरानी परंपरा मिटाने के लिए एक अभियान शुरू किया है. दरअसल, नेपाल में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को जबरन घर से अलग एक कुटिया में समय बिताने की परंपरा रही है. इसी महीने बाजुरा जिले में ऐसी ही एक कुटिया में एक महिला और उसके दो बच्चे मृत पाए गए. इस घटना के बाद अधिकारी ने यह अभियान चलाया है.
Published at : 28 Jan 2019 12:32 PM (IST)
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