'सबसे अहम बात ये है कि...', RSS प्रमुख के बयान पर बोले फारूक अब्दुल्ला
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई हैं. उनके बयान पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी टिप्पणी की है.

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संचालक मोहन भागवत ने रिजीम चेंज को लेकर एक बयान दिया. उन्होंने कि रिजीम चेंज से हालात नहीं बदलते. भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना है. संघ प्रमुख के इस बयान के बाद राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है. पक्ष-विपक्ष की ओर से उनके बयान पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है.
इस बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर JKNC प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "सबसे अहम बात यह है कि भारत एक लोकतंत्र है और संविधान आपको विरोध करने का अधिकार देता है. बशर्ते कि विरोध शांतिपूर्ण हो और अभी ठीक ऐसा ही हो रहा है. आज पूरा देश जानता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने गलत तरीके से काम किया है.
एक खास पार्टी को जिताने के लिए कदम उठाए- फारूक अब्दुल्ला
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक खास पार्टी को जिताने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कदम उठाए हैं. पहले, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल होते थे, लेकिन अब यह भूमिका हटा दी गई है."
उन्होंने आगे कहा, "अब, समिति के तीन सदस्यों में से दो सरकार की तरफ से हैं, और केवल एक विपक्ष से है. इसलिए, इस ढांचे में बदलाव करना जरूरी है, ताकि चुनाव आयुक्त स्वतंत्र रूप से अपना काम कर सकें."
आरएसएस प्रमुख ने अपने बयान में क्या कहा?
मोहन भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र किया और रिजीम चेंज की राजनीति पर बयान दिया. उन्होंने कहा कि भारत, हिंदू और संघ को तोड़ने के लिए आसुरी ताकतें योजना बनाकर काम कर रही हैं. उसी प्रकृति के कुछ लोग इसमें सहायता के लिए मिल जाते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि क्षुद्र सत्ता-स्वार्थ और विवेकहीनता के कारण कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी इसमें शामिल हो जाते हैं. भारत सहित सारे विश्व में जो भद्रता, मांगल्य, सांस्कृतिक और मानवीय संस्कार हैं, उन्हें नष्ट करने की आसुरी प्रतिज्ञा लेकर पश्चिम से एक आंधी चली है, जिससे तथाकथित प्रगतिशील देश भी त्रस्त और असहाय हैं.
भारत की विविधता पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि भारत माता का सर्वोच्च स्थान है. देश में अलग-अलग पंथ, प्रांत, जातियां, भाषाएं, खानपान और रीति-रिवाज हैं, लेकिन भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना है.
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