Ghich Pich Review: हर बाप बेटे को साथ में देखनी चाहिए ये फिल्म, ऐसी मूवीज का बनना सिनेमा और सोसायटी के लिए जरूरी है
Ghich Pich Review: इस फिल्म की कहानी 3 दोस्तों की है. फिल्म में पापा और बेटे की रिश्ते की कहानी दिखाई गई है. आइए जानते हैं कैसी है फिल्म.
Ankur Singla
Nitesh Pandey, Satyajit Sharma, Geeta Agrawal Sharma
Ghich Pich Review: कहते हैं फिल्में वो दिखाती हैं जो सोसायटी में हो रहा होता है, आज जेनरेशन बदल गई है. बच्चों और पेरेंट्स की सोच में काफी फर्क आ गया है. इस वजह से फैमिलीज में प्रॉब्लम्स भी होती हैं, ऐसे में कई बार कुछ फिल्में हमें मुश्किल चीजों को आसान भाषा में समझा जाती हैं. ये ऐसी फिल्म है, अक्सर फिल्ममेकर फिल्मों के रिव्यूज पर रिलीज के दिन तक रोक लगा देते हैं लेकिन यहां फिल्म की रिलीज से 1 महीना पहले फिल्म दिखा देना. रिव्यू पर कोई रोक न लगाना बताता है कि फिल्ममेकर को फिल्म में दम लगता है. फिल्म 1 अगस्त को थियेटर में आएगी.
कहानी
ये कहानी है 3 दोस्तों की और उनके अपने-अपने पापा से रिश्ते की, एक सिख है लेकिन एक लड़की के प्यार में अपने बाल कटवाना चाहता है. एक को उसके पापा पढ़ाई के लिए डांटते रहते हैं. तीसरे को अपने पापा के बारे में कुछ ऐसा पता चल जाता है कि वो अपने पापा से नफरत करने लगता है. कैसे इनके रिश्ते ठीक होते हैं इसके लिए आपको ये फिल्म देखनी चाहिए.
कैसी है फिल्म
सिनेमा का अगर सोसाइटी पर कोई असर होता है तो ऐसी फिल्में जरूरी हैं. ये फिल्म हमारे परिवार के हमारा रिश्ता ठीक या और मजबूत कर सकती है. ये फिल्म 1 घंटा 30 मिनट की है और शुरू से ही आपको बांध लेती है. दोस्तों की अलग अलग कहानियां चलती हैं और एक से दूसरी कहानी बड़े स्मूद तरीके से स्विच करती है.
आपको इनमें अपने दोस्त अपना परिवार दिखता है. आपको ये कहानी अपनी लगती है. फिल्म को बेवजह खींचा नहीं गया. हर सीन जरूरी लगता है. खासतौर पर सेकेंड हाफ से आप जबरदस्त तरीके से कनेक्ट करते हैं और एंड में ये फिल्म आपके चेहरे पर एक मुस्कान छोड़ जाती है. फिल्म छोटे बजट की है. कुछ एक चेहरे आपको जाने पहचाने दिखेंगे लेकिन फिल्म बड़ा असर छोड़ती है. आपको ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि अगर इस फिल्म का बजट ज्यादा होता तो ये और ज्यादा असर छोड़ सकती थी.
एक्टिंग
नितेश पांडे इस फिल्म में सबसे जाना पहचाना चेहरा हैं. वो अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन एक कलाकार कभी मरता नहीं है और नितेश की एक्टिंग यहां हमेशा की तरह कमाल है. सत्यजीत शर्मा एक और मशहूर एक्टर हैं जिन्हें बालिका वधू से हम सब जानते हैं और यहां एक पिता के किरदार में वो जान डाल गए हैं.
यही एक अच्छे एक्टर की पहचान है कि वो अपनी इमेज से हटकर कुछ करता है. निशान चीमा तीसरे दोस्त के पिता हैं जिसको सिख होने के बाद भी अपने बाल कटवाने हैं. उनका काम कमाल है, एक पिता की बेबसी को वो बखूबी दिखाते हैं. शिवम कक्कड़, आर्यन सिंह राणा और कबीर नंदा वो तीन दोस्त हैं जिनकी ये कहानी है. तीनों का काम काफी अच्छा है, गीता अग्रवाल, लिली सिंह और शालिनी शर्मा इन तीनों की मां के किरदार में हैं और इन तीनों ने अपना अपना काम अच्छे से किया है.
राइटिंग और डायरेक्शन
Ankur Singla ने ये फिल्म लिखी और डायरेक्ट की है. अंकुर की समाज के लेकर समझ की तारीफ करनी होगी. उनकी राइटिंग में गहराई है, उन्हें रिश्तों की समझ है. उन्होंने फिल्म को खींचा नहीं है. डायरेक्शन टाइट है, वो जो कहना चाहते थे. कह गए हैं. कुल मिलाकर ये फिल्म जरूर देखिएगा.
रेटिंग- 3.5 स्टार्स
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