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हरिद्वार का 'आयुर्वेद खजाना', पतंजलि हर्बल गार्डन में मौजूद हैं 1000+ जड़ी-बूटियां
Patanjali Herbal: उत्तराखंड के पतंजलि हर्बल गार्डन में 1000 से अधिक औषधीय पौधे हैं, जहां लोग और शोधकर्ता आयुर्वेद, पौधों के उपयोग और प्रकृति के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त करते हैं.

Patanjali Herbal Garden: सन् 1995 में शुरू हुआ उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में स्थित पतंजलि हर्बल गार्डन का एक खास उद्देश्य के साथ बनाया गया था— व्यापक रूप से उपयोग होने वाले औषधीय पौधों को सुरक्षित रखना और लोगों, खासकर नई पीढ़ियों को आयुर्वेद के बारे में जागरूक करना. समय के साथ-साथ यह जगह एक ऐसे केंद्र के रूप में विकसित हुई है, जहां शिक्षा, रिसर्च और प्रकृति की जानकारी एक साथ प्राप्त होता है. इसमें भारत के अलग-अलग हिस्सों से लाए गए 1000 से ज्यादा प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियां, झाड़ियां, वृक्ष, लताएं, जलीय और सजावटी पौधे मौजूद हैं.
इस गार्डन को इस तरह से सोच-समझ कर बनाया गया है कि आम लोग और रिसर्च करने वाले दोनों आसानी से पौधों की विभिन्न किस्मों के बारे में पूरी जानकारी के साथ समझ सकें. यहां आने वाले सभी लोग अलग-अलग पौधों को देखकर उनके उपयोग और आयुर्वेद में उनकी भूमिका के बारे में आसानी से जान सकते हैं.
कई तरह के पौधों का बड़ा संग्रह
इस गार्डन में पौधों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें करीब 300 प्रकार की जड़ी-बूटियां, 175 झाड़ियां, 50 लताएं, 25 जलीय पौधे और लगभग 350 वृक्ष प्रजातियां शामिल हैं. यह विविधता आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाले पौधों से जुड़ी इलाजों के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करती है.
कुछ खास पौधों के समूहों को सही माहौल देने के लिए, गार्डन में 5 कृत्रिम गुफाएं भी बनाई गई हैं. इन गुफाओं में ऐसे पौधे उगाए जाते हैं जिन्हें खास वातावरण की जरूरत होती है, जैसे ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स और ऑर्किड आदि. साथ ही कुछ गुफाओं में ऐसी मूर्तियां भी हैं जो आयुर्वेद की बुनियादी अवधारणाओं को दर्शाती हैं, जिनमें मंथन, वटी, आसव और भस्म जैसी औषधियों की तैयारी के साथ-साथ योगासन, प्राणायाम और मुद्राओं का चित्रण शामिल है.
ग्रह, राशि और नक्षत्र से जुड़े पौधे
इस वेबसाइट में कुछ खास सेक्शन भी हैं, जैसे नव ग्रह वाटिका, जिनमें विभिन्न ग्रहों से जुड़े नौ पौधों को दर्शाया गया है. उदाहरण के तौर पर अपामार्ग (अचिरेंथेस एस्पेरा एल.) पौधा बुध (बुध ग्रह) से जुड़ा है, जबकि पीपल (फिकस रिलिजियोसा एल.) का पेड़ गुरु (बृहस्पति ग्रह) से संबंधित मन जाता है.
इसी तरह राशि वाटिका में राशि चिन्हों से जुड़े 12 पौधे और नक्षत्र वाटिका में चंद्र नक्षत्रों से जुड़े 28 पौधे लगाए गए हैं. इस खंड से लोगों को पारंपरिक मान्यताओं और वनस्पति विज्ञान को एक साथ समझने का मौका मिलता है.
घूमने और सीखने का खास अनुभव
इस गार्डन में 7 कृत्रिम फव्वारे और एक बड़ा तालाब भी है, जहां ट्रैपा नैटन्स एल., निम्फिया नौचाली और नेलुम्बो न्यूसीफेरा जैसे जलीय पौधों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाए रखने में मदद करते हैं. इसके अलावा एक छोटा तालाब, झरना और पक्षियों के लिए खास घर भी बनाया गया है, जहां लोग झूलते पल से गुजरते हुए प्राकृतिक माहौल का आनंद ले सकते हैं.
यहां गाइडेड टूर भी होते हैं, जहां विशेषज्ञ लोग पौधों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं- जैसे उनके नाम, फायदे और किन बीमारियों में इनका इस्तेमाल कीया जा सकता है.
आम लोगों के लिए भी फायदेमंद
इस गार्डन के पौधों का इस्तेमाल सिर्फ दिखवती तौर पर नहीं किया जाता है, बल्कि इलाज के लिए भी किया जाता है. योगपीठ के वैद्य इनसे ताजे काढ़े और दवाएं तैयार करते हैं.
साथ ही, यहां की नर्सरी के माध्यम से आम जनता को पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वह इनका घर पर भी इस्तेमाल कर सकें. इस तरह यह गार्डन न सिर्फ आम लोगों को जानकारी देता है, बल्कि लोगों को आयुर्वेद से जोड़ने का काम भी करता है.
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