एक्सप्लोरर
हिंदी न्यूज़India Newsधारा 377: SC के फैसले के बाद LGBT समुदाय में खुशी की लहर, कहा- अब हम अपराधी नहीं
धारा 377: SC के फैसले के बाद LGBT समुदाय में खुशी की लहर, कहा- अब हम अपराधी नहीं
Written By : एबीपी न्यूज़ | Updated at : 06 Sep 2018 01:54 PM (IST)
1/8

सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में साफ किया कि पशुओं और बच्चों के साथ किसी तरह की यौन क्रिया भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत दंडनीय अपराध बनी रहेगी. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पशुओं और बच्चों के साथ अप्राकृतिक यौन क्रिया से संबंधित धारा 377 का हिस्सा पहले की तरह ही लागू रहेगा.
2/8

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''धारा 377 एलजीबीटी के सदस्यों को परेशान करने का हथियार था, जिसके कारण इससे भेदभाव होता है.''
3/8

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''खुद को अभिव्यक्त नहीं कर पाना मरने के समान है. एलजीबीटी समुदाय को अन्य नागरिकों की तरह समान मानवीय और मौलिक अधिकार हैं.''
4/8

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''अदालतों को व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करनी चाहिए क्योंकि गरिमा के साथ जीने के अधिकार को मौलिक अधिकार के तौर पर मान्यता दी गई है.''
5/8

पांच जजों की संविधान पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा कर रहे थे. जस्टिस मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा, ''हर व्यक्ति को गरिमा से जीने का हक है, सेक्सुअल रुझान प्राकृतिक है. इस आधार पर भेद भाव नहीं हो सकता. हर व्यक्ति को गरिमा से जीने का हक है. सेक्सुअल रुझान प्राकृतिक है. इस आधार पर भेद भाव नहीं हो सकता. निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है, 377 इसका हनन करता है.''
6/8

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, ''समय के साथ बदलाव ज़रूरी है, संविधान में बदलाव करने की ज़रूरत इस वजह से भी है जिससे कि समाज में बदलाव लाया जा सके. नैतिकता का सिद्धांत कई बार बहुमतवाद से प्रभावित होता है लेकिन छोटे तबके को बहुमत के तरीके से जीने को विवश नहीं किया जा सकता.''
7/8

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बाद समलैंगिक समुदाय में खुशी की लहर है. कई सालों से अपने अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले समलैंगिक अधिकारों के कार्यकर्ता आज अपना सबसे बड़ा दिन मान रहे हैं. उनका कहना है कि अब हम समाज के सामान्य नागरिक हैं, हमें अपराधी की दृष्टि से नहीं देखा जाएगा. फैसला सुनते ही पूरे समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई.
8/8

धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि दो वयस्कों के बीच सहमति से एकांत में बने संबंध अब अपराध नहीं है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा समय के साथ बदलाव ज़रूरी है, संविधान में बदलाव करने की ज़रूरत इस वजह से भी है जिससे कि समाज में बदलाव लाया जा सके. नैतिकता का सिद्धांत कई बार बहुमतवाद से प्रभावित होता है लेकिन छोटे तबके को बहुमत के तरीके से जीने को विवश नहीं किया जा सकता.''
Published at : 06 Sep 2018 01:01 PM (IST)
Sponsored Links by Taboola
टॉप हेडलाइंस
इंडिया
TMC विरोध प्रदर्शन में किस बात पर चढ़ा ममता बनर्जी का पारा, अपने ही कार्यकर्ता को मारा तमाचा
विश्व
खार्ग पर कब्जा, पावर प्लांट पर हमले... ईरान में मचेगी भारी तबाही! ट्रंप ने दे दिया खतरनाक मैसेज, बोले - 'आज रात...'
दिल्ली NCR
दिल्ली: रोहिणी में बिल्डिंग मालिक के खिलाफ केस, 1 मजदूर की मौत, आस पास की इमारतें कराई गईं खाली
बॉलीवुड
'धमाल 4' की एडवांस बुकिंग हुई शुरू, जानें- रिलीज से पहले कितना कर डाला कलेक्शन























