हल्के में मत लेना 'ज़ीका वायरस' को, भारत को भी है इसका खतरा

नईदिल्लीः हाल ही में वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की थी कि भारत में 1.2 अरब लोगों पर है ज़ीका वायरस का खतरा. वैसे भी सिंगापुर में 13 भारतीय नागरिक जीका विषाणु से संक्रमित पाए गए हैं. ज़ीका वायरस के संक्रमण की हालिया शुरूआत मई, 2015 में ब्राजील में हुई थी. ऐेसे में जीका के बारे में जानना बेहद जरूरी है. चलिए जानते हैं जीका वायरस है क्या.
क्या है जीका जीका एक किस्म का वायरल इंफेक्शन है, जिससे बुखार, रैश, जोड़ों में दर्द, आंखों में लाली आदि होते हैं. यह मुख्य तौर पर एडिस मच्छर की वजह से फैलता है और गर्भवती मां के जरिए कोख में पल रहे बच्चे को भी हो सकता है.
जीका एक ऐसी बीमारी है जो नवजात में खासा देखा जा रहा है. जीका वायरस से संक्रमित बच्चों के सिर और साइज अपेक्षा से छोटे हैं. इस तरह के असामान्य लकवाग्रस्त हालत को गूलियन बॅरे सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है.
जीका वायरस के संक्रमण से मस्तिष्क संबंधी कई जटिलताएं हो सकती हैं और उन संवेदी तंत्रिकाओं को भी नुकसान पहुंच सकता है जो तापमान, दर्द, कंपन और छुअन को त्वचा से महसूस करती है.
यौन संबंधों के जरिए संक्रमण
- जीका मच्छर काटने के अलावा संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध स्थापित करने से भी होता है. ओरल सेक्स और गुदा मैथुन के साथ सामान्य यौन संबंधों के जरिए भी जीका का संक्रमण हो सकता है.
- अगर गर्भावस्था के दौरान जीका हो जाए तो यह भ्रूण में ही माईक्रो स्फैली का कारण बन सकता है.
- जीका वायरस वाले क्षेत्रों से लौट रहे सैलानियों को यौन संबंध बनाने से आठ सप्ताह तक परहेज करना चाहिए या सुरक्षित यौन संबंध ही बनाएं.
- गर्भधारण की योजना बना रहे जोड़ों को आठ सप्ताह के लिए रुक जाना चाहिए.
- अगर पुरुष में इसके लक्षण नजर आएं तो छह महीने के लिए रुक जाना चाहिए.
जीका का निदान
- ब्लड टेस्ट या यूरिन टेस्ट के जरिए जीका वायरस के होने का पता लगाया जा सकता है. अगर जीका का ठीक से इन टेस्ट में पता नहीं चल पाता तो डॉक्टर कुछ और ब्लड टेस्ट करवाते हैं जैसे चिकनगुनिया और डेंगू के लिए करवाएं जाते हैं.
- एडवांस लैब्स से मॉलिकुलर टेस्टिंग भी करवाई जाती है जिससे जीका की सही पुष्टि की जा सके.
- जो लोग जीका प्रभावित क्षेत्रों से आएं हैं या जिन्होंने जीका संक्रमित व्यक्ति से सेक्स संबंध बनाए हैं उनके कुछ ब्लड टेस्ट, सीमन टेस्ट, वैजाइनल फ्लूड और यूरिन टेस्ट करवाएं जाते हैं.
जीका का इलाज इसका कोई खास इलाज नहीं हैं, बस मरीज को पूरी तरह से आराम करना चाहिए, अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए और बुखार पर नियंत्रण करने के लिए पैरासीटामोल का प्रयोग करना चाहिए. एस्प्रिन बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए. बच्चों में एस्प्रिन से गंभीर खतरा हो सकता है.
जीका से बचाव
- जीका वायरस से बचने के लिए एडिस की सक्रियता के समय घर के अंदर ही रहना चाहिए.
- यह दिन के वक्त सूरज के चढ़ने से पहले या छिपने के बाद सुबह जल्दी या शाम को काटते हैं.
- अच्छी तरह से बंद इमारतें इस से बचने के लिए सबसे सुरक्षित जगहें हैं.
- बाहर जाते हुए जूते, पूरी बाजू के कपड़े और लंबी पैंट पहने.
- डीट या पीकारिडिन वाले बग्ग स्प्रे या क्रीम लगाएं.
- दो महीने से छोटे बच्चों पर डीट वाले पदार्थ का प्रयोग न करें.
- कपड़ों पर पर्मिथ्रीन वाले कीट रोधक का प्रयोग करें.
- रुके हुए पानी को निकाल दें.
- अगर आप को पहले से जीका है तो खुद को मच्छरों के काटने से बचाएं, ताकि यह और न फैल सके.
क्या कहते हैं डॉक्टर
मैक्स वैशाली के डॉ. पंकजनंद से ज़ीका वायरस को लेकर एबीपीन्यूज की संवाददाता ने बात की. डॉ. के मुताबिक, भारत में जीका वायरस के फैलने की पूरी संभावना है लेकिन कुछ कंडीशंस पर भी ध्यान देना जरूरी है. जीका वायरस उसी मच्छर से फैलता है जिससे चिकनगुनिया और डेंगू यानी एडिस मच्छर से. लेकिन अभी तक जीका का कोई मामला सामने नहीं आया है जो कि भारत के लिए अच्छी बात है. सबसे ज्यादा जीका वायरस का खतरा गर्भवती महिलाओं और उनके अजन्मे बच्चे को है. भ्रूण के दिमाग पर इसका सीधा असर देखा जा रहा है. जीका से डरने या पैनिक करने की जरूरत नहीं है. हां, थोड़ी सी सावधानी आपको आसानी से जीका से बता सकती है.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL























