सैनिकों के लिए शुरू हुई भारत राइस योजना क्या, इससे सेना को क्या फायदा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैनिकों के लिए 'भारत राइस' योजना शुरू की है, जिससे जवानों को 10 व 30 किलो के बैग में उच्च गुणवत्ता का चावल सीधे सप्लाई डिपो में मिलेगा. आइए इस बारे में विस्तार से जानें.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार (11 अक्टूबर) को नई दिल्ली में देश के वीर जवानों की खुराक और पोषण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से भारत राइस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया. इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य हमारे सैनिकों तक सीधे उत्तम गुणवत्ता का चावल पहुंचाना और उनकी रसद आपूर्ति प्रणाली को अधिक कुशल बनाना है. यह योजना 'जय जवान, जय किसान' की मूल भावना को धरातल पर साकार करती है, जिसमें किसान द्वारा उपजाया गया अन्न सीधे सीमा पर तैनात जवानों की थाली तक पहुंचेगा. आइए जानें कि यह योजना क्या है.
सैनिकों के राशन की गुणवत्ता में होगा सुधार
सेना के आपूर्ति एवं परिवहन महानिदेशालय के दिशा-निर्देशों के तहत शुरू की गई इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य सैन्यकर्मियों को मिलने वाले अनाज के मानकों में अभूतपूर्व सुधार लाना है. इसके तहत तैयार होने वाले चावल को रक्षा विभाग के कड़े मानकों और विशेष निर्देशों के अनुसार ही कूटा व संसाधित किया जाएगा. इसमें बाहरी पदार्थों या मिलावट की कोई गुंजाइश नहीं होगी, साथ ही टूटे या रंगहीन दानों की मात्रा नगण्य रखी जाएगी. इस उच्च गुणवत्ता वाले चावल की आपूर्ति वित्त वर्ष 2026-2027 के दौरान नैफेड (NAFED) के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी.
सेना के पास सीधे पहुंचेगा उच्च गुणवत्ता वाला चावल
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब भारतीय सेना को राशन उठाने के लिए भारतीय खाद्य निगम के स्थानीय गोदामों तक बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. इसके बजाय, प्रक्रियाबद्ध किया गया उत्तम श्रेणी का चावल सीधे सेना के अधिकृत आपूर्ति डिपो तक पहुंचाया जाएगा. खाद्य सुरक्षा और मानकों की सख्त जांच के बाद ही इसे जवानों तक वितरण के लिए भेजा जाएगा, जिससे सेना का बहुमूल्य समय और परिवहन संसाधन दोनों बचेंगे.
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दुर्गम सीमाओं के लिए विशेष और आसान पैकेजिंग
अग्रिम सैन्य चौकियों और कठिन पर्वतीय इलाकों में तैनात जवानों के लिए राशन ले जाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है. इस व्यावहारिक समस्या को ध्यान में रखते हुए भारत राइस को 10 किलोग्राम और 30 किलोग्राम की विशेष थैलियों में ही पैक किया जाएगा. यह हल्की और मजबूत पैकेजिंग लद्दाख, पूर्वोत्तर या अन्य सुदूर क्षेत्रों में काम कर रहे सैनिकों के लिए रसद सामग्री को ले जाना और संभालना बेहद आसान बनाएगी, जो युद्धक तैयारियों में भी मददगार साबित होगी.
18 महीनों के आपसी तालमेल से बनी योजना
इस दूरगामी पहल की नींव अचानक नहीं रखी गई, बल्कि इसके पीछे एक लंबा अंतर-मंत्रालयी प्रयास शामिल है. भारतीय सेना, भारतीय खाद्य निगम, नैफेड और केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के बीच लगभग 18 महीनों तक चले गहन विचार-विमर्श और समन्वय के बाद इस योजना का खाका तैयार किया गया है. रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पहल भले ही देखने में छोटी लगे, लेकिन दुर्गम इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए यह एक बहुत बड़ा परिचालन राहत का जरिया बनेगी.

आपात स्थितियों के लिए एफसीआई के साथ 5 साल का करार
इसी कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना और एफसीआई के बीच पांच वर्षों के लिए एक विशेष समझौता (MoU) भी किया गया. इसके तहत किसी भी सैन्य आस्कमिक स्थिति या युद्ध जैसे हालात में सेना एफसीआई के विशाल गोदामों, जनशक्ति और सामग्री संभालने वाले उपकरणों का सीधे उपयोग कर सकेगी. यह व्यवस्था आपात स्थिति में आवश्यक वस्तुओं की त्वरित आवाजाही और रसद नेटवर्क को अभेद्य मजबूती देने का काम करेगी.
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