अक्टूबर में भी 35 डिग्री तापमान, क्या है इतनी गर्मी होने की वजह?
October Heat India: भारत में अक्टूबर के महीने के दौरान भी काफी ज्यादा गर्मी देखने को मिल रही है. तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है. जानें क्या है इसके पीछे की वजह.

- उत्तर भारत में अक्टूबर की गर्मी, तापमान बढ़ा।
- उच्च दबाव हवा धकेलता, जिससे उमस बढ़ती है।
- सीधी धूप, कमजोर पश्चिमी विक्षोभ बढ़ा रहे गर्मी।
October Heat India: वैसे तो अक्टूबर के महीने तक मानसून के वापसी हो जाती है लेकिन महीने की शुरुआत में उत्तर भारत में तापमान काफी ज्यादा हो गया है. इस साल अक्टूबर की शुरुआत से ही अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है. शनिवार को तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. यह बीते दो सालों में अक्टूबर का सबसे गर्म दिन था.
इसी के साथ रविवार को 36.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था. यह सामान्य से लगभग 2 डिग्री ज्यादा था. इस असामान्य गर्मी को आमतौर पर अक्टूबर हीट के नाम से जाना जाता है. आइए जानते हैं क्या है इस अक्टूबर हीट के पीछे की वजह.
मानसून की वापसी और बदलते दबाव वाले सिस्टम
अक्टूबर की गर्मी की बड़ी वजह मानसून के मौसम से मानसून के बाद के समय में बदलाव है. दरअसल मानसून के दौरान उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में कम दबाव वाला क्षेत्र बनता है. यह सिस्टम नमी, बादल और अपेक्षाकृत ठंडी हवाओं को अपनी तरफ खींचने में मदद करता है.
जैसे-जैसे मानसून वापस लौटता है कम दबाव वाला पैटर्न धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाता है. इसी के साथ उसकी जगह ज्यादा दबाव या फिर एंटीसाइक्लोनिक स्थिति ले लेती हैं. ज्यादा दबाव में हवा ऊपर उठने के बजाय नीचे बैठती है. हवा के नीचे बैठने की प्रक्रिया को सब्सिडेंस कहा जाता है. इससे जमीन के पास तापमान बढ़ सकता है और गर्मी और उमस वाली स्थिति बन सकती है.

हवा में इतनी उमस क्यों महसूस होती है?
गर्मी इस वजह से ज्यादा परेशान करने वाली होती है क्योंकि मानसून की कई महीनों की बारिश के बाद जमीन में काफी नमी बनी रहती है. बारिश के रुक जाने के बाद भी मिट्टी में नमी बनी रह सकती है और निचले वायुमंडल में वॉटर वेपर मौजूद रह सकता है.
जब आसमान साफ हो जाता है तो तेज धूप गीली जमीन को गर्म करती है और वाष्पीकरण बढ़ाती है. इससे पैदा होने वाली उमस को बढ़ा देती है. इससे तापमान असल रीडिंग से ज्यादा महसूस होता है.
जलवाष्प एक ग्रीन हाउस गैस भी है. यह पृथ्वी की सतह से निकलने वाले कुछ इंफ्रारेड रेडिएशन को सोख लेती है. इससे वायुमंडल में गर्मी के बने रहने पर असर पड़ता है. इससे रात गर्म हो सकती है और सूरज डूबने के बाद भी तापमान तेजी से गिरने से रुक सकता है.
सूरज से अभी भी तेज गर्मी मिलती है
सूरज की बदलती स्थिति अक्टूबर की गर्मी के पीछे एक और बड़ी वजह है. सितंबर में दिन-रात बराबर होने की स्थिति के बाद सूरज की आभासी रफ्तार दक्षिण की तरफ जारी रहती है. लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप पर सोलर रेडिएशन अभी भी तेज हो सकता है.
मानसून के बाद जैसे-जैसे बादल कम होते हैं सूरज की रोशनी जमीन तक ज्यादा सीधे पहुंचती है. सूरज की किरणों को रोकने वाले बादल कम होने से दिन के समय जमीन की सतह तेजी से गर्म हो जाती है.

कम वेस्टर्न डिस्टरबेंस
वेस्टर्न डिस्टरबेंस मौसम की एक ऐसी प्रणाली है जो आमतौर पर भूमध्यसागरीय इलाके में बनती है. वह उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में ठंडक और बारिश ला सकती है. जब अक्टूबर की शुरुआत में उनकी गतिविधि कमजोर होती है तो बादल, बारिश और ठंडी हवा से तापमान कम होने के मौके भी कम हो जाते हैं.
शहरीकरण की वजह से शहरों में यह स्थिति और भी ज्यादा साफ तौर पर महसूस की जा सकती है. कंक्रीट की इमारतें, सड़कें और पक्की सतह दिन के समय सूरज की गर्मी को बड़ी मात्रा में सोख लेती हैं. इसी के साथ सूरज डूबने के बाद धीरे-धीरे उसे छोड़ती हैं.
यह भी पढ़ें: क्या ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट निलंबित कर सकता है, जान लीजिए कानून?
अक्टूबर की गर्मी इतनी बेचैन करने वाली क्यों होती है?
अक्टूबर की गर्मी किसी एक वजह से नहीं होती. यह उस बदलाव के दौर में बनती है जब मानसून जा चुका होता है, आसमान साफ हो जाता है, जमीन में नमी बनी रहती है और हवा के दबाव का पैटर्न बदल जाता है.
सूरज की तेज गर्मी, ज्यादा उमस, नीचे बैठती हवा, ठंडक पहुंचाने वाले कमजोर सिस्टम और शहरों में गर्मी जमा होने की वजह से तापमान सामान्य स्तर से ऊपर जा सकता है. यही वजह है कि मानसून का मौसम खत्म होने के बाद भी अक्टूबर में दिन के समय गर्मी का एहसास होता है.
यह भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खुली 20 साल पुरानी फाइल, क्या है आरोप और इसमें कितनी सजा?






















