कितनी ऊंचाई पर उड़ते हैं हवाई जहाज, कितना नीचे आने पर क्रैश का खतरा?
British Airways Flight Emergency: हाल ही में ब्रिटिश एयरवेज की एक फ्लाइट में बड़ी इमरजेंसी हो गई. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर कितनी ऊंचाई पर उड़ना विमान के लिए सुरक्षित होता है.

- ब्रिटिश एयरवेज की उड़ान BA295 ने आपातकाल घोषित किया।
- परिचालन समस्या के बाद विमान 37,000 फीट से नीचे उतरा।
- वाणिज्यिक विमान आमतौर पर उच्च ऊंचाई पर कुशल उड़ान भरते हैं।
- आपातकाल में पायलट जानबूझकर विमान को सुरक्षित ऊंचाई पर लाते हैं।
British Airways Flight Emergency: लंदन से शिकागो जाने वाली ब्रिटिश एयरवेज की ट्रान्साटलांटिक उड़ान के आयरलैंड के ऊपर से उड़ान भरते समय तेजी से नीचे उतरने की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर से विमान की ऊंचाई पर सवाल उठने लगा है. दरअसल ब्रिटिश एयरवेज की उड़ान BA295 लोकल टाइम के मुताबिक सुबह लगभग 11:50 बजे लंदन हीथ्रो के टर्मिनल 5 से रवाना हुई और लगभग 8 घंटे और 40 मिनट के बाद शिकागो ओ'हारे पहुंचने वाली थी. लगभग 1 घंटे की यात्रा में विमान कथित तौर पर लगभग 37000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था जब एक परिचालन समस्या पैदा हुई. फ्लाइट ने इमरजेंसी कोड 7700 जारी किया और आपातकाल की घोषणा कर दी.
लेकिन क्या 37000 फीट से काफी कम ऊंचाई पर गिरने का मतलब यह है कि एक विमान दुर्घटनाग्रस्त होने वाला है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
कमर्शियल हवाई जहाज की ऊंचाई
कमर्शियल हवाई जहाज लंबी दूरी की यात्रा लगभग 35000 से 42000 फीट की ऊंचाई पर या जमीन से लगभग 10 से 12 किलोमीटर ऊपर करते हैं. इन ऊंचाई पर हवा पतली होती है जिससे एयरोडायनेमिक खिंचाव कम होता है और विमान को ईंधन बचाने में मदद मिलती है. ज्यादा ऊंचाई पर उड़ान भरने से विमान मौसम के अनुकूल रहता है और पायलट को आपातकालीन स्थिति में प्रतिक्रिया देने का काफी ज्यादा समय मिलता है.

कमर्शियल हवाई जहाज इतनी ऊंचाई तक क्यों उड़ते हैं?
पतली हवा खिंचाव को कम करती है
ज्यादा ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम होता है. यह एयरोडायनेमिक खिंचाव को कम करता है. इससे विमान ज्यादा कुशलता से उड़ान भर सकता है और कम ईंधन की खपत कर सकता है. लंबी दूरी की उड़ान के लिए इससे ऑपरेटिंग एफिशिएंसी में बड़ा अंतर पड़ता है.
ज्यादातर मौसम क्रूजिंग एल्टीट्यूड से नीचे रहता है
बादल, तूफान और दूसरी मौसम प्रणाली आमतौर पर कम ऊंचाई पर होती है. हालांकि शक्तिशाली तूफान काफी ज्यादा ऊंचाई तक फैल सकता है. इस मौसम में ज्यादा समय तक यात्रा करने से एक सहज और ज्यादा पूर्वानुमानित उड़ान मिल सकती है.
आपात स्थिति के दौरान पायलटों के पास ज्यादा समय
ज्यादा ऊंचाई पायलटों को कुछ आपात स्थिति पर प्रतिक्रिया देने के लिए पर्याप्त मात्रा में समय और दूरी प्रदान करती है. उदाहरण के लिए अगर किसी विमान का इंजन खराब हो जाए तो वह यूं ही आसमान से नहीं गिर जाता. एक आधुनिक एयरलाइनर उड़ान जारी रख सकता है और अगर जरूरी हो तो उड़ान भर सकता है. इसी के साथ चालक दल स्थिति का आकलन करता है और हवाई अड्डे या फिर उपयुक्त लैंडिंग क्षेत्र का चयन करता है.

किस ऊंचाई पर उतरना खतरनाक हो जाता है?
ऐसी कोई एक ऊंचाई नहीं है जिस पर कोई विमान अपने आप असुरक्षित हो जाता है. सुरक्षा इलाके, मुश्किल, विमान के प्रदर्शन, मौसम, रफ्तार और विमान कंट्रोल में रहता है या नहीं पर निर्भर करता है.
सामान्य उड़ान के दौरान विमानन नियम कम से कम सुरक्षित ऊंचाई तय करते हैं. सामान्य तौर पर टेक ऑफ और लैंडिंग क्षेत्र से दूर उड़ने वाले विमान को इलाके और बाधाओं से एक तय दूरी बनाए रखनी चाहिए. आमतौर पर एफएए जरूर में भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में उच्चतम बाधा से कम से कम 1000 फीट ऊपर और दूसरे क्षेत्रों में सतह से 500 फीट ऊपर होना शामिल है. इस वजह से 10000 या उससे भी कम ऊंचाई पर उड़ान भरना स्वाभाविक रूप से खतरनाक नहीं है.
यह भी पढ़ें: क्या प्रोटेस्ट कर रहे सांसदों को गिरफ्तार कर सकती है पुलिस, क्या है नियम?
ऊंचाई का अचानक गिरना
तेजी से नीचे की तरफ उतरना और कंट्रोल ऊंचाई से भी ज्यादा जरूरी हो सकता है. 10000 फीट तक कंट्रोल्ड लैंडिंग पूरी तरह से सामान्य हो सकती है. इसी के साथ अनियंत्रित या फिर काफी ज्यादा तेजी से नीचे उतरना गंभीर समस्या पैदा कर सकता है.
काफी ज्यादा तेजी से नीचे उतरने पर विमान और उसके यात्रियों को एयरोडायनेमिक और स्ट्रक्चरल स्ट्रेस का अनुभव हो सकता है. सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब पायलट विमान की रफ्तार, रुख या फिर ट्रांजैक्ट्री को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं.
यही वजह है कि 37000 फीट से नीचे उतरना अपने आप में एक दुर्घटना का सबूत नहीं है. आपातकालीन स्थिति में पायलट जानबूझकर सुरक्षित ऊंचाई पर तेजी से उतर सकते हैं.
यह भी पढ़ें: अक्टूबर में भी 35 डिग्री तापमान, क्या है इतनी गर्मी होने की वजह?





















