भारत में कैसे खत्म हुआ था मुगल काल, कौन जीता था आखिरी मुगल युद्ध?
Mughal Empire: भारत में एक दौर मुगलों का भी रहा है. आइए जानते हैं कि आखिर मुगल काल कैसे खत्म हुआ था. जानें आखिरी मुगल युद्ध किसने जीता था.

- जफर ने आत्मसमर्पण किया, उन्हें रंगून निर्वासित किया गया।
Mughal Empire: मुगल साम्राज्य जिसने तीन शताब्दी से ज्यादा समय तक भारत के बड़े हिस्से पर शासन किया था 1857 के विद्रोह के बाद औपचारिक रूप से खत्म हो गया. आखिरी मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह के प्रतीकात्मक नेता बने.
हालांकि अंत में विद्रोह हार गया और दिल्ली पर दोबारा कब्जा हो गया. इसी के साथ मुगल राजवंश ने अपना बाकी बचा राजनीतिक अधिकार खो दिया.
मुगल साम्राज्य का पतन कैसे हुआ?
1707 में औरंगजेब की मृत्यु के तुरंत बाद मुगल साम्राज्य का पतन शुरू हो गया. एक के बाद एक आने वाले सम्राटों ने बड़े साम्राज्य पर कंट्रोल बनाए रखने के लिए संघर्ष किया. इसी के साथ बढ़ती मराठा शक्ति ने मुगल सत्ता को और भी कमजोर कर दिया.
साम्राज्य को विदेशी शक्तियों के आक्रमणों का भी सामना करना पड़ा. 1739 में नादिर शाह ने दिल्ली पर आक्रमण किया और उसके बाद अहमद शाह अब्दाली ने आक्रमण किया. वक्त के साथ मुगल शासकों का अधिकार दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्र तक ही सीमित हो गया. लाल किला शाही शक्ति का प्रतीकात्मक केंद्र बना रहा. 19वीं शताब्दी तक मुगल सम्राट का देश पर काफी ज्यादा प्रभावी कंट्रोल था. इसी के साथ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी प्रमुख राजनीतिक और सैन्य शक्ति बन गई थी.

बहादुर शाह जफर 1857 के विद्रोह के प्रतीक बने
1857 का विद्रोह मेरठ में भारतीय सैनिकों के बीच शुरू हुआ. 11 मई 1857 को जब विद्रोह दिल्ली पहुंचा तो विद्रोही सैनिक लाल किले में घुस गए और 81 वर्षीय बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित कर दिया.
जफर अपने आजाद सैनिक कमांडर के बजाय विद्रोह का प्रतीकात्मक प्रमुख बन गया. विद्रोह के साथ उनके जुड़ाव ने फिर भी विद्रोह को पुरानी मुगल सत्ता से जोड़ दिया. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बाद में दिल्ली पर दोबारा कब्जा करने के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया.
दिल्ली की घेराबंदी
मुगलों से जुड़ा आखिरी प्रमुख संघर्ष दिल्ली की घेराबंदी थी. यह 8 जून से 21 सितंबर 1857 तक चली. रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 40000 विद्रोही सैनिक दिल्ली में तैनात थे. इसी के साथ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग 9000 सैनिकों के साथ शहर को घेर लिया था. इसमें पंजाब और गोरखा रेजीमेंट के नियमित बल और सैनिक शामिल थे.
लड़ाई तीव्र थी. ब्रिटिश सेना ने तोपखाने और बेहतर सैन्य संचार का इस्तेमाल किया. इसी के साथ ब्रिगेडियर जनरल जॉन निकोलसन ने दिल्ली पर हमले में प्रमुख भूमिका निभाई. ब्रिटिश सेना कश्मीरी गेट से शहर में दाखिल हुई. हालांकि लड़ाई के दौरान निकोलसन मारा गया.
सितंबर तक अंग्रेजों ने दिल्ली पर दोबारा कब्जा कर लिया था. 19 सितंबर 1857 को लाल किला ब्रिटिश सेना के हाथों गिर गया. इससे मुगल सम्राट की बाकी राजनीतिक शक्ति प्रभावी रूप से खत्म हो गई.

बहादुर शाह जफर का आखिरी आत्मसमर्पण
दिल्ली खोने के बाद बहादुर शाह जफर अपनी बेगम जीनत महल के साथ भाग गए. उन्होंने अंत में हुमायूं के मकबरे में शरण ली. ब्रिटिश कप्तान विलियम हॉडसन ने वहां सम्राट का पता लगाया और 21 सितंबर 1857 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. जफर ने यह आश्वासन मिलने के बाद आत्मसमर्पण कर दिया कि उसकी और उसकी बेगम की जान बख्श दी जाएगी.
अगले दिन हॉडसन ने तीन मुगल राजकुमार मिर्जा मुगल, मिर्जा खिज्र सुल्तान और मिर्जा अबू बक्र को गिरफ्तार कर लिया. उन्हें दिल्ली की तरफ ले जाया गया और बाद में खूनी दरवाजे के पास गोली मार दी गई. इससे मुगल उत्तराधिकारी की तत्काल पुरुष रेखा समाप्त हो गई.
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आखिरी मुगल सम्राट का परीक्षण और निर्वासन
बाद में बहादुर शाह जफर पर 1858 में लाल किले में अंग्रेजों द्वारा मुकदमा चलाया गया. उन्हें दोषी पाया गया और रंगून भेज दिया गया. जफर ने अपने जीवन के आखिरी वर्ष निर्वासन में बिताए और 1862 में उनकी मौत हो गई.
मुगल वंश से जुड़े आखिरी संघर्ष को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने जीत लिया. विद्रोहियों की हार और दिल्ली पर दोबारा कब्जा करने से मुगल राजवंश का राजनीतिक शासन खत्म हो गया. 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी के राज को खत्म कर दिया और 1858 में ब्रिटिश क्राउन को अधिकार दे दिया गया.
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