By: ABP News Bureau | Updated at : 04 Oct 2016 03:58 PM (IST)
नई दिल्लीः अबकी त्यौहार घर खरीदना और भी अच्छा लगेगा. क्योंकि रिजर्व बैंक के नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में कमी के बाद आम बैंक कर्ज सस्ता कर सकते हैं.
आऱबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति कमेटी ने एकमत से नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट को 6.5 फीसदी से घटाकर 6.25 फीसदी करने का फैसला किया. ये समीक्षा न केवल उर्जित पटेल, बल्कि समिति के लिए भी पहली थी, और समिति के सभी 6 सदस्यों ने दर घटाने के पक्ष में मत डाला. नीतिगत ब्याज दर की समीक्षा पर फैसला पहली बार मतदान के आधार पर हुआ. इसके पहले गवर्नर अपने बूते पर ब्याज दर में बदलाव का फैसला करते रहे.
एक अच्छी खबर ये है कि भी है कि चूंकि महंगाई दर में और कमी के आसार है, लिहाजा मौद्रिक नीति की दिसम्बर में होने वाली अगली समीक्षा में ब्याज दर में फिर से कटौती देखने को मिले.
नीतिगत ब्याज दर वो दर है जिसपर रिजर्व बैंक 1 से तीन दिनों के लिए बैंकों को कर्ज देते हैं. आम तौर पर नीतिगत ब्याज दर में की गयी कटौती का पूरा-पूरा फायदा आम बैंक ग्राहकों तक नहीं पहुंचाते. पूरा-पूरा फायदा नहीं पहुचाने के पीछे आम बैंकों की ये दलील होती है कि आऱबीआई से पैसे बहुत ही थोड़े समय के लिए मिलते हैं, जबकि बैंक जो जमा जुटाते हैं या कर्ज देते हैं वो लम्बे समये के लिए होता है. दोनों ही मामलों में लेनदारी-देनदारी अलग-अलग है.
एक और बात, कर्ज सस्ता करने के लिए सबसे पहले जरुरी है कि कर्ज देने के लिए दिया जाने वाला पैसा भी सस्ता हो. अब ये मुमकिन नहीं कि तुरंत-तुरंत सस्ता जमा जुटा लिया जाए, उसमें समय लगता है. इन सब कारणों से बैंकों का कहना होता है कि नीतिगत ब्याज दर में की गयी कटौती का एक हिस्सा ही ग्राहकों को देना संभव हो पाता है. यहां ये भी जिक्र करना जरुरी है कि रिजर्व बैंक, बैंकों को ब्याज दर घटाने के लिए निर्देश नहीं दे सकता है, बस सलाह दे सकता है. वहीं बैंकों की एक विशेष समिति (ALCO – Asset Liability Committee) अपनी लेनदारी और देनदारी के आधार पर कर्ज और जमा पर ब्याज दर में फेरबदल पर फैसला करती है.
फिलहाल, अगर हम मान ले कि रिजर्व बैंक की ओर से चौथाई फीसदी की कटौती के बाद घर पर ब्याज दर में 10 बेसिस प्वाइंट यानी फीसदी के दसवे हिस्से के बराबर कटौती की जाती है तो आइए देखे कि आपके लिए घर कर्ज पर ब्याज दर में किस तरह का बदलाव हो सकता है
1. कर्ज की रकम 25 लाख रुपये और मियाद 30 साल हो तो ब्याज की दर 9.3 फीसदी पर ईएमआई 20,658 रुपये होगी ब्याज की दर 9.2 फीसदी पर ईएमआई 20,476 रुपये हो जाएगी अगर मियाद 20 साल की हो तो ईएमआई 22,978 रुपये से घटकर 22,816 रुपये हो जाएगी
2.कर्ज की रकम 50 लाख रुपये और मियाद 30 साल हो तो ब्याज दर यदि 9.3 फीसदी है तो ईएमआई बनती है 41,315 रुपये ब्याज की दर घटकर 9.2 फीसदी हो जाए तो ईएमआई 40,953 रुपये हो जाएगी अगर मियाद 20 साल की हो तो ईएमआई 45,955 रुपये से घटकर 45,631 रुपये हो जाएगी
3.कर्ज की रकम 1 करोड़ रुपये और मियाद 30 साल हो तो ब्याज दर यदि 9.3 फीसदी है तो ईएमआई बनती है 82630 रुपये ब्याज की दर घटकर 9.2 फीसदी हो जाए तो ईएमआई घटकर 81905 रुपये हो जाएगी अगर मियाद 30 साल की हो तो ईएमआई 91911 से घटकर 91263 रुपये हो जाएगी
ध्यान रहे कि ब्याज दर में कमी का फायदा आम तौर पर नए ग्राहकों को ही मिलता है. पुराने ग्राहकों के लिए शायद अच्छी खबर नहीं हो.
सोने की तेजी क्या सिर्फ ट्रेंड या बड़ा बदलाव? ब्रोकरेज फर्म ने बता दिया आगे कैसी रहेगी सोने की चाल, जानें डिटेल
China Japan Tensions: यूएस-ईरान तनाव के बीच खुला एक और फ्रंट, ड्रैगन के सीधे एक्शन ने बढ़ा दी इस देश की टेंशन
शुरुआती तेजी गंवा मामूली बढ़त के साथ बंद बाजार, गिरे RIL-SBI के शेयर, जानें कल कैसी रहेगी मार्केट की चाल
कंपाउंडिंग के जादू से बस इतने रुपये में बन जाएगा 1 करोड़ से ज्यादा का फंड, समझिए पूरा कैलकुलेशन
हवाई यात्रियों के लिए खबर...टूटी सीट और गंदे टॉयलेट पर एयरलाइन कंपनी को कोर्ट से फटकार, लगा 1.50 लाख रुपये का मुआवजा
CM योगी आदित्यनाथ के विदेश दौरे पर अखिलेश यादव बोले, 'यह पहले मुख्यमंत्री हैं जो...'
Rashmika- Vijay Wedding Live: रश्मिका मंदाना-विजय देवरकोंडा की संगीत सेरेमनी की फोटो वायरल, सिल्वर लहंगे में दिखीं दुल्हनिया
श्रीलंका के नाम दर्ज हुआ टी20 वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे 'शर्मनाक' रिकॉर्ड, 19 साल में पहली बार हुआ ऐसा
CPI के दिग्गज नेता के निधन से शोक की लहर, पीएम मोदी ने जताया दुख