By: ABP News Bureau | Updated at : 18 Jul 2016 09:04 AM (IST)
नई दिल्ली: आज से संसद में मानसून सत्र की शुरुआत हो चुकी है और इस सत्र में जीएसटी बिल के पास होने की उम्मीद जताई जा रही है. आज तो लोकसभी स्थगित हो गई लेकिन आने वाले दिनों में एक टैक्स वाले जीएसटी बिल पर लोकसभा में चर्चा होगी. अगर नया बिल लागू होगा तो हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स की जगह एक ही टैक्स लगेगा.
जीएसटी के लागू होते ही केंद्र को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स सब खत्म हो जाएंगे. राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लक्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स, चुंगी वगैरह भी खत्म हो जाएगी. हालांकि पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, रसोई गैस पर अलग-अलग राज्य में जो टैक्स लगते हैं, वो अभी कुछ साल तक जारी रहेंगे.
आम आदमी को जीएसटी से होने वाले 10 फायदे
1. जीएसटी लागू होने पर सबसे ज्यादा फायदा आम आदमी को है. क्योंकि तब चीजें पूरे देश में एक ही रेट पर मिलेंगी, चाहे किसी भी राज्य से खरीदें. रोज़मर्रा के जीवन में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं जैसे कि मोबाइल हैंडसेट, कार, सिगरेट, शराब, आदि गुड्स में शामिल हैं तो गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स लागू होने के बाद इनके दामों में बड़ा बदलाव हो सकता है और पूरे देश में एक समान दरें लागू होंगी.
2. जीएसटी के लागू होने के बाद टैक्स चोरी रुक जायेगी. इसका सीधा असर देश की जीडीपी पर पड़ेगा. फिलहाल भारत देश में 20 तरह के टैक्स लगते हैं और जीएसटी आने के बाद सब टैक्स हटकर एक टैक्स लागू होगा, वो है जीएसटी.
3. आम जनता जो अभी सामान खरीदते वक्त उस पर 30-35% टैक्स के रूप में चुकाते हैं. जीएसटी लागू होने के बाद ये टैक्स घटकर 20-25% रहने की उम्मीद है तो इसका सबसे बड़ा फायदा आम जनता को ही मिलेगा.
4. जीएसटी लागू होने पर कंपनियों का झंझट और खर्च भी कम होगा. व्यापारियों को सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी. अलग-अलग टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा तो सामान बनाने की लागत घटेगी, इससे सामान सस्ता होने की उम्मीद भी है.
5. राज्यों को डर ये था कि उनकी कमाई कम हो जाएगी. खासकर पेट्रोल डीजल से तो कई राज्यों का आधा बजट चलता है. तो वो राहत केंद्र ने राज्यों को दे दी उनपर अभी जो टैक्स राज्य ले रहे हैं, वो शुरुआती बरसों में लेते रहें. और राज्यों का जो नुकसान होगा उसकी भरपाई पांच साल तक केंद्र सरकार करेगी. इसके अलावा जीएसटी से जो टैक्स मिलेगा, वो केंद्र और राज्य में एक तय हिसाब से बंटेगा.
6. उदाहरण के लिए दिल्ली से सटे नोएडा, गुड़गांव वाले जो कभी गाड़ी यूपी से लेते हैं, कभी हरियाणा या कभी दिल्ली से, जहां भी सस्ती मिल जाए वहां से लेते हैं तो जीएसटी आने के बाद ऐसी कोई बंदिश नहीं रहेगी.
7. फिलहाल देश में गुड्स और सर्विसेज टैक्स की दरें अलग-अलग हैं जैसे सर्विस टैक्स 15 फीसदी है और गुड्स यानी वस्तुओं के लिए अलग-अलग राज्य में अलग दरें लागू होती हैं जो जीएसटी आने के बाद एक जैसी हो जाएगी.
8. जीएसटी लागू होते ही केंद्र को मिलने वाली एक्साइड ड्यूटी, सर्विस टैक्स सब खत्म हो जाएंगे. राज्य सरकार द्वारा लिए जाने वाला वैट, एंटरटेनमेंट टैक्स, लग्जरी टैक्स लॉटरी टैक्स एंट्री टैक्स, चुंगी आदि सभी तरह के स्टेट टैक्स खत्म हो जाएंगे.
9. जीएसटी लागू होने के बाद कंपनियों का खर्चा और लागत कम होंगे क्योंकि सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी. कंपनियों को अलग-अलग टैक्स ना चुकाने की वजह से उनकी लागत कम होगी लिहाजा सामान सस्ते होंगे.
10. जीएसटी आने के बाद टैक्स ढांचा एकदम समान होगा और पूरी तरह पारदर्शी होगा जिससे टैक्स विवाद नहीं होंगे और ढेरों टैक्स कानून और टैक्स नियामकों (रेगुलेटरों) का झंझट नहीं रहेगा. इससे एक ही संस्था, कंपनी, व्यक्ति पर कई बार टैक्स लगाने की दिक्कत खत्म हो जाएगी. कुल मिलाकर आम आदमी, कारोबारियों और सरकारों की जिंदगी बेहद आसान हो जाएगी.
11. साल 2014 में पास संविधान के 122वें संशोधन के मुताबिक जीएसटी सभी तरह की सेवाओं और वस्तुओं/उत्पादों पर लागू होगा. सिर्फ अल्कोहल यानी शराब इस टैक्स से बाहर होगी.
जीएसटी का इतिहास इससे पहले, जीएसटी विधेयक को 2011 में लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही विधेयक निरस्त हो गया. इससे नई सरकार को नया विधेयक लाना पड़ा है. सर्वप्रथम 2006-07 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने जीएसटी का विचार आगे बढ़ाया था. शुरू में इसे एक अप्रैल 2010 को लागू किया जाने का प्रस्ताव था लेकिन फिलहाल ये तारीख आगे खिसक चुकी है. इस मानसून सत्र में जीएसटी बिल पास होने की उम्मीद है और अगर ऐसा हो जाता है तो देश के टैक्स ढांचे में आमूलचूल बदलाव आएगा जो अर्थव्यवस्था के लिए आखिरकार फायदेमंद साबित होगा.
प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्ष से अपील की है कि देशहित के लिए इस बार के मानसून सत्र में जीएसटी पर चर्चा होने दी जाए और बिल पर व्यापक चर्चा के बाद इसे पास होने के बाद इसे पास कराने का रास्ता निकाला जाए.
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