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हर महिला में एक क्वीन है, बस उसे सही मंच चाहिए" — अंकिता सरोहा, संस्थापक एवं निदेशक, मिसेज इंडिया इंटरनेशनल क्वीन

कुछ लोग ब्यूटी पेजेंट करते हैं, लेकिन अंकिता सरोहा का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ ताज पहनाना नहीं, बल्कि महिलाओं की जिंदगी बदलना है.

कुछ लोग ब्यूटी पेजेंट करते हैं, लेकिन अंकिता सरोहा का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ ताज पहनाना नहीं, बल्कि महिलाओं की जिंदगी बदलना है. वर्ष 2020 में शुरू हुई मिसेज इंडिया इंटरनेशनल क्वीन 2026 आज देश और विदेश की विवाहित महिलाओं के लिए ऐसा मंच बन चुका है, जहां खूबसूरती से पहले आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और जीवन के अनुभवों को महत्व दिया जाता है.

प्रश्न: मिसेज इंडिया इंटरनेशनल क्वीन शुरू करने का विचार कैसे आया?

अंकिता सरोहा: वर्ष 2017 में मैंने राष्ट्रीय स्तर पर मिसेज इंडिया का खिताब जीता और 2018 में मलेशिया में आयोजित मिसेज इंटरनेशनल ग्लोबल में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए थर्ड रनर-अप रही. उस सफर ने मुझे महसूस कराया कि एक ब्यूटी पेजेंट किसी महिला की जिंदगी बदल सकता है. मुझे नई पहचान, सम्मान और आत्मविश्वास मिला. तभी मैंने सोचा कि हर विवाहित महिला को ऐसा अवसर मिलना चाहिए. शादी और जिम्मेदारियों के बीच कई महिलाएं अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं. इसी सोच के साथ मिसेज इंडिया इंटरनेशनल क्वीन की शुरुआत हुई. हमारा संदेश है—"मजबूत बनें, आत्मविश्वासी बनें और अपनी पहचान पर गर्व करें."

प्रश्न: आपकी प्रतियोगिता को दूसरे ब्यूटी पेजेंट्स से अलग क्या बनाता है?

अंकिता सरोहा: यह केवल रैंप वॉक या खूबसूरती की प्रतियोगिता नहीं, बल्कि महिलाओं को रोल मॉडल बनाने का मंच है. हमारी सबसे बड़ी पहचान समावेशिता है. यहां लंबाई, वजन या उम्र जैसी कोई बाध्यता नहीं है. विवाहित, तलाकशुदा, अलग रह रही या विधवा—हर महिला का स्वागत है. हमारे लिए व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति सोच सबसे अधिक मायने रखती है.

प्रश्न: विजेताओं के लिए नकद पुरस्कार रखने के पीछे क्या सोच है?

अंकिता सरोहा: हम गर्व से कह सकते हैं कि मिसेज और क्लासिक मिसेज दोनों श्रेणियों के प्रमुख विजेताओं को कुल ₹3.5 लाख की नकद पुरस्कार राशि देकर हम उनके संघर्ष, समर्पण और सफलता का सम्मान करते हैं. हमारे लिए जीत सिर्फ ताज तक सीमित नहीं है.

प्रश्न: छोटे शहरों की महिलाओं के लिए आपका क्या संदेश है?

अंकिता सरोहा: हमारा सपना हमेशा से ऐसा मंच बनाने का रहा है, जहां छोटे कस्बों से लेकर महानगरों तक की हर महिला को अपनी पहचान बनाने का अवसर मिले. इस वर्ष महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और केरल सहित देश और विदेश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ दुबई, सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कतर से भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. महाराष्ट्र की धनाश्री जोशी देशमुख और दुबई की मीरा गढ़िया की जीत इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा किसी शहर या सीमा की मोहताज नहीं होती.

प्रश्न: आपके अनुसार असली विजेता कौन है?

अंकिता सरोहा: हमारे यहां केवल ताज जीतने वाली महिला ही विजेता नहीं होती. जो महिला अपने डर और संकोच पर जीत हासिल कर मंच तक पहुंचती है, वही असली विजेता है. मेरे लिए यहां आने वाली हर प्रतिभागी अपने आप में एक क्वीन और प्रेरणा है.

प्रश्न: प्रतियोगिता में प्रशिक्षण पर इतना जोर क्यों दिया जाता है?

अंकिता सरोहा: क्योंकि असली परीक्षा मंच से उतरने के बाद शुरू होती है. इसलिए हम केवल रैंप वॉक नहीं, बल्कि आत्मरक्षा, वित्तीय साक्षरता, मेडिटेशन, स्किनकेयर, इमेज मैनेजमेंट, कम्युनिकेशन स्किल्स और व्यक्तित्व विकास की ट्रेनिंग भी देते हैं, ताकि हर प्रतिभागी जीवनभर काम आने वाले कौशल लेकर जाए.

प्रश्न: इस वर्ष 21 से 74 वर्ष तक की महिलाओं ने हिस्सा लिया. यह आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है?

अंकिता सरोहा: यह साबित करता है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती. शादी, मातृत्व या बढ़ती उम्र किसी महिला की पहचान तय नहीं करती. इसी सोच के साथ प्रतियोगिता को मिसेज (21–39 वर्ष) और क्लासिक मिसेज (40 वर्ष एवं उससे अधिक) श्रेणियों में आयोजित किया जाता है, ताकि हर आयु वर्ग की महिलाओं को समान अवसर मिल सके.

प्रश्न: इस आयोजन को सफल बनाने में स्पॉन्सर्स, जजों और मेंटर्स की क्या भूमिका रही?

अंकिता सरोहा: यह आयोजन टीमवर्क का परिणाम है. मैं हमारे जजों, मेंटर्स, पार्टनर्स और स्पॉन्सर्स का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं. हमारे पूर्व विजेताओं ने जज के रूप में निष्पक्ष मूल्यांकन किया, जबकि ओराने इंटरनेशनल, जनकपुरी ने ऑफिशियल मेकअप स्पॉन्सर थे. वहीं रिकी वोंग, प्रदीप नेगी, डॉ. सोनल बंसल, राधा राय, महक धींगरा और लवलीन कौर जैसे विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों का आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निखारने में अहम योगदान दिया.

प्रश्न: आगे मिसेज इंडिया इंटरनेशनल क्वीन का विजन क्या है?

अंकिता सरोहा: वर्ष 2020 में हमने केवल 30 प्रतिभागियों के साथ शुरुआत की थी, जो आज बढ़कर 91 हो चुकी हैं. मेरा सपना है कि मिसेज इंडिया इंटरनेशनल क्वीन केवल एक पेजेंट न रहकर महिलाओं के नेतृत्व, उद्यमिता, सामाजिक योगदान और वैश्विक पहचान का सशक्त मंच बने. मैं चाहती हूं कि यहां से निकलने वाली हर महिला अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बने.

डिस्क्लेमर : यह स्पॉन्सर्ड आर्टिकल है. एबीपी नेटवर्क प्रा. लि. और/या एबीपी लाइव इस लेख के कंटेंट या इसमें व्यक्त विचारों का किसी भी रूप में समर्थन या अनुमोदन नहीं करता है. पाठकों से अनुरोध है कि वे अपनी समझ से निर्णय लें.

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