ट्रेन की तरह बस में कहां होता है इमरजेंसी ब्रेक, कैसे करता है काम?
ट्रेन की चेन की तरह अब बसों में भी मिलेगा इमरजेंसी ब्रेक बटन, ड्राइवर के केबिन के पास और पैसेंजर सीट के ऊपर होता है मौजूद, जानिए चलती गाड़ी में यह कैसे रोकता है बड़ा हादसा

जब भी हम ट्रेन में सफर करते हैं, तो हमारे दिमाग में एक बात जरूर आती है कि इसमें एक इमरजेंसी चेन या ब्रेक होता है, जिसे खींचते ही पूरी ट्रेन रुक जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सड़कों पर दौड़ने वाली बड़ी-बड़ी बसों में भी ट्रेन जैसा ही एक खास इमरजेंसी ब्रेक सिस्टम होता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि बस में सिर्फ पैर से दबाने वाला सामान्य ब्रेक ही होता है, लेकिन किसी बड़ी मुसीबत या ब्रेक फेल होने की स्थिति के लिए बसों में एक अलग इमरजेंसी और पार्किंग ब्रेक दिया जाता है. आइए जानते हैं कि बसों में यह लाइ-सेविंग ब्रेक कहां होता है और इसका पूरा सिस्टम कैसे काम करता है.
ड्राइवर के केबिन में कहां होता है यह इमरजेंसी ब्रेक?
बसों में इमरजेंसी ब्रेक या पार्किंग ब्रेक पूरी तरह से ड्राइवर के नियंत्रण में होता है. सामान्य कारों की तरह बसों में बीच मे कोई बड़ा हैंडब्रेक नहीं खींचा जाता. आधुनिक बसों और वॉल्वो जैसी लग्जरी बसों में यह ब्रेक ड्राइवर की सीट के दाईं या बाईं तरफ डैशबोर्ड पर एक छोटे लीवर या बटन के रूप में होता है. कुछ पुरानी या भारी बसों में यह स्टीयरिंग के ठीक नीचे एक स्टिक लीवर के रूप में भी देखने को मिलता है. आपातकाल की स्थिति में बस को पूरी तरह रोकने के लिए ड्राइवर इसी लीवर या बटन का इस्तेमाल करता है.
कैसे काम करता है बस का इमरजेंसी ब्रेक?
बसों में सामान्य कारों की तरह लिक्विड ब्रेक नहीं होता, बल्कि इनमें एयर ब्रेक सिस्टम का इस्तेमाल होता है. इस सिस्टम का काम करने का तरीका सामान्य गाड़ियों से बिल्कुल उल्टा होता है. बस के पिछले पहियों के ब्रेक चैंबर में एक बेहद शक्तिशाली और भारी स्प्रिंग लगी होती है. जब बस चल रही होती है, तो इंजन द्वारा बनाई गई एयर इस भारी स्प्रिंग को पीछे दबाकर रखती है, जिससे पहिए खुलकर घूम पाते हैं.
जब ड्राइवर डैशबोर्ड पर मौजूद इमरजेंसी ब्रेक बटन को दबाता है, तो सिस्टम के अंदर की पूरी हवा झटके से बाहर निकल जाती है. हवा निकलते ही वह शक्तिशाली स्प्रिंग पूरी ताकत से बाहर की तरफ खुलती है और ब्रेक शूज को सीधे पहिए के ड्रम पर चिपका देती है. इससे पहिए पूरी तरह लॉक हो जाते हैं और बस रुक जाती है.
हवा खत्म होने पर खुद लग जाता है ब्रेक
इस सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से फेल-सेफ होता है. मान लीजिए कि किसी तकनीकी खराबी के कारण बस ब्रेक पाइप फट जाएं या हवा का दबाव पूरी तरह खत्म हो जाए, तो ऐसी स्थिति में बस बिना ब्रेक के अनियंत्रित नहीं होगी. जैसे ही हवा का प्रेशर एक तय सीमा से नीचे गिरेगा, पहियों में लगी स्प्रिंग को रोकने वाली ताकत नहीं बचेगी और वह स्प्रिंग अपने आप खुलकर पहियों को जाम कर देगी.
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आजकल की बसों में आ गई है ऑटोमैटिक तकनीक
अब एडवांस बसों में केवल मैन्यूअल बटन ही नहीं, बल्कि ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग तकनीक भी आने लगी है. इसके तहत बस के आगे खास तरह के रडार और कैमरे लगाए जाते हैं. अगर बस के आगे अचानक कोई दूसरी गाड़ी, इंसान या जानवर आ जाता है और ड्राइवर समय पर ब्रेक नहीं लगा पाता, तो बस का कंप्यूटर खुद खतरे को भांप लेता है. ऐसी स्थिति में सिस्टम पहले ड्राइवर को अलर्ट करने के लिए एक अलार्म बजाता है और फिर भी कदम न उठाने पर अपने आप इमरजेंसी ब्रेक अप्लाई कर देता है, जिससे बड़ी दुर्घटना टल जाती है.
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