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पैसा बचाना है तो EV लें या Hybrid? पूरा हिसाब समझें

पैसा बचाने के लिए EV खरीदें या हाइब्रिड कार. जानिए प्रति किलोमीटर रनिंग कॉस्ट, मेंटेनेंस और 5 साल के कुल खर्च का पूरा गणित बेहद ही आसान कैलकुलेशन के साथ.

अब हमारे देश में भी पेट्रोल की कीमत आसमान पर पहुंच गई है. जिसके चलते अब जो भी कई गाड़ी खरीद रहा है वह इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड खरीद रहा है. ऐसा हम नहीं बल्कि हर साल के आकड़ें बता रहे हैं. जिसके चलते आज हम बात करेंगे कि, पैसा बचाने के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ी ली जाए या फिर स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार. दोनों ही कारें पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के मुकाबले जेब पर काफी हल्की पड़ती हैं. लेकिन दोनों की टेक्नोलॉजी, रनिंग कॉस्ट और शुरुआती कीमत में बड़ा अंतर होता है.

क्योंकि, ईवी पूरी तरह से बिजली और बैटरी पर चलती है. जबकि हाइब्रिड कार में पेट्रोल इंजन के साथ एक बैटरी-मोटर सेटअप होता है जो बिना प्लग लगाए गाड़ी चलाते समय खुद ही चार्ज हो जाता है. अगर आपका मुख्य मकसद सिर्फ और सिर्फ पैसे बचाना है तो दोनों के बीच का यह सेलेक्ट आपकी डेली रनिंग पर निर्भर करता है. चलिए 1,000 किलोमीटर प्रति महीने की ड्राइविंग के आधार पर आसान गणित से समझते हैं कि आपके लिए कौन-सी टेक्नोलॉजी सबसे ज्यादा बजट-फ्रेंडली रहेगी.

प्रति किलोमीटर रनिंग कॉस्ट का गणित

बता दें कि, अगर हम गाड़ी के रोजाना के फ्यूल यानी बिजली और पेट्रोल के खर्च की तुलना करें तो EV स्पष्ट रूप से बाजी मार लेती है.

  • EV की रनिंग कॉस्ट: अगर आप घर पर होम चार्जर से अपनी इलेक्ट्रिक कार चार्ज करते हैं तो 1 किलोमीटर चलने का खर्च लगभग 1.20 से 1.50 रुपये तक आता है.
  • स्ट्रांग हाइब्रिड की रनिंग कॉस्ट: जबकि हाइब्रिड कारें शहर और हाईवे मिलाकर लगभग 25 से 28 kmpl का माइलेज देती हैं. 100 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल के हिसाब से इसका 1 किलोमीटर का खर्च लगभग 3.80 से 4.20 रुपये बैठता है.

जिसका मतलब अगर आप हर महीने 1,000 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं तो EV में महीने का खर्च केवल 1,500 रुपये के आसपास आयेगा. जबकि हाइब्रिड में यह खर्च लगभग 4,000 रुपये रहेगा. इस तरह EV हर महीने आपकी 2,500 रुपये की बचत कराती है.

पैसा बचाना है तो EV लें या Hybrid? पूरा हिसाब समझें

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मेंटेनेंस और टैक्स का पूरा कैलकुलेशन

  • टैक्स और सब्सिडी: भारत में EVs पर सिर्फ 5% GST लगता है और कई राज्यों में रोड टैक्स में भी पूरी छूट मिलती है. जबकि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ियों पर पेट्रोल कारों की तरह ही 28% GST और पूरा रोड टैक्स देना पड़ता है. जिससे हाइब्रिड की शुरुआती कीमत थोड़ी महंगी पड़ जाती है.
  • सर्विस और मेंटेनेंस: EV में इंजन, इंजन ऑयल, स्पार्क प्लग या गियरबॉक्स जैसी जटिल चीजें नहीं होतीं. जिससे 5 साल में इसका मेंटेनेंस खर्च बेहद कम रहता है. वहीं हाइब्रिड कार में पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक सिस्टम दोनों होते हैं इसलिए इसकी हर साल रेगुलर सर्विसिंग का खर्च पेट्रोल कार जितना ही आता है.

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कौन है ज्यादा सिरदर्दी?

आज के समय में केवल पैसों का गणित ही सब कुछ नहीं होता आपकी सहूलियत भी बहुत मायने रखती है. EV का सबसे बड़ा फायदा तब है जब आपके पास घर या ऑफिस में पर्सनल पार्किंग और होम चार्जिंग पॉइंट लगाने की जगह हो. अगर आप अक्सर लंबी दूरी या दूर-दराज के इलाकों में हाईवे ट्रैवल करते हैं. तो रास्ते में फास्ट चार्जर ढूंढने और चार्जिंग में 45 से 60 मिनट रुकने का वक्त देना पड़ सकता है.

वहीं, दूसरी तरफ स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार को कभी प्लग लगाकर चार्ज करने की जरूरत ही नहीं पड़ती. आप किसी भी साधारण पेट्रोल पंप पर 2 मिनट में फ्यूल भरवाकर लंबी दूरी तय कर सकते हैं. यानी इसमें आपको बैटरी खत्म होने का डर बिल्कुल नहीं होता है.

आपके लिए कौन-सी कार रहेगी सही?

बता दें कि, अगर आपकी डेली रनिंग 40 से 80 किलोमीटर है और आपके घर पर अपनी कार चार्ज करने की पक्की सुविधा मौजूद है. तो आपके लिए EV ही सबसे ज्यादा पैसा बचाने वाला विकल्प है. 5 साल में EV की कम रनिंग कॉस्ट और सस्ता मेंटेनेंस इसकी शुरुआती कीमत की भरपाई कर देगा.

लेकिन अगर आपकी ड्राइविंग में अक्सर लंबे हाईवे ट्रिप्स शामिल रहते हैं. आपके पास घर पर चार्जर लगाने की जगह नहीं है और आप बिना किसी चार्जिंग टेंशन के 25+ का माइलेज चाहते हैं तो आपके लिए स्ट्रांग हाइब्रिड  ही सबसे समझदारी भरा और प्रैक्टिकल फैसला होगा.

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हिमांशु सिंह पिछले साढ़े तीन साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. फिलहाल वह ABP News में ऑटो बीट पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्टर में उन्हें नई कारों और बाइक्स के लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, फीचर्स, माइलेज, टेक्नोलॉजी और ऑटो मार्केट से जुड़ी खबरों की अच्छी जानकारी है. वह ऑटो से जुड़ी हर जरूरी और नई जानकारी आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के खबरों को समझ सकें.

ABP News से पहले हिमांशु DNP India, Sports Wiki और Hawk E Commerce के साथ काम कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स, राजनीति और वायरल खबरों पर भी काम किया. अलग-अलग बीट्स पर काम करने की वजह से उन्हें कई तरह की खबरों को समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने का अनुभव मिला.

हिमांशु की कोशिश रहती है कि उनकी खबरें सरल, भरोसेमंद और सीधे लोगों से जुड़ी हों. उन्हें ऐसी खबरों पर काम करना पसंद है, जिनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. डिजिटल मीडिया की अच्छी समझ होने की वजह से वह ट्रेंडिंग और जरूरी खबरों को तेजी से पाठकों तक पहुंचाते हैं.

काम के अलावा हिमांशु को क्रिकेट खेलना, स्टैंडअप कॉमेडी करना और नई जगहों पर घूमना पसंद है. उनका मानना है कि नई जगहों को देखना और नए लोगों से मिलना सोच को बेहतर बनाता है, जिसका फायदा उनके काम में भी मिलता है.

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