Aston Martin की पहली EV पर लगा ब्रेक, अब 2033 में होगी एंट्री
एस्टन मार्टिन ने अपनी पहली ऑल-इलेक्ट्रिक कार का लॉन्च 2033 तक टाल दिया है. जानिए कंपनी ने क्यों बदला अपना फैसला और क्यों 2035 तक चलते रहेंगे V8 व V12 पेट्रोल इंजन.

इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड अब पुरे वर्ल्ड में है. जिसके चलते छोटी कंपनियां ही नहीं बल्कि अब लग्जरी कार के लिए मशहूर ऑटोमोबाइल कंपनियां भी इलेक्ट्रिक सेगमेंट में दांव खेल रही हैं. इस बीच ब्रिटेन की मशहूर लग्जरी स्पोर्ट्स कार निर्माता कंपनी एस्टन मार्टिन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. ताजा खबर के मुताबिक कंपनी ने इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में कदम रखने के अपने प्लान को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है. कंपनी ने यह साफ कर दिया है कि उसकी पहली ऑल-इलेक्ट्रिक कार अब 2033 से पहले सड़कों पर देखने को नहीं मिलेगी.
बता दें कि, कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि ग्लोबल मार्केट में ऑल-इलेक्ट्रिक सुपरकारों की मांग फिलहाल काफी सुस्त पड़ी हुई है. ऐसे में कंपनी अपनी रकम और संसाधन उन तकनीकों पर लगाना चाहती है. जिन्हें ग्राहक इस वक्त सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इस फैसले के साथ ही एस्टन मार्टिन अब पारंपरिक पेट्रोल इंजन और हाइब्रिड पावरट्रेन को ज्यादा मजबूत करने पर पूरा फोकस करेगी. चलिए विस्तार से पढ़तें हैं पूरी खबर.
फिर टली पहली ईवी की टाइमलाइन?
आपको बता दें कि, यह पहली बार नहीं है जब एस्टन मार्टिन ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार के लॉन्च को टाला है. सबसे पहले कंपनी इसे 2025 में पेश करने की योजना बना रही थी.
इसके बाद इसे बढ़ाकर 2026 और फिर 2030 किया गया. लेकिन अब नई टाइमलाइन के मुताबिक यह 2033 से 2035 के बीच दस्तक देगी. यानी शुरुआती योजना के मुकाबले कार पूरे एक दशक देरी से आएगी. मांग में कमी और वर्ल्ड लेवल पर ईवी नियमों में हो रहे लगातार बदलाव इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है.

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मिलते रहेंगे V8 और V12 पेट्रोल इंजन
जानकारी दें दे कि, इलेक्ट्रिक कार प्रोजेक्ट में भले ही ब्रेक लग गया हो लेकिन रफ्तार के शौकीनों के लिए एक बहुत अच्छी खबर आई है. कंपनी ने फैसला किया है कि वह अपने मशहूर V8 और V12 पेट्रोल इंजनों का प्रोडक्शन 2035 तक जारी रखेगी.
एस्टन मार्टिन कंपनी का मानना है कि जब तक नियम इजाजत देंगे तब तक ग्राहक इन शक्तिशाली पेट्रोल इंजनों वाली कारों को खूब पसंद करेंगे. आने वाले सालों में कंपनी अपने मौजूदा पेट्रोल मॉडल्स को और ज्यादा पावरफुल अवतार में पेश करती रहेगी.

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प्लग-इन हाइब्रिड से दूरी
बता दें कि, कंपनी अपने वाहनों में हाइब्रिड तकनीक का इस्तेमाल जरूर करेगी. लेकिन प्लग-इन हाइब्रिड सिस्टम से दूरी बनाकर रखेगी. इसका सबसे बड़ा कारण कार का बढ़ता हुआ वजन है.
क्योंकि, प्लग-इन हाइब्रिड सेटअप लगाने से गाड़ी में करीब 200 किलोग्राम तक अतिरिक्त वजन जुड़ जाता है. स्पोर्ट्स कारों के लिए इतना ज्यादा वजन उसकी परफॉर्मेंस, हैंडलिंग और कॉर्नरिंग एबिलिटी को काफी हद तक प्रभावित करता है जिसे कंपनी बिल्कुल स्वीकार नहीं करना चाहती.
रिसर्च पर रहेगा ज्यादा ध्यान
रिपोर्ट्स के मुताबिक लॉन्च डेट भले टल गया हो लेकिन कंपनी ईवी टेक्नोलॉजी पर रिसर्च जारी रखेगी. इससे पहले 2019 में कंपनी ने रैपिड ई नाम से एक इलेक्ट्रिक कार दिखाई थी. जिसे बाद में केवल टेक्नोलॉजी समझने के लिए इस्तेमाल किया गया.
जबकि इसके अलावा एस्टन मार्टिन अपने वलहैला हाइपरकार प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रही है. कंपनी का टारगेट 2030 से 2035 के बीच अपने पूरे मॉडल लाइन-अप को नए और आधुनिक फीचर्स के साथ अपडेट करना है ताकि सही समय पर एक शानदार ईवी लाई जा सके.
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