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5 एकड़ में लगाएं ये पौधा, पहले साल में होगी इतने लाख की कमाई

कम लागत में लाखों कमाना चाहते हैं तो खेत में लगा दीजिए यह फसल पहले ही साल में इसकी खेती बदल देगी आपकी किस्मत. 5 एकड़ जमीन से कितनी कमाई होगी जान लीजिए इसका गणित क्या है?

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  • किसानों के लिए सहजन की खेती में कम लागत में ज्यादा कमाई.
  • कम पानी, कम रखरखाव में सहजन की खेती करना काफी आसान.
  • पहले साल 5 एकड़ सहजन से 15-20 लाख मुनाफा.

पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, धान और गन्ने की खेती में आज के दौर में लागत लगातार बढ़ रही है और मुनाफा उतना ज्यादा नहीं रहा है. मौसम की मार और मंडी के उतार-चढ़ाव से परेशान किसान अब ऐसी फसलों की तलाश में हैं. जहां कम लागत में अच्छा रिटर्न मिल सके. अगर आपके पास 5 एकड़ जमीन है और आप कुछ ऐसा ट्राई करना चाहते हैं. जो बहुत कम समय में आपको लखपति बना दें तो फिर सहजन यानी मोरिंगा की खेती आपके लिए बेस्ट साबित हो सकती है. 

इसे बहुत से लोग सुपरफूड भी कहते है क्योंकि इसकी जड़ से लेकर पत्तियां और फलियां तक बाजार में हाथों-हाथ बिकती हैं. आयुर्वेद, हेल्थ सप्लीमेंट्स और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में मोरिंगा की भारी डिमांड के चलते इसका मार्केट साइज तेजी से फैल रहा है. इसकी खेती में बढ़िया बात यह है कि इसकी खेती में रोज-रोज देखरेख की जरूरत नहीं होती और पहले ही साल से यह तगड़ी कमाई देने लग जाता है. जान लीजिए कैसे इससे कमा सकते हैं लाखों.

बुवाई का सही तरीका 

बड़े लेवल पर सहजन की खेती शुरू करने के लिए सही किस्म चुनना सबसे जरूरी है. बाजार में पीकेएम-1 और ओडीसी जैसी उन्नत किस्में फलियों और पत्तियों दोनों के बेहतर उत्पादन के लिए सबसे बढ़िया मानी जाती हैं. 5 एकड़ जमीन में पौधे लगाने के लिए कतार से कतार की दूरी लगभग 10 फीट और पौधे से पौधे की दूरी 6 से 7 फीट रखना सबसे बेहतर रहता है. 

इस स्पेसिंग से 5 एकड़ के रकबे में करीब 3000 से 3500 पौधे आराम से लग जाते हैं. इसकी बुवाई का सबसे बेहतरीन समय जुलाई से सितंबर का माना जाता है. मोरिंगा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह किसी भी सामान्य दोमट या बलुई मिट्टी में आसानी से ग्रो कर जाता है. जलभराव वाले खेतों को छोड़कर यह बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर भी बहुत तेजी से बढ़ता है.

बहुत कम लागत और जीरो मेंटेनेंस

सहजन की फसल सूखे को बहुत आसानी से झेल लेती है. धान या गन्ने के मुकाबले इसमें महज 25 से 30 प्रतिशत पानी की ही खपत होती है. ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाकर आप बहुत कम पानी में पूरे 5 एकड़ खेत को हरा-भरा रख सकते हैं. इसके अलावा मोरिंगा के कड़वे प्राकृतिक गुणों की वजह से इसमें आम फसलों की तरह गंभीर कीट या फंगस का अटैक नहीं होता. 

जिससे महंगे कीटनाशकों का भारी-भरकम खर्च पूरी तरह बच जाता है. साल में सिर्फ एक या दो बार हल्की जैविक खाद डालना ही इसके लिए काफी रहता है. जब पौधे 3 से 4 फीट के हो जाएं. तो उनकी ऊपर से हल्की छंटाई  की जाती है. इससे पेड़ सीधा लंबा होने के बजाय चारों तरफ फैलता है. जिससे फलियों और शाखाओं की संख्या दोगुनी हो जाती है.


5 एकड़ में लगाएं ये पौधा, पहले साल में होगी इतने लाख की कमाई

यह भी पढ़ें: कौन-सा राज्य किसानों पर सबसे ज्यादा करता है खर्च? यहां जान लें

पहले साल में ही इतनी कमाई 

मोरिंगा की ग्रोथ काफी तेजी से होती है. रोपाई के महज 8 से 9 महीने के भीतर पेड़ों पर फलियां लदने लगती हैं. पहले साल में हर एक पौधे से एवरेज 15 से 20 किलो हरी फलियां आसानी से मिल जाती हैं. 5 एकड़ में लगे लगभग 3200 पौधों से पहले ही सीजन में करीब 50000 से 60000 किलो का कुल उत्पादन निकलता है. थोक मंडी में सहजन की फलियां आमतौर पर 30 से 50 रुपये प्रति किलो के औसत भाव पर बिकती हैं. अगर ऑफ-सीजन में माल निकलता है. 


5 एकड़ में लगाएं ये पौधा, पहले साल में होगी इतने लाख की कमाई

तो यही रेट 80 से 100 रुपये किलो तक चला जाता है. इसके साथ ही पत्तियों को सुखाकर उसका पाउडर बनाकर बेचना एक अलग से हाई-मार्जिन बिजनेस है. शुरुआती बीज, खाद और रोपाई का सारा खर्च निकालकर किसान 5 एकड़ से पहले ही साल 15 से 20 लाख रुपये का नेट प्रॉफिट बड़े आराम से बना सकते हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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