एक्सप्लोरर
गोरखपुर: पैतृक गांव मामखोर पहुंचे रविकिशन, माथा टेक कर लिया जीत का आशीर्वाद
1/6

बीजेपी प्रत्याशी रविकिशन के पैतृक गांव पहुंचते ही उनका जोरदार स्वागत हुआ. सबसे पहले उन्होंने गांव का चक्कर लगाया और सभी गांव के लोगों से मिलकर जीत का आशीर्वाद लिया. इस बीच वे लोगों से ये बताना नहीं भूले कि वे भी यहीं के रहने वाले हैं. उनके पूर्वज यहां से बाहर चले गए थे. लेकिन, आज उनका बेटा गांव में वापस उनकी सेवा करने के लिए आया है.
2/6

इस दौरान उनके साथ गांव के लोग भी मौजूद रहे. रविकिशन गांव में जहां भी जाते भीड़ उनके पीछे-पीछे हो लेती. रविकिशन खुद भी लोगों को लगातार उनके बीच का होने का अहसास कराते रहे. इस दौरान लोगों ने उनके साथ सेल्फी भी खिंचावाई. रविकिशन ने लोगों से कहा कि उनके वापस आने से विरोधी घबरा गए हैं. उनकी जमानत जब्त होने वाली है. यही वजह है कि उन्हें बाहर का कहकर संबोधित किया जा रहा है. लेकिन, अब वे गांव और गोरखपुर की सेवा के लिए वापस लौटे हैं. उन्हें यहां के लोगों के लिए काफी कुछ करना है.
3/6

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर से बीजेपी ने फिल्म अभिनेता रविकिशन को जबसे प्रत्याशी बनाया है, तभी से विपक्षी पार्टियां उन्हें बाहरी कहकर तंज कस रही हैं. रविकिशन भी सादगी के साथ लोगों को सफाई देते हैं कि वे भी यहीं के रहने वाले हैं.
4/6

लगातार हो रहे सवालों के बीच वे पहुंचे चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के मामखोर गांव जहां से इनके पूर्वज जौनपुर जाकर बस गए थे. यहां पर उन्होंने गांव की माटी पर शीश नवाकर खुद को धन्य किया और दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद भी लिया.
5/6

बीजेपी प्रत्याशी रविकिशन का मुकाबला गठबंधन से सपा प्रत्याशी रामभुआल निषाद के साथ है. वहीं कांग्रेस से मधुसूदन त्रिपाठी भी लगातार जनसंपर्क कर अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगे हैं. ऐसे में विपक्षी पार्टियां लगातार ये कहती चली आ रही है कि इस बार लड़ाई बाहरी बनाम घर की है.
6/6

गोरखपुर की जनता ने तय कर लिया है कि उसे किसे वोट करना है. वहीं उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी के प्रत्याशी रविकिशन के लिए ये चुनाव चुनौती की तरह है. वे सुबह 5 बजे से देर रात 12 बजे तक जनसंपर्क कर रहे हैं. ऐसे में गोरखपुर और मामखोर की जनता उन्हें आशीर्वाद देती है कि नहीं, ये तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा.
Published at : 12 May 2019 02:38 PM (IST)
View More
Source: IOCL





















