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OpenAI का गणित में तहलका, 700 सवाल सॉल्व करने के बाद भड़के मैथमैटीशियन

AI की दुनिया से जुड़ा एक दिलचस्प मामला सामने आया है. OpenAI के एडवांस AI मॉडल ने हाल ही में गणित के 700 से ज्यादा कठिन सवाल हल कर दिए हैं. जिससे गणितज्ञों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

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  • OpenAI के AI मॉडल ने 700 से अधिक गणित समस्याएँ हल कीं।
  • द एसोसिएशन फॉर ह्यूमन मैथमैटिक्स ने कंपनी का बहिष्कार किया।
  • गणितज्ञों ने इसे इंसानी शोध और नैतिकता के खिलाफ बताया।
  • विशेषज्ञ AI से संभावित बेरोज़गारी और असमानता को लेकर चिंतित।

Artifical Intelligence ने इस वक्त दुनिया भर में लोगों के कामों को बहुत आसान कर दिया है. लेकिन एक और जहां इससे लोगों के काम आसान हुए हैं. वहीं लोगों के लिए कुछ ऐसे खतरे भी पैदा हो गए है जो कि आगे चलकर बहुत मुश्किल खड़ी कर सकते हैं. OpenAI ने हाल ही में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिससे दुनियाभर के Mathematicians की नींद उड़ गई है.

OpenAI कंपनी के एक एडवांस्ड AI मॉडल ने अकेले दम पर Maths के 700 से ज्यादा मुश्किल सवाल और 377 क्रिटिकल समस्याओं को हल कर दिया है. जैसे ही यह खबर सामने आई दुनिया भर के Mathematicians में खलबली मच गई. इस खबर के बाद द एसोसिएशन फॉर ह्यूमन मैथमैटिक्स ने खुलकर OpenAI के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और वैज्ञानिकों और रिसर्चरों से इस कंपनी का बायकॉट करने की अपील तक कर डाली है. जान लीजिए पूरी खबर.

Mathematicians ने क्यों किया बायकॉट का ऐलान?

OpenAI के AI मॉडल के Maths के 700 से ज्यादा सवाल हल करने वाली खबर जब सोशल मीडिया पर आई तो Maths के हल्कों में इस खबर को बहुत अच्छे से नहीं लिया गया. इस खुलासे के बाद Mathematicians में भारी गुस्सा देखा जा रहा है. इस मामले पर द एसोसिएशन फॉर ह्यूमन मैथमैटिक्स का कहना है कि किसी ने भी OpenAI से इस तरह के खतरनाक और बड़े पैमाने पर Research करने के लिए नहीं कहा था. 

आरोप लगाया जा रहा है कि कंपनी ने बिना किसी की अनुमति और मांग के चुपचाप Maths के ऐसे मुश्किल सवालों पर काम किया. जानकारों का मानना है कि AI मॉडल जब इस तरह के बड़े और अनसुलझे Maths रहस्यों को खुद ही सुलझाने लगेंगे तो इंसानी रिसर्च और स्कॉलरशिप की क्या अहमियत रह जाएगी. इसे रिसर्च की ट्रांसपेरेंसी के खिलाफ एक बड़ा खतरा माना जा रहा है.


OpenAI का गणित में तहलका, 700 सवाल सॉल्व करने के बाद भड़के मैथमैटीशियन

ताकत का प्रदर्शन या वैज्ञानिक रिसर्च?

इस मामले में विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि OpenAI ने अचानक से 700 से ज्यादा फाइलें और डेटा रिपॉजिटरी एक साथ इंटरनेट पर जारी कर दी हैं. Mathematicians का कहना है कि यह किसी जेन्युइन एकेडमिक रिसर्च या स्कॉलरशिप का नमूना नहीं है. बल्कि टेक सेक्टर में अपनी धाक और पावर दिखाने का एक तरीका भर है.

पिछले महीने ही OpenAI ने दावा किया था कि उसके एक मॉडल ने Navier-Stokes Millennium Prize Problem जैसी दुनिया की सबसे कठिन और अनसुलझी Maths पहेली को सुलझा लिया है. जानकारों का मानना है कि कंपनियां वैज्ञानिक नियमों और नैतिकता को ताक पर रखकर अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही हैं.

यह भी पढ़ें: चश्मे से ही हो जाएगी UPI पेमेंट, Jio लाया AI स्मार्टग्लास

क्या AI बना देगा रिसर्चरों को बेरोजगार?

आपको बता दें इस पूरे विवाद के पीछे एक और बड़ा डर सामने है. Maths के जानकारों का कहना है कि अगर AI सिस्टम खुद ही ऐसे कठिन तर्क और प्रूफ तैयार करने लगे जिन्हें इंसान समझ ही न पाए तो पूरी रिसर्च कम्युनिटी पर इसका बुरा असर पड़ेगा. इसके अलावा सबसे बड़ा खतरा यह है कि इस तरह के सुपर-पावरफुल AI मॉडल्स पर सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों का अधिकार रहेगा.

जिससे आम वैज्ञानिकों और रिसर्चरों के बीच एक असमानता पैदा हो जाएगी. फिलहाल OpenAI का दावा है कि उसने इस काम में सलाहकारों की मदद ली है. लेकिन Mathematicians का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है.


OpenAI का गणित में तहलका, 700 सवाल सॉल्व करने के बाद भड़के मैथमैटीशियन

यह भी पढ़ें: CJP प्रोटेस्ट के बीच सोशल मीडिया पर सख्ती, सरकार ने जारी की एडवाइजरी

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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