मेमोरी चिप की कमी से फोन इंडस्ट्री सुस्त, शिपमेंट में गिरावट; जानें वजह
AI की बढ़ती मांग का असर अब स्मार्टफोन बाजार पर भी दिखने लगा है. मेमोरी चिप की कमी और बढ़ती कीमतों से फोन कंपनियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. जानिए इस गिरावट की बड़ी वजहें और इसका क्या असर पड़ेगा.

- बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता अब पुराने फोन अधिक चला रहे.
स्मार्टफोन बाजार में इस बार तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आ रही है. जहां एक तरफ AI टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ इसका असर आम लोगों के हाथ में मौजूद स्मार्टफोन तक पहुंचने लगा है. मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में कमी ने मोबाइल कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इसका असर अब फोन की कीमतों, कंपनियों की नई योजना और बाजार में उपलब्ध डिवाइस की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है. एक रिपोर्ट के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान दुनियाभर में स्मार्टफोन शिपमेंट में 15 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. ऐसे में आइए जानते हैं कि इसकी वजह क्या है.
शिपमेंट में गिरावट की वजह क्या है?
स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतें और उनकी कमी है. AI टेक्नोलॉजी के लिए डेटा सेंटर बनाने का काम तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मेमोरी चिप की मांग बढ़ गई है. ऐसे में स्मार्टफोन कंपनियों को जरूरत के मुताबिक कंपोनेंट नहीं मिल पा रहे हैं और फोन बनाने की लागत भी बढ़ रही है. इस वजह से कंपनियां प्रोडक्शन कम कर रही हैं और स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ा रही हैं. वहीं महंगे फोन खरीदने से बचने के लिए यूजर्स अपने पुराने डिवाइस ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे बाजार में नए स्मार्टफोन की मांग और शिपमेंट दोनों पर असर पड़ रहा है.
किन कंपनियों के शिपमेंट में आई सबसे ज्यादा गिरावट?
इस गिरावट का असर अलग-अलग स्मार्टफोन ब्रांड पर भी देखने को मिला है. Oppo और Vivo के शिपमेंट में सालाना आधार पर ज्यादा की कमी दर्ज की गई. वहीं Xiaomi के शिपमेंट में गिरावट और ज्याद रही है. Xiaomi की बाजार हिस्सेदारी घटकर 10 पर्सेंट पर आ गई. कंपनी ने कम कीमत वाले स्मार्टफोन और कुछ विदेशी बाजारों में अपनी हिस्सेदारी को लेकर ज्यादा सतर्क रुख अपनाया, जिससे बढ़ती लागत के बीच मुनाफे पर ज्यादा दबाव न पड़े. ऐसे में अब कंपनियां सिर्फ ज्यादा फोन बेचने की जगह अपने कारोबार को मुनाफे के हिसाब से बैलेंस करने पर भी जोर दे रही हैं.
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स्मार्टफोन बाजार में इन दो ब्रांड ने बनाई अपनी पकड़
स्मार्टफोन बाजार में सुस्ती के बाद भी Samsung और Apple जैसे बड़े ब्रांड अपनी पकड़ बनाए हुए हैं. Samsung को अपने फोल्डेबल फोन की मांग और मिड-रेंज स्मार्टफोन के लिए कंपोनेंट आसानी से उपलब्ध होने का फायदा मिला है. वहीं Apple के कारोबार पर नए iPhone मॉडल की लॉन्चिंग और उनकी बाजार में उपलब्धता का असर पड़ा है. इस बार नई सीरीज में बेस मॉडल शामिल नहीं होने के कारण लॉन्च के शुरुआती दौर में फोन की सप्लाई पिछले साल के मुकाबले सीमित रही, हालांकि मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों और सप्लाई से जुड़ी समस्याओं का असर इन कंपनियों पर भी देखने को मिल रहा है.
महंगे फोन से बदला यूजर्स का खरीदारी का तरीका
स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ने से यूजर्स नया फोन खरीदने की जगह अपने पुराने डिवाइस को लंबे समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं. कुछ लोग कम खर्च में फोन खरीदने के लिए रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन का ऑप्शन भी चुन रहे हैं.
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