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पंजाब: HC चीफ जस्टिस पर विवाद, भगवंत सरकार का फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित

पंजाब मंत्रिमंडल ने केंद्र के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर नियुक्ति और शपथ ग्रहण रोकने की मांग की है. वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने राज्य सरकार के विरोध को अनावश्यक बताया है.

पंजाब में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच टकराव बढ़ गया है. पंजाब मंत्रिमंडल ने रविवार (6 सितंबर) शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई आपात बैठक में केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया. मामला न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा की पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति से जुड़ा है.

पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य सरकार की राय का इंतजार किए बिना केंद्र ने नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी. राज्य सरकार ने इसे संवैधानिक नियमों और तय प्रक्रिया को दरकिनार करने वाला कदम बताया है.

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भगवंत मान ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अलग-अलग पत्र लिखे हैं. उन्होंने दोनों से अपील की है कि जब तक पंजाब सरकार की चिंताओं का उचित समाधान नहीं हो जाता, तब तक न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को सोमवार को पद की शपथ दिलाने की प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए.

मान सरकार ने साफ कहा है कि नियुक्ति से पहले राज्य सरकार की राय लेना जरूरी था. सरकार का दावा है कि इस मामले में केंद्र ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया.

केंद्र की ओर से क्या कहा गया?

वहीं, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब सरकार के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह अनावश्यक बताया. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के पास अपनी राय देने के लिए पर्याप्त समय था.

जैन के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को आठ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश की थी. पंजाब को छोड़कर बाकी सभी संबंधित राज्य सरकारों ने एक सप्ताह के भीतर अपनी राय भेज दी थी.

जैन ने एक बयान में कहा, “किसी को भी न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने और गैर-राजनीतिक मुद्दे का राजनीतिकरण करने के उद्देश्य से प्रस्ताव को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने का अधिकार नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में राज्य सरकारों के पास वीटो का अधिकार नहीं होता.

शनिवार को जारी हुई नियुक्ति की अधिसूचना

केंद्र सरकार ने शनिवार को न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा की पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की. यह अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के करीब एक महीने बाद जारी हुई.

न्यायमूर्ति मिश्रा जून से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर काम कर रहे हैं. अब सोमवार को राज्यपाल की ओर से उन्हें मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ दिलाई जानी है. इसी शपथ ग्रहण समारोह से कुछ घंटे पहले पंजाब सरकार ने आपात बैठक बुलाकर केंद्र के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए.

पंजाब सरकार के आधिकारिक बयान में कहा गया कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं तबादले से जुड़ी प्रक्रिया के मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के पैरा 6 में राज्य सरकार की राय लेने का प्रावधान है.

सरकार के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश मिलने के बाद केंद्रीय कानून, न्याय एवं कंपनी मामलों के मंत्री संबंधित राज्य सरकार की राय प्राप्त करेंगे. इसके बाद केंद्रीय कानून मंत्री प्रस्ताव प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे और प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को नियुक्ति के संबंध में सलाह देंगे.

पंजाब सरकार के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी.

इसके बाद 12 अगस्त को पंजाब सरकार को केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की ओर से पत्र मिला था. इस पत्र के जरिए मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के पैरा 6 के तहत राज्य सरकार की सहमति मांगी गई थी.

राय देने की कोई तय समय-सीमा नहीं- राज्य सरकार 

पंजाब सरकार का कहना है कि मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के मामले में राज्य सरकार और राज्यपाल की ओर से अपनी राय भेजने के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं है. ऐसे में सरकार का आरोप है कि उसके जवाब का इंतजार किए बिना ही केंद्र ने नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी. सरकार ने कहा कि यह कदम मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर और स्थापित संवैधानिक नियमों की अनदेखी है.

पंजाब मंत्रिमंडल ने अपने प्रस्ताव में “केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के संवैधानिक अधिकारों और स्थापित प्रक्रिया को दरकिनार करने के एक और मामले” की कड़ी निंदा की.

पंजाब के अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं- भगवंत मान

बैठक के बाद भगवंत मान ने पंजाबी में एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पंजाब मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के अधिकारों पर लगातार किए जा रहे हमले और संवैधानिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सर्वसम्मति से महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है.

मान ने कहा कि राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करना निर्धारित प्रक्रिया (मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर) और संवैधानिक नियमों का सीधा उल्लंघन है.

मान ने अपने पत्रों में केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले भी केंद्र ने पंजाब के 9,000 करोड़ रुपये के ग्रामीण विकास फंड (RDF) और बाढ़ राहत पैकेज को रोका, BBMB के नियमों में बदलाव किया और अब न्यायिक नियुक्तियों में सीधे हस्तक्षेप को भी स्वीकार नहीं किया जाएगा.

उन्होंने कहा, “हम मांग करते हैं कि इस नियुक्ति को तुरंत रोक दिया जाए और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्य के विचारों को उचित सम्मान दिया जाए.”

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सोमवार के शपथ ग्रहण पर टिकी नजर

इस पूरे विवाद के बीच अब सबकी नजर सोमवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर है. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री भगवंत मान समारोह में शामिल नहीं हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि वह दिल्ली रवाना हो रहे हैं, जहां वह मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जेल में बंद पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा से मुलाकात कर सकते हैं.

फिलहाल पंजाब सरकार नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग कर रही है, जबकि केंद्र की ओर से कहा गया है कि राज्य सरकार के पास अपनी राय देने के लिए पर्याप्त समय था और ऐसी नियुक्तियों में राज्य सरकार को वीटो का अधिकार नहीं है. ऐसे में सोमवार को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह इस संवैधानिक विवाद में अगला बड़ा घटनाक्रम हो सकता है.

About the author पंकज यादव

पंकज यादव, ABP News में स्टेट कंसल्टेंट्स टीम में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब 10 वर्षों का अनुभव हैं. अपने पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने Live Today News Channel, Inshorts News App और Dainik Bhaskar Digital जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता, न्यूज राइटिंग और वीडियो प्रोडक्शन से जुड़े अनुभव हासिल किए.

पंकज की प्रमुख पत्रकारिता रुचि राजनीति, सरकार और प्रशासन, उत्तर प्रदेश से जुड़े राजनीतिक मुद्दों, खेल और फीचर लेखन में रही है. उन्हें राजनीतिक घटनाक्रमों और सामाजिक विषयों को समझने और उन्हें सरल और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में विशेष रुचि है. लखनऊ और उत्तर प्रदेश से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर भी उन्होंने काम किया है.

पंकज ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद उन्होंने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (BBAU) से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. पंकज से पत्रकारिता और पेशेवर संपर्क के लिए उनके X प्रोफाइल @pankajyadav1520 के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है.

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