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क्या लोकसभा चुनाव 2024 बीजेपी सिर्फ पीएम मोदी के भरोसे जीत पाएगी?

अब तक बीजेपी मोदी फैक्टर से चुनाव जीतती आई है लेकिन कर्नाटक में मोदी का मैजिक नहीं चल पाया, क्या लोकसभा चुनाव में ये जादू बरकरार रहेगा?

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार ने कांग्रेस पार्टी में जान फूंक दी है. कांग्रेस के अलावा तमाम दूसरी पार्टियां भी उत्साहित नजर आ रही हैं. कर्नाटक में एक ऐसी पार्टी को हार मिली है जो पूरी तरह से ब्रांड मोदी पर निर्भर थी.

ऐसे में ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या ब्रांड मोदी लड़खड़ाता हुआ नजर आ रहा है? अगर इस सवाल का जवाब हां है तो इसका  असर 2024 के लोकसभा चुनाव पर कितना पड़ेगा?

2022 में मोदी का जादू न केवल गुजरात में दिखा, बल्कि साल के शुरुआत में बीजेपी ने लगातार दूसरी बार सत्ता बरकरार रखते हुए उत्तर प्रदेश में भी इतिहास रचा था. 

साल 2022 में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए और इन चुनावी नतीजों में बीजेपी एक साथ चार राज्यों में अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही. यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार दोबारा से सत्ता में आई. गुजरात में भी बीजेपी ने सरकार बनाई.

उत्तराखंड में भी बीजेपी की वापसी हुई, पंजाब में केजरीवाल की पार्टी ने कांग्रेस और बीजेपी का सफाया कर दिया. गोवा और मणिपुर में भी मोदी मैजिक चला और बीजेपी सत्ता में लौट आई.

साल 2022 चार राज्यों के चुनावों में बीजेपी की जीत के लिए जाना गया लेकिन 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव ने तस्वीर बदल दी. ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी का जादू चल पाएगा या नहीं ? 

क्या 2024 के लोकसभा चुनावों में भी मोदी का जादू चल पाएगा ? 

इस सवाल पर पत्रकार हिमांशु शेखर ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कहा, 'ये कहना कि मोदी मैजिक खत्म हो रहा बहुत जल्दबाजी होगी. कर्नाटक या साउथ इंडिया में बीजेपी का ज्यादा समर्थन नहीं रहा है.

मोदी मैजिक का असर भी दक्षिण भारत में कभी बहुत ज्यादा नहीं रहा है. साथ ही विधानसभा चुनाव ज्यादातर लोकल मुद्दों पर लड़े जाते हैं न कि नेशनल मुद्दों पर. जब से मोदी ने केन्द्र की सत्ता संभाली है तब से लोकसभा चुनावों का पैटर्न विधानसभा चुनावों के वोटिंग पैटर्न से अलग रहा है. 

शेखर आगे कहते हैं- राजस्थान 2018 विधानसभा में कांग्रेस जीत कर आई थी लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों में पूरी 25 सीटें बीजेपी का खाते में आ गई. ऐसे में ये कहना जल्दबाजी होगी कि कर्नाटक नतीजों के बाद मोदी मैजिक पर कोई असर पड़ने वाला है.

अभी ये कहा जा सकता है कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों के बाद कर्नाटक में लोकसभा चुनावों में बीजेपी की सीटों पर थोड़ी कमी आए.  

क्या सिर्फ मोदी की वजह से चुनाव जीत जाएगी बीजेपी? 

यूपी और बिहार की सीटें मिलाकर 120 सीटें होती हैं, लेकिन 120 सीटों के अलावा भी राजस्थान की 25 सीटें, छत्तीसगढ़ की 11 सीटें महाराष्ट्र की 42 सीटें हैं.

इन सभी सीटों पर सिर्फ मोदी  फैक्टर काम नहीं कर रहा है. उड़ीसा की भी कुछ सीटों पर मोदी फैक्टर काम नहीं कर रहा है. अभी हिमाचल प्रदेश, पंजाब और कर्नाटक में भी बीजेपी हार गई. महाराष्ट्र में भी बीजेपी के पास साफ बहुमत नहीं है. 

2014 में मोदी लहर आई जरूर थी लेकिन जीत के पीछे यूपीए सरकार के अनगिनत भ्रष्टाचार के मामले भी थे. पीएम मोदी एक ब्रान्ड जरूर हैं, और बीजेपी तीन फैक्टर पर चुनाव लड़ती है, पहला हिन्दुत्व, राष्ट्रवाद, और तीसरा लाभार्थी, ब्रैंड मोदी इन तीनों ही चीजों को प्रतिनिधित्व करते हैं. 

मोदी अब तक इन्हीं तीनों मुद्दे पर चुनाव जीतते आए हैं. लेकिन इस बार सवाल ये होगा कि 10 साल में लोगों में केन्द्र सरकार को लेकर कितनी नाराजगी आई हैं. विपक्ष को लेकर जनता का कितना भरोसा बढ़ा है या घटा है. 

मोदी vs कौन ? कांग्रेस के लिए होगा बड़ा सवाल

साल 2024 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए एक सवाल पैदा करता है कि कांंग्रेस किसकी लीडरशिप में आम चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी ही हैं. लेकिन अगर राहुल गांधी को पीएम कैंडिडेट घोषित कर दिया जाता है तो मुकाबला राहुल बनाम मोदी का हो जाएगा. जो बीजेपी के पक्ष में और कांग्रेस के खिलाफ जा सकता है इसका नतीज 2019 में देखा जा चुका है. हालांकि कांग्रेस का दावा है कि भारत जोड़ो यात्रा के बाद कई राज्यों खासकर दक्षिण में राहुल गांधी के पक्ष में माहौल बन गया है. कांग्रेस इसको कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों से भी जोड़ रही है.

हार की वजह मोदी की लोकप्रियता में कमी?

वरिष्ठ पत्रकार ओम सैनी ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कहते हैं कि कर्नाटक में कांग्रेस का उदय जनता की आवाज है. कांग्रेस ने पहली बार कर्नाटक में अमित शाह और पीएम मोदी को आगे बढ़ने से रोका. आम जनता से रोजगार, खेती को मुद्दा बनाकर वोट दिया जो एक संकेत माना जा सकता है कि अब आम जनता जागरुक हो रही है, कर्नाटक में कांग्रेस को सबसे ज्यादा वोट महिलाओं ने डाले हैं जो बदलते भारत की तस्वीर है. 

हालांकि सैनी ये भी कहते हैं कि भारत के मतदाता विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जनादेश अलग-अलग तरह से देते हैं. कर्नाटक में बीजेपी के पास स्थानीय नेतृत्व कांग्रेस के मुकाबले कमजोर है. कांग्रेस की जीत पीएम मोदी की लोकप्रियता में कमी होने के कारण हुई ऐसा नहीं कहा जा सकता है. ओम सैनी ने बताया कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखते ही बीजेपी को चुनाव प्रचार और मुद्दों में बदलाव की जरूरत हो सकती है. 

ओम सैनी ने कहा "बीजेपी को ये नहीं भूलना चाहिए कि मतदाता परिपक्व हो गए हैं. 2019 में लोकसभा मतदाता के पास मोदी के अलावा किसी और विकल्प पर विचार करने की कोई बड़ी वजह नहीं थी. लेकिन 2024 में उनके पास विकल्प हो सकते हैं. 1935 में आजादी से पहले भारत में कुछ सुधार हो रहे थे और 1947 में भारत आजाद हो गया, तो ऐसा पहली बार नहीं है जब बदलाव बेहद ही कम समय में हुआ है. 

कर्नाटक में कांग्रेस को मिली जीत के बाद कांग्रेस, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, केजरीवाल जिस तरह से उत्साहित हैं , वो बीजेपी को 2024 के लोकसभा चुनावों में परेशान कर सकते हैं. 

क्या मुस्लिमों पर चल पाएगा मोदी मैजिक

ओम सैनी ने कहा 'कर्नाटक की बात करें तो कांग्रेस ने वहां पर नैरेटिव बहुत ही शानदार तरीके से गढ़ा. दूसरी तरफ कर्नाटक में बीजेपी को लेकर एक सत्ता विरोधी लहर थी. कर्नाटक के नतीजों में बीजेपी का वोट प्रतिशत नहीं घटा है जेडिएस का वोट प्रतिशत घटा है. यानी मुस्लिमों ने बहुत ही प्रैक्टिकल वोटिंग की. मुस्लिमों को लगा कि कांग्रेस बीजेपी को हरा सकती है. देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा में मुस्लिमों का वोट प्रतिशत किस तरफ जाएगा. 

कर्नाटक नतीजों ने ये साबित कर दिया है कि विपक्ष कितना ताकतवर हो सकता है अगर रोने के बजाय एकजुट होकर जीत पर ध्यान केंद्रित करे. अगर ऐसा हो तो 2019 में जो हुआ वो 2024 के लोकसभा चुनाव नहीं दोहराया जाएगा. दूसरी तरफ पीएम  मोदी और बीजेपी किसी भी चीज को हल्के में नहीं लेते हैं. कर्नाटक में मिली हार से बीजेपी के रणनीतिकारों को पूरी तरह से चौकन्ना कर दिया है.

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