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200 से अधिक शिक्षाविदों ने PM मोदी को लिखा पत्र, कहा- लेफ्ट विंग ने शिक्षण संस्थानों का माहौल बिगाड़ा

देश के अनेक विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों ने कैंपस में वामपंथियों की हिंसा के खिलाफ पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने कहा कि इन लोगों की वजह से कैंपस का माहौल खराब हो रहा है.

नई दिल्ली: देश के अनेक यूनिवर्सिटी के कुलपतियों समेत 208 शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने वामपंथी संगठनों पर कैंपस में हिंसा फैलाने का आरोप लगाया है. चिट्ठी में लिखा गया है कि लेफ्ट विंग एक्टिविस्ट्स की गतिविधियों की वजह से कैंपस में पढ़ाई-लिखाई का काम बाधित होता है और इससे विश्वविद्यालयों का माहौल खराब हो रहा है. इन शिक्षाविदों ने आरोप लगाया है कि इन ग्रुप्स द्वारा कम उम्र के छात्रों को वैचारिक रूप से प्रभावित किया जा रहा है जिससे नए छात्र पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. पीएम मोदी को ये पत्र शनिवार को लिखा गया है.

पीएम मोदी को लिखे इस पत्र में शिक्षाविदों ने कहा, "हम शिक्षाविदों का समूह शिक्षण संस्थानों में बन रहे माहौल पर अपनी चिंताएं बताना चाहते हैं. हमने यह महसूस किया है कि शिक्षण संस्थानों में शिक्षा सत्र के रोकने और बाधा डालने की कोशिश छात्र राजनीति के नाम पर वामपंथ एक एजेंडे के तहत कर रहा है. हाल ही में जेएनयू से लेकर जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से लेकर जाधवपुर विश्वविद्यालय के माहौल में जिस तरह की गिरावट आई है वह वामपंथियों और लेफ्ट विंग एक्टिविस्ट के एक छोटे समूह की वजह से हुआ है.''

इन शिक्षाविदों ने कहा, ''इन संस्थानों में वामपंथियों की वजह से पढ़ाई-लिखाई के कामों में बाधा पहुंची है. छोटी उम्र में ही छात्रों को रेडिकलाइज करने की कोशिश ना केवल उनके सोचने की क्षमता बल्कि उनकी कौशल को भी प्रभावित कर रही है. इसकी वजह से छात्र ज्ञान और जानकारी की नई सीमाओं को लांघने और खोजने की बजाय छोटी राजनीति में उलझ रहे हैं. विचारधारा के नाम पर अनैतिक राजनीति करके समाज और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ असहिष्णुता बढ़ाई जा रही है. इस तरह के प्रयासों से बहस को सीमित करके विश्वविद्यालयों और संस्थानों को दुनिया की नजरों से दूर करने की कोशिश की जा रही है.''

शिक्षाविदों ने कहा, ''विद्यार्थियों के विभिन्न समूह और वर्गों के बीच असहिष्णुता जन्म ले रही है बल्कि अध्यापकों और बुद्धिजीवियों के बीच भी खराब माहौल बन रहा है. सार्वजनिक स्थानों पर अपनी बात स्वतंत्र रूप से रखने में बेहद मुश्किल हो रही है और ऐसे कार्यक्रम करना भी कठिन होता जा रहा है क्योंकि लेफ्ट विंग राजनीति सेंसरशिप थोप रही है. धरना प्रदर्शन हड़ताल और बंद वामपंथियों के प्रभाव वाले इलाके में आम हो गए हैं. वामपंथी विचारधारा से सहमत नहीं होने पर व्यक्तिगत रूप से निशाना साधना और सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करना, तंग करना ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है.''

उन्होंने कहा, ''लेफ्ट विंग की राजनीति की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब छात्रों और मित्र समुदाय से आने वाले छात्रों को हुआ है. लेफ्ट विंग की वजह से वे पढ़ने-सीखने और बेहतर भविष्य बनाने के अवसरों से चूक रहें. वैकल्पिक राजनीति करने और अपने स्वतंत्र विचारों को रखने के मौके भी उनसे छीने जा रहे हैं. वह अपने आप को वामपंथियों की राजनीति से घिरा हुआ पाते हैं. हम सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं की ओर से अपील करते हैं कि वह एक साथ आएं और शिक्षा की स्वतंत्रता, भाषण की आजादी और बहु विचार के साथ खड़े हों.''

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