Explained: भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के मुकाबले AI की रेस में कहां खड़ा है?
वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में जब एशिया के तीन प्रमुख देशों चीन, दक्षिण कोरिया और भारत की तुलना की जाती है, तो तीनों की क्षमताएं, चुनौतियां और रणनीतियां अलग-अलग दिखाई देती हैं.

इस वक्त पूरी दुनिया में AI की रेस है. हर देश एक-दूसरे से इस रेस में आगे रहने की कोशिश में लगा हुआ है. दक्षिण एशियाई देश भी पीछे नहीं है. विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट ‘इंडिया एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: सीजिंग द डेवलपमेंट अपॉर्च्युनिटी’ ने भारत को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. भारत अब इस रिपोर्ट के अनुसार, AI को अपनाने और इसके उभरते बाजारों में दुनिया के टॉप-10 देशों में अपनी जगह बना ली है. देश में AI क्षेत्र में निजी निवेश साल 2024 के 1.2 अरब डॉलर से तीन गुना से अधिक बढ़कर 2025 में 4.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.
इसके साथ ही, भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में काम करने वाले AI और टेक पेशेवरों की संख्या 19 लाख से बढ़कर 23.6 लाख हो चुकी है. हालांकि इस खबर के बाद भी दक्षिण एशियाई देशों में अभी भारत काफी पीछे हैं. आइए स्थिति देखें.
भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के मुकाबले कहां खड़ा है?
वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में जब एशिया के तीन प्रमुख देशों चीन, दक्षिण कोरिया और भारत की तुलना की जाती है, तो तीनों की क्षमताएं, चुनौतियां और रणनीतियां अलग-अलग दिखाई देती हैं.
चीन: AI सुपरपावर की होड़ और विशाल सरकारी-निजी बजट
चीन वैश्विक स्तर पर अमेरिका के बाद AI का सबसे बड़ा केंद्र है. चीन में सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर प्रतिवर्ष दर्जनों अरब डॉलर AI शोध, डेटा सेंटर, सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर निर्माण में झोंकते हैं. चीन के पास 'डीपसीक', 'बैदू' और 'अलीबाबा' जैसे अपने विशाल एलएलएम और स्वदेशी AI इकोसिस्टम हैं.
जहां चीन अपनी मजबूत हार्डवेयर क्षमता और भारी निवेश के बल पर अमेरिका से सीधे मुकाबला कर रहा है, वहीं भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल सॉफ्टवेयर वर्कफोर्स, आईटी सर्विस सेक्टर और कम लागत वाले AI समाधान तैयार करने की क्षमता है.
दक्षिण कोरिया: सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड टेक का पावरहाउस
दक्षिण कोरिया सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियों के ज़रिए, AI चिप्स, मेमोरी कार्ड (HBM) और हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया का नेतृत्व करता है. दक्षिण कोरिया की जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में जाता है.
दक्षिण कोरिया जहां AI की नींव (हार्डवेयर व चिप्स) बनाने में आगे है, वहीं भारत के पास विशाल उपभोक्ता बाजार और 23.6 लाख से अधिक टेक-पेशेवरों की जनशक्ति है. भारत डेटा खपत और सर्विस डिलीवरी में आगे है, लेकिन सेमीकंडक्टर विनिर्माण में अभी शुरुआत कर रहा है.
भारत की स्थिति: वर्कफोर्स और बैक-ऑफिस से 'AI क्रिएटर' बनने की ओर
भारत में 2025 के दौरान AI में निजी निवेश बढ़कर 4.1 अरब डॉलर पहुंच गया है. यह तीन गुना की वृद्धि दर्शाती है कि वैश्विक निवेशक भारत के AI बाजार को लेकर गंभीर हैं.
भारत दुनिया भर की फॉर्च्यून-500 कंपनियों का AI और टेक हब बन चुका है. देश में 23.6 लाख GCC कर्मी काम कर रहे हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के लिए उच्च-स्तरीय AI मॉडल और बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहे हैं.
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का ध्यान केवल भारी-भरकम तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि कम लागत वाले 'स्मॉल AI' समाधानों पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य स्थानीय भाषा-आधारित AI टूल्स के जरिए छोटे कारोबारियों, कृषि और सरकारी सेवाओं की दक्षता सुधारना है.
चुनौतियां और आगे की राह
विश्व बैंक ने आगाह किया है कि मशीन लर्निंग और AI के तेजी से बढ़ने से भारतीय श्रम बाजार पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है. इसके लिए वर्कफोर्स को री-स्किल करना आवश्यक होगा.
AI का लाभ सिर्फ बड़े टेक दिग्गजों तक सीमित न रहे, बल्कि लागत और तकनीकी बाधाओं को दूर कर इसे जमीनी स्तर के व्यापारियों तक पहुंचाना भारत के लिए मुख्य प्राथमिकता है.
भारत भले ही इस समय AI चिप्स और हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग में चीन व दक्षिण कोरिया से पीछे हो, लेकिन अपने 23.6 लाख प्रतिभाशाली टेक वर्कफोर्स, 4.1 अरब डॉलर के निजी निवेश और विशाल डिजिटल डेटाबेस (डिजिटल इंडिया) के दम पर भारत दुनिया का सबसे तेजी से उभरता 'AI एप्लिकेशंस और सर्विसेज' का वैश्विक केंद्र बनकर उभर रहा है.


















