DU में AMU-BHU जैसे हॉस्टल क्यों नहीं मिल सकते? सत्य निकेतन हादसे के बाद उठे सवाल
देश के टॉप विश्वविद्यालयों में गिने जाने वाले डीयू में हर साल हजारों छात्र एडमिशन लेते हैं, लेकिन रहने की सुविधाओं के मामले में यह संस्थान बीएचयू और AMU से काफी पीछे छूट गया है.

दिल्ली के सत्य निकेतन इमारत हादसे में बचाव अभियान का काम पूरा हो गया है. पुलिस के मुताबिक कुल 12 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लोगों का अभी इलाज चल रहा है. ये हादसा अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया है, जिसमें सबसे अहम ये है कि दिल्ली के छात्रों को AMU और BHU जैसे विश्वविद्यालय की तरह हॉस्टल की सुविधाएं क्यों नहीं मिल सकती?
BHU और AMU से पीछे छूट गया DU
देश के टॉप विश्वविद्यालयों में गिने जाने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में हर साल देश-विदेश से हजारों छात्र एडमिशन लेते हैं, लेकिन रहने की सुविधाओं के मामले में यह संस्थान बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से काफी पीछे छूट गया है. दिल्ली विश्वविद्यालय के नियमित पाठ्यक्रमों और विभागों में लगभग 2.5 लाख छात्र पढ़ते हैं, लेकिन पूरे विश्वविद्यालय में कुल हॉस्टल क्षमता महज 7,000 सीटों की है. इसका मतलब है कि डीयू में सिर्फ 3 फीसदी से कुछ अधिक छात्रों को ही हॉस्टल मिल पाता है. वहीं BHU और AMU अपने लगभग आधे छात्रों को परिसर में रहने की सुविधा देता है.

1922 में सेंट स्टीफन, हिंदू और रामजस कॉलेज के साथ शुरू हुए दिल्ली विश्वविद्यालय से आज करीब 90 कॉलेज संबद्ध हैं. हालांकि, इनमें से केवल 20 कॉलेजों के पास ही अपना हॉस्टल है. डीयू में बसे ज्यादा हॉस्टल 1948 से 1970 के दशक में बने हैं. 1970 के दशक में जब डीयू से संबद्ध 40 कॉलेज थे और छात्रों की संख्या करीब 82 हजार थी, तब हॉस्टल में 3 से 4 हजार छात्रों के रहने की व्यवस्था थी. उस समय करीब 5 फीसदी छात्रों को हॉस्टल मिल जाता था. बीते दशकों में छात्रों की संख्या तीन गुना बढ़कर 2.5 लाख पहुंच गई है, लेकिन हॉस्टल की क्षमता उस अनुपात में नहीं बढ़ सकी.
AMU और BHU में क्यों बेहतर हैं हालात?
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना 1875 में हुई थी. इसे 1920 में यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला. यहां कुल 36 हजार छात्रों पर 19 हॉल और 80 हॉस्टल उपलब्ध हैं. इनमें करीब 17,000 छात्रों के रहने की व्यवस्था है, यानी AMU अपने 47 फीसदी छात्रों को हॉस्टल की सुविधा देता है. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की बात करें तो इसकी स्थापना 1916 में हुई थी. इसे एशिया का सबसे बड़ा रेजिडेंशियल विश्वविद्यालय कहा जाता है. BHU में करीब 35 हजार कुल छात्रों में से 17,000 छात्र कैंपस हॉस्टलों में रहते हैं. 79 हॉस्टलों के साथ बीएचयू अपने 48 फीसदी छात्रो को रहने की सुविधा देता है.

निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय में पिछले 8-9 वर्षों के दौरान कोई भी बड़ा नया हॉस्टल बनकर तैयार नहीं हुआ है. नए प्रोजेक्ट्स अभी केवल कागजी मंजूरी या शुरुआती निर्माण के स्तर पर लटके हैं. मुखर्जी नगर के ढाका कॉम्प्लेक्स में 1,436 छात्रों की क्षमता वाले इस बड़े हॉस्टल का भूमि पूजन सितंबर 2025 में हुआ था, जिसका निर्माण कार्य अभी जारी है. हिंदू कॉलेज में नया बॉयज हॉस्टल और गर्ल्स हॉस्टल विस्तार योजना और मंजूरी चल रही है. मिरांडा हाउस में 120 बेड वाले नए हॉस्टल की घोषणा जुलाई 2026 में की गई थी, लेकिन इसका निर्माण कार्य अभी शुरू होना बाकी है. हंसराज कॉलेज में हाल ही में नए हॉस्टल ब्लॉक के निर्माण को मंजूरी दी गई है.





















