लैब टेस्ट के लिए सिर्फ चूहे क्यों होते हैं इस्तेमाल, बाकी जानवर क्यों नहीं?
Laboratory Mice: क्या आपने कभी सोचा है कि लैब टेस्ट के लिए सिर्फ चूहों पर ही क्यों एक्सपेरिमेंट किया जाता है? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.

Laboratory Mice: जब भी वैज्ञानिक कोई नई दवा, टीका या फिर उपचार बनाते हैं तो वे तुरंत उसका मनुष्य पर परीक्षण नहीं कर सकते. शोधकर्ताओं को सबसे पहले यह समझने की जरूरत है कि कोई भी पदार्थ जीवित शरीर के अंदर कैसे व्यवहार करता है. इस उद्देश्य के लिए चूहे सबसे सही इस्तेमाल किए जाने वाले प्रयोगशाला जानवरों में से कुछ बन गए हैं. उनकी लोकप्रियता इस वजह से नहीं है कि अन्य जानवर काम के नहीं हैं. बल्कि इस वजह से है क्योंकि चूहे समानता, जैविक उपयोगिता, तेजी से प्रजनन और अपेक्षाकृत कम लागत को जोड़ते हैं.
उनके जीवविज्ञान में मनुष्यों के साथ जरूरी समानताएं हैं
चूहे स्तनधारी हैं और मनुष्य के साथ कई मूलभूत जैविक प्रक्रियाओं को साझा करते हैं. उनके प्रमुख अंग जिनमें दिल, लिवर, गुर्दे, फेफड़े और दिमाग शामिल हैं तुलनीय बुनियादी काम करते हैं. उनके जीन भी मानव जीन के साथ पर्याप्त ओवरलैप करते हैं. इससे शोधकर्ताओं को यह अध्ययन करने की अनुमति मिलती है की खास जीन बीमारियों को कैसे प्रभावित करते हैं और संभावित उपचार शरीर को कैसे प्रभावित करते हैं. हालांकि चूहे लघु मानव नहीं है. चूहों में प्राप्त परिणाम अपने आप से लोगों तक नहीं पहुंचते हैं. यही वजह है कि आशाजनक उपचार को मानव इस्तेमाल से पहले आगे के परीक्षण से गुजरना पड़ता है.

उनमें इंसान जैसी बीमारियां विकसित हो सकती हैं
शोधकर्ता उन स्थिति से प्रभावित चूहों का अध्ययन कर सकते हैं जो मानव रोगों से मिलती-जुलती हैं. इनमें कुछ प्रकार के कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और तंत्रिका संबंधी विकार शामिल हैं. वैज्ञानिक यह देख सकते हैं कि कोई बीमारी कैसे विकसित होती है और फिर परीक्षण कर सकते हैं कि क्या संभावित उपचार से इसकी प्रगति में कोई बदलाव आता है.
उनका छोटा जीवनकाल रिसर्च को रफ्तार देता है
एक प्रयोगशाला चूहा आमतौर पर लगभग 2 से 3 साल तक जीवित रहता है. इंसानों की तुलना में यह काफी छोटा है. इस वजह से वैज्ञानिक अपेक्षाकृत कम शोध समय के अंदर पूरे जीवन काल में किसी उपचार, बीमारी या फिर अनुवांशिक परिवर्तन के प्रभाव का निरीक्षण कर सकते हैं. उनका तीव्र जीवनचक्र आनुवांशिक और प्रजनन अध्ययन के लिए भी मूल्यवान है.
चूहे काफी तेजी से प्रजनन करते हैं
एक चूहे की गर्भावस्था लगभग तीन हफ्ते तक चलती है. साथ ही मादा कई बच्चे पैदा कर सकती है. यह शोधकर्ताओं को बड़े स्तनधारी की तुलना में काफी ज्यादा तेजी से प्रजनन आबादी स्थापित करने और कई पीढ़ियों में अनुवांशिक परिवर्तन का अध्ययन करने की अनुमति देता है. वंशानुगत बीमारी या फिर अनुवांशिक संसाधनों से जुड़े अध्ययनों के लिए यह तीव्र प्रजनन काफी समय बचा सकता है.

उनके जीन को सटीक रूप से संशोधित किया जा सकता है
चूहों का सबसे बड़ा फायदा उनके जीन को बदलने की क्षमता है. मानव स्थिति के प्रयोग मॉडल बनाने के लिए वैज्ञानिक खास जीन को बंद कर सकते हैं या फिर खास अनुवांशिक परिवर्तन पेश कर सकते हैं. इन्हें अक्सर आनुवंशिक रूप से संशोधित या फिर नॉकआउट चूहे कहा जाता है. यह देखकर कि जब किसी खास जीन में परिवर्तन होता है तो क्या होता है, शोधकर्ता बीमारी में इसकी भूमिका को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं.
जरूरत पड़ने पर दूसरे जानवरों का इस्तेमाल
यह मानना गलत है कि सभी प्रयोगशाला अनुसंधान चूहों पर ही किए जाते हैं. वैज्ञानिक सवाल के आधार पर शोधकर्ता चूहा, खरगोश, मछली, सूअर, कुत्ते, गैर मानव प्राइमेट या फिर दूसरे मॉडल का इस्तेमाल कर सकते हैं. उदाहरण के लिए सूअर कुछ अध्ययनों में उपयोगी हो सकते हैं क्योंकि उनकी शारीरिक रचना और शरीर विज्ञान के पहलू चूहों की तुलना में मनुष्य से ज्यादा मिलते-जुलते हैं.
क्यों न सिर्फ मनुष्य के निकटतम जानवरों का इस्तेमाल किया जाए?
चिंपांजी और दूसरे प्राइमेट्स में मनुष्य के साथ ज्यादा जैविक समानताएं हैं. लेकिन उन्हें बनाए रखना और पर्याप्त नैतिक चिंता को उठाना काफी महंगा है. इस वजह से कई देशों में इनका इस्तेमाल काफी ज्यादा प्रतिबंधित है. कुत्ते, बिल्ली और बड़े खेत जानवरों को भी काफी ज्यादा स्थान और संसाधनों की जरूरत होती है. नैतिक नियम, कल्याण जरूरत और अध्ययन के वैज्ञानिक उद्देश्य सभी प्रभावित करते हैं कि किस पशु मॉडल का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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