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कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता, किन उपकरणों का होता है इस्तेमाल?

Uttarakhand Earthquake Siren: उत्तराखंड में भूकंप की चेतावनी को लेकर नई प्रणालियों का परीक्षण किया जा रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है.

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  • उत्तराखंड भूकंप चेतावनी प्रणाली परीक्षण कर जन जागरूकता बढ़ा रहा है।
  • सिस्मोग्राफ, सिस्मोमीटर भूकंप का पता लगाकर रिकॉर्ड करते हैं।
  • रिक्टर स्केल परिमाण, मर्कल्ली स्केल तीव्रता मापता है।
  • भूकंप की तीव्रता स्थान अनुसार भिन्न हो सकती है।

Uttarakhand Earthquake Siren: उत्तराखंड अपनी भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली का लगातार परीक्षण करके भूकंप के बारे में जन जागरूकता को मजबूत कर रहा है. सेंसर और सायरन का परीक्षण करने और लोगों को चेतावनी प्रणाली के बारे में बताने के लिए हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11:00 बजे पूरे राज्य में भूकंप सायरन बजाया जाएगा. सायरन वास्तविक भूकंप का संकेत नहीं देगा.

इसी बीच आइए जानते हैं कि जब भी भूकंप असलियत में आते हैं तो उन्हें कैसे मापा जाता है. इसी के साथ उनकी ताकत और प्रभाव को समझने के लिए किन उपकरणों और पैमानों का इस्तेमाल किया जाता है. 

सिस्मोग्राफ और सिस्मोमीटर

भूकंप का पता लगाने और रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्राथमिक उपकरण सिस्मोग्राफ और सिस्मोमीटर हैं. इन उपकरण का इस्तेमाल पृथ्वी की सतह के नीचे ऊर्जा जारी होने पर पैदा होने वाली जमीनी गतिविधि और भूकंपीय तरंगों का पता लगाना है. 

आधुनिक सिस्मोमीटर काफी ज्यादा संवेदनशील सेंसर का इस्तेमाल करते हैं जो काफी छोटी जमीनी कंपन का भी पता लगाते हैं और उन्हें इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल देते हैं. दर्ज की गई जानकारी वैज्ञानिकों को भूकंप की तीव्रता, स्थान और गहराई के साथ-साथ जरूरी विशेषताओं को तय करने में मदद करती है. 


कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता, किन उपकरणों का होता है इस्तेमाल?

सिस्मोग्राम क्या है?

सिस्मोग्राफ द्वारा बनाए गए दृश्य रिकॉर्ड को सिस्मोग्राम कहा जाता है. यह वक्त के साथ जमीन की रफ्तार को दर्शाता है क्योंकि भूकंपीय तरंगे किसी क्षेत्र से गुजरती हैं. वैज्ञानिक इन रिकॉर्ड की गई तरंगों को स्टडी करते हैं और भूकंप के बारे में अलग-अलग तय करने के लिए गणितीय गणना का इस्तेमाल करते हैं. कई भूकंपीय स्टेशनों का डेटा भी भूकंप के केंद्र का पता लगाने में मदद कर सकता है. 

परिमाण बनाम तीव्रता 

भूकंप को आमतौर पर दो अलग-अलग मापों के जरिए बताया जाता है. परिमाण और तीव्रता. परिमाण का मतलब होता है भूकंप द्वारा उसके स्रोत पर जारी ऊर्जा की मात्रा. इसी के साथ तीव्रता बताती है कि किसी खास स्थान पर भूकंप कितनी तेजी से महसूस किया गया है और इससे कितना नुकसान हुआ है. 


कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता, किन उपकरणों का होता है इस्तेमाल?

रिक्टर स्केल परिमाण मापता है 

रिक्टर स्केल को उपकरणों द्वारा दर्ज की गई भूकंपीय तरंगों के आधार पर भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए विकसित किया गया था. यह लघुगणक है. जिसका मतलब होता है कि एक परिमाण की वृद्धि तरंग आयाम में 10 गुना वृद्धि और लगभग 32 गुना ज्यादा ऊर्जा रिलीज को दर्शाती है. 

उदाहरण के लिए 6 तीव्रता का भूकंप 5 तीव्रता के भूकंप की तुलना में लगभग 32 गुना ज्यादा ऊर्जा पैदा करता है. रिक्टर स्केल को आमतौर पर 0 से 10 तक बताया जाता है लेकिन भूकंप किसी निश्चित ऊपरी सीमा तक सीमित नहीं होता.

बड़े भूकंप के लिए वैज्ञानिक आज आमतौर पर मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल का इस्तेमाल करते हैं. यह बड़े भूकंपों द्वारा जारी कुल ऊर्जा का ज्यादा विश्वसनीय माप देता है. 

मॉडिफाइड मर्कल्ली स्केल तीव्रता मापता है 

मॉडिफाइड मर्कल्ली स्केल तीव्रता के बजाय भूकंप की तीव्रता को मापता है. यह इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि लोग सतह पर क्या महसूस करते हैं और इमारत, बुनियादी ढांचे और आसपास के वातावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है. पैमाना I से XII तक है. निचले स्तर के झटकों के बारे में बता सकते हैं जिन पर काफी कम ध्यान दिया जाता है. इसी के साथ उच्चतम स्तर गंभीर विनाश को बताते हैं.

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तीव्रता एक जगह से दूसरी जगह पर अलग क्यों होती है? 

भूकंप का मैग्नीट्यूड चाहे कहीं भी मापा जाए वही रहता है. लेकिन अलग-अलग जगह पर इसकी इंटेंसिटी अलग-अलग हो सकती है. भूकंप के केंद्र से दूरी, स्थानीय भू विज्ञान, भूकंप की गहराई और निर्माण की गुणवत्ता सभी झटकों और नुकसान के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं.

यही वजह है कि दो शहर एक ही भूकंप का अलग-अलग अनुभव कर सकते हैं. एक जगह पर तेज झटकों और काफी ज्यादा नुकसान का अनुभव हो सकता है जबकि दूसरी जगह पर सिर्फ हल्की कंपन महसूस हो सकती है. इस वजह से भूकंप की जानकारी को बताते समय परिमाण और तीव्रता के बीच अंतर को समझना काफी जरूरी है. सिस्मोमीटर जैसे उपकरण वैज्ञानिक डेटा देते हैं जबकि परिमाण और तीव्रता के पैमाने भूकंप की ताकत और लोगों और संरचनाओं पर इसके प्रभाव को समझने में मदद करते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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