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क्या लड़ाकू विमानों की भी होती है कोई एक्सपायरी डेट, जानें कितने साल चलता है एक जेट?

Fighter Jet Lifespan: फाइटर जेट्स की भी एक एक्सपायरी डेट होती है. आइए जानते हैं कैसे होती है यह तय.

Fighter Jet Lifespan: फाइटर जेट भले ही कभी ना खत्म होने वाले मजबूत दिखें लेकिन सबसे एडवांस मिलट्री एयरक्राफ्ट की भी एक ऑपरेशनल लाइफ होती है.  हालांकि उनकी एक्सपायरी डेट सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि उन्हें बने हुए कितने साल हो गए हैं. इसके बजाय सेनाएं मुख्य रूप से एयरक्राफ्ट के उड़ने के घंटों, बनावट की हालत, मेंटेनेंस हिस्ट्री और मेटल फटीग का आकलन करती हैं. आइए जानते हैं कि फाइटर जेट्स की उम्र कैसे तैयार होती है और जब कोई फाइटर जेट अपनी सर्विस लाइफ के आखिर तक पहुंचता है तो क्या होता है.

फाइटर जेट की एक तय सर्विस लाइफ होती है 

मिलट्री एयरक्राफ्ट की एक तय ऑपरेशनल या फिर सर्विस लाइफ होती है. यह सर्विस लाइफ इस बात को तय करती है कि वह कितने समय तक सुरक्षित रूप से एक्टिव सर्विस में रह सकते हैं. एक मॉडर्न फाइटर जेट आमतौर पर लगभग 30 से 40 साल तक सेवा दे सकता है. बस शर्त यह है कि उसे नियमित मेंटेनेंस, स्ट्रक्चरल इंस्पेक्शन और टेक्नोलॉजिकल अपग्रेड मिलते रहें. हालांकि असल उम्र एयरक्राफ्ट के प्रकार और उसे कितनी तेजी या फिर ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है इस बात पर काफी ज्यादा निर्भर करती है.

उम्र से ज्यादा उड़ने के घंटे मायने रखते हैं 

फाइटर जेट की उम्र का सीधा संबंध हवा में बिताए गए घंटों की संख्या से होता है. एयरक्राफ्ट के एयरफ्रेम को एक खास संख्या में उड़ने के घंटे को झेलने के लिए डिजाइन और टेस्ट किया जाता है. कई मॉडर्न फाइटर एयरक्राफ्ट की शुरुआती डिजाइन सर्विस लाइफ लगभग 8000 उड़ने के घंटे होती है. हालांकि यह संख्या अलग-अलग एयरक्राफ्ट के लिए अलग-अलग हो सकती है. 


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8000 उड़ने के घंटे कितने समय तक चलते हैं?

कोई एयरक्राफ्ट कितने साल तक सर्विस में रहता है यह आंशिक रूप से इस बात पर निर्भर होता है कि वह कितनी बार उड़ान भरता है. अगर कोई फाइटर जेट हर साल लगभग 150 से 200 घंटे उड़ान भरता है तो 8000 उड़ने के घंटे पूरे होने में लगभग 40 से 50 साल लग सकते हैं.  हालांकि मिलट्री एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल कभी-कभी काफी ज्यादा भी हो सकता है. इस वजह से उनकी असली सर्विस लाइफ का हिसाब सिर्फ घंटे को सालाना इस्तेमाल से भाग देकर नहीं लगाया जा सकता. मेंटेनेंस और स्ट्रक्चरल इंस्पेक्शन ही आखिरकार इस बात को तय करता है कि एयरक्राफ्ट उड़ान भरने के लिए सुरक्षित है या नहीं. 

मेटल फटीग क्या है?

पुराने हो रहे फाइटर जेट के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक मेटल फटीग है. सामान्य ऑपरेशन के दौरान टेक ऑफ, लैंडिंग, तेज रफ्तार से उड़ान और तेजी से पैंतरेबाजी की वजह से एयरक्राफ्ट के स्ट्रक्चर पर बार-बार दबाव पड़ता है. फाइटर जेट को काफी ज्यादा जी फोर्स का सामना करना पड़ सकता है. खासकर लड़ाई के दौरान किए जाने वाले स्टंट्स के समय. 

हजारों उड़ान चक्र के दौरान बार-बार पड़ने वाले इस दबाव से स्ट्रक्चरल पार्ट्स में काफी बारीक दरार आ सकती है. अगर इन दरारों पर ध्यान न दिया जाए और यह बढ़ती रहे तो आखिर में यह एयरक्राफ्ट की मजबूती को कमजोर कर सकती हैं. इस वजह से फाइटर जेट की सर्विस लाइफ के दौरान उनकी बारीकी से जांच की जाती है.


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क्या फाइटर जेट की उम्र बढ़ाई जा सकती है? 

एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी और वायु सेना सर्विस लाइफ एक्सटेंशन प्रोग्राम और दूसरे आधुनिकीकरण कार्यक्रम के जरिए फाइटर जेट की ऑपरेशनल लाइफ बढ़ा सकती हैं. ऐसे कार्यक्रम के दौरान इंजीनियर एयरप्लेन की जांच करते हैं और उन पार्ट्स को बदल देते हैं या फिर मजबूत करते हैं जिन पर काफी ज्यादा दबाव पड़ा हो. इंजन, एवियोनिक्स और दूसरे सिस्टम को भी अपग्रेड किया जा सकता है. 

जब फाइटर जेट रिटायर होता है तो क्या होता है? 

जब भी कोई एयरक्राफ्ट अपनी सुरक्षित ऑपरेशनल लाइफ पूरी कर लेता है तो उसे एक्टिव मिलिट्री सर्विस से हटा दिया जाता है. रिटायरमेंट का मतलब यह नहीं है कि एयरक्राफ्ट तुरंत कबाड़ बन जाता है. कुछ रिटायर हो चुके फाइटर जेट को उनके ऐतिहासिक महत्व की वजह से म्यूजियम, एयरबेस या फिर मिलिट्री स्मारक में संभाल कर रखा जाता है. दूसरों को जमीन पर ट्रेनिंग देने के लिए ट्रेनिंग सेंटर भेज दिया जाता है.

यह भी पढ़ेंः चीनी मिल खोलने में कितना खर्चा आता है, यहां गन्ने से कैसे बनती है चीनी?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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