बिना गोली लगे कैसे झुलसा टाइगर का हाथ, कैसे असर करता है गन पाउडर?
Attack On Tiger Shroff: हाल ही में टाइगर श्रॉफ पर एक बड़ा हमला हुआ है. आइए जानते हैं कि गोली ना लगने के बावजूद भी टाइगर श्रॉफ का हाथ कैसे झुलस गया.

- मुंबई में टाइगर श्रॉफ की कार पर हुआ हमला, हाथ झुलसा.
- मजल फ्लैश, गर्म गैस से जल सकती है त्वचा.
- बारूद कण, गर्म गैस, टूटे शीशे से लगी चोट.
Attack On Tiger Shroff: मुंबई के जुहू में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर गोलीबारी की गई. इस हमले में अभिनेता सुरक्षित रहे लेकिन उन्हें चोट आई हैं. घटना के बाद सामने आए पहले वीडियो में टाइगर श्रॉफ अपने हाथ पर एक पट्टी बांधे हुए दिखाई दे रहे हैं. वह हाथ झुलसा हुआ है और बांह पर कुछ और पट्टियां भी हैं.
लेकिन सवाल यह उठता है कि बिना गोली लगने के बावजूद भी टाइगर श्रॉफ का हाथ झुलस कैसे गया? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
कैसे एक क्लोज-रेंज शॉट त्वचा को जला सकता है?
एक चलाई हुई गोली ही एकमात्र ऐसी चीज नहीं होती जो बंदूक की नली से बाहर निकलती है. फायरआर्म के डिस्चार्ज से मजल फ्लैश, तापमान वाली गैस और कभी-कभी बिना जले बारूद के कण भी निकलते हैं. जब कोई व्यक्ति बैरल के काफी करीब खड़ा होता है तो यह तत्व त्वचा या फिर कपड़ों तक पहुंच सकते हैं और चोट की वजह बन सकते हैं.
एक संभावित कारण फ्लैश बर्न है. फायरिंग से मजल पर अचानक आग की लपटें पैदा होती हैं. गर्म गैस और तेज गर्मी आसपास की त्वचा को झुलसा सकते हैं. इसका प्रभाव व्यक्ति की बंदूक से निकटता और डिस्चार्ज की स्थिति पर निर्भर करता है. इस तरह के जलने पर शरीर पर गोली मारने की जरूरत नहीं होती.
दूसरे मैकेनिज्म में बिना जले हुए बारूद के कण शामिल होते हैं. जरूरी नहीं की पूरा बारूद बंदूक के अंदर पूरी तरह से जल जाए. छोटे जलते हुए कण बाहर निकल सकते हैं और हवा में फैल सकते हैं. अगर वे हमला करते हैं या फिर आसपास की त्वचा में फंस जाते हैं तो वह छोटी-मोटी जलन पैदा कर सकते हैं.

कांच के टुकड़े और चोट दे सकते हैं
टाइगर श्रॉफ को जो चोट लगी उसमें कार का शीशा टूटना भी वजह बना. जब कांच टूटता है तो उसके टुकड़े आसपास के लोगों को कटने या फिर दूसरी चोटों की वजह बन सकते हैं. ऐसा नुकसान गोली के घाव से अलग होता है और एक ही घटना के दौरान हो सकता है.
बारूद क्या है?
गन पाउडर एक रासायनिक विस्फोटक मिश्रण है जो आमतौर पर पोटेशियम नाइट्रेट से बनाया जाता है. इसे साल्टपीटर, चारकोल और सल्फर भी कहा जाता है. बंदूक कारतूस में यह प्रोपेलेंट के रूप में काम करता है जो गोली को आगे बढ़ाता है. फायरिंग प्रक्रिया काफी तेजी से गर्मी और दबाव पैदा करती है.
जब ट्रिगर खिंचा जाता है तो फायरिंग पिन कारतूस के प्राइमर से टकराती है. प्राइमर एक चिंगारी पैदा करता है जो बारूद को जलाता है. मिलीसेकंड के अंदर जलते हुए प्रोपेलेंट से बड़ी मात्रा में काफी ज्यादा गर्म गैस पैदा होती है. इसमें नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें शामिल हैं.
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विस्फोट से गोली कैसे चलती है?
क्योंकि फैली हुई गैस कारतूस और बंदूक के अंदर ही सीमित होती है दबाव तेजी से बढ़ता है. वह दबाव गोली को बैरल से नीचे धकेलता है और काफी तेजी से आगे भेजता है. जैसे ही गोली बाहर निकलेगी गर्म गैस और मजल फ्लैश भी निकल सकता है. उनकी गर्मी किसी भी बिना जले कण के साथ आसपास की त्वचा या कपड़ों को प्रभावित कर सकती है.
इससे पता चलता है कि एक व्यक्ति गोली लगने के बिना कैसे जल सकता है. प्रोजेक्टाइल और फायरिंग के दूसरे उत्पाद अलग-अलग रास्तों को चुनते हैं और अलग-अलग खतरे पैदा करते हैं. नजदीकी सीमा पर गोली चूक जाने पर भी गर्मी और कण किसी को घायल कर सकते हैं. मुंबई की घटना में टाइगर श्रॉफ पर कोई सीधी गोली का हमला शामिल नहीं था. बारूद के संपर्क और टूटे हुए कांच को चोट के वजहों के रूप में बताया गया है.
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